भोपाल के तालाबों से सामने आई तस्वीरों ने हर किसी को चौंका दिया है। पिछले 48 घंटे के भीतर लाखों मछलियों की मौत ने न सिर्फ पर्यावरण प्रेमियों बल्कि आम लोगों की भी चिंता बढ़ा दी है। छोटी झील समेत कई जलाशयों में बड़ी संख्या में मरी हुई मछलियां मिलने के बाद प्रशासन ने जांच शुरू कर दी है। शुरुआती तौर पर पानी में ऑक्सीजन की कमी को इसकी प्रमुख वजह माना जा रहा है, जबकि विशेषज्ञ प्रदूषण और सीवेज को भी जिम्मेदार बता रहे हैं।
48 घंटे में लाखों मछलियों की मौत से मचा हड़कंप
भोपाल के अलग-अलग तालाबों में बीते दो दिनों के दौरान पांच लाख से अधिक मछलियों की मौत दर्ज की गई है। सबसे ज्यादा असर छोटी झील में देखने को मिला, जहां किनारों पर बड़ी संख्या में मछलियां तैरती दिखाई दीं। बदबू फैलने के बाद नगर निगम को विशेष अभियान चलाकर मरी हुई मछलियों को हटाना पड़ा।
ऑक्सीजन की कमी बनी सबसे बड़ा कारण
विशेषज्ञों के अनुसार बारिश के शुरुआती दौर में तालाबों का पानी तेजी से बदलता है। पहली बारिश के साथ शहर का गंदा पानी, जैविक कचरा और सीवेज सीधे तालाबों में पहुंच जाता है। इससे पानी में घुलित ऑक्सीजन का स्तर तेजी से कम हो जाता है। जब ऑक्सीजन एक निश्चित स्तर से नीचे पहुंचती है तो मछलियां अचानक मरने लगती हैं।
28 नालों का गंदा पानी बढ़ा रहा परेशानी
छोटी झील में शहर के कई प्रमुख नालों का पानी लगातार गिरता है। इन नालों के जरिए सीवेज, घरेलू कचरा और अन्य प्रदूषित पदार्थ तालाब तक पहुंचते हैं। लंबे समय से यह समस्या बनी हुई है, लेकिन मानसून के दौरान इसका असर कई गुना बढ़ जाता है, जिससे जल गुणवत्ता गंभीर रूप से प्रभावित होती है।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने शुरू की जांच
घटना के बाद मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने तालाबों के पानी के नमूने लेकर जांच शुरू कर दी है। रिपोर्ट आने के बाद यह स्पष्ट हो सकेगा कि मछलियों की मौत केवल ऑक्सीजन की कमी से हुई है या फिर प्रदूषण और सीवेज ने भी इसमें बड़ी भूमिका निभाई है।
पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे मामले
भोपाल में इससे पहले भी अलग-अलग तालाबों में मछलियों की मौत की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। हालांकि मानसून के दौरान इतनी बड़ी संख्या में मछलियों की मौत का यह सबसे गंभीर मामलों में से एक माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि समय रहते तालाबों में गिरने वाले नालों पर नियंत्रण नहीं किया गया तो भविष्य में ऐसी घटनाएं और बढ़ सकती हैं।
तालाबों को बचाने के लिए जरूरी कदम
पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि शहर के तालाबों को सुरक्षित रखने के लिए सीवेज के पानी को सीधे जलाशयों में जाने से रोकना होगा। इसके साथ ही नियमित सफाई, जल गुणवत्ता की निगरानी और प्रदूषण नियंत्रण के प्रभावी उपाय अपनाना बेहद जरूरी है। ऐसा नहीं होने पर जलीय जीवों के साथ-साथ पूरे पर्यावरण पर इसका गंभीर असर पड़ सकता है।

Leave a Comment