पन्ना-खजुराहो रेल लाइन विवाद ने मध्य प्रदेश में एक नई बहस छेड़ दी है। करीब 54 हजार पेड़ों की कटाई के बाद अब रेलवे ने प्रस्तावित रेल मार्ग के डिजाइन और एलाइनमेंट को लेकर जांच के आदेश दिए हैं। अधिकारियों के अनुसार, परियोजना के लिए तैयार किया गया मूल मार्ग सुरक्षा मानकों के अनुरूप नहीं था, जिसके चलते इसे रद्द कर नए रूट पर विचार किया जा रहा है।
पन्ना-खजुराहो रेल लाइन विवाद क्यों बढ़ा?
करीब 2,100 करोड़ रुपये की लागत वाली पन्ना-खजुराहो रेल परियोजना को वर्ष 2021 में मंजूरी मिली थी। इस परियोजना का उद्देश्य क्षेत्र में बेहतर रेल संपर्क उपलब्ध कराना था। योजना के तहत 72 किलोमीटर लंबी रेल लाइन, छह रेलवे स्टेशन और दर्जनों पुलों का निर्माण प्रस्तावित था।
हालांकि निर्माण कार्य शुरू होने से पहले ही कुछ अधिकारियों ने रेल मार्ग के डिजाइन पर सवाल उठाए। जांच में सामने आया कि प्रस्तावित लाइन में कई तीखे मोड़ थे, जो रेलवे सुरक्षा मानकों के अनुसार उपयुक्त नहीं माने गए। इसके बाद रेलवे ने पुराने एलाइनमेंट को रद्द करने का निर्णय लिया।
54 हजार से अधिक पेड़ों की कटाई पर उठे सवाल
परियोजना के लिए वन भूमि का उपयोग करने की अनुमति मिलने के बाद बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई की गई। रिपोर्टों के अनुसार, 54,578 पेड़ काटे जा चुके हैं। अब जब पुराना मार्ग बदलने की तैयारी हो रही है, तो पर्यावरणीय नुकसान को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
चिंता की बात यह है कि नए प्रस्तावित मार्ग के लिए भी बड़ी मात्रा में वन भूमि की आवश्यकता पड़ सकती है। शुरुआती आकलनों के अनुसार, नए रूट के निर्माण के लिए हजारों अतिरिक्त पेड़ों की कटाई करनी पड़ सकती है।
रेलवे ने गठित की तकनीकी समिति
मामले की गंभीरता को देखते हुए रेलवे प्रशासन ने तीन सदस्यीय तकनीकी समिति का गठन किया है। यह समिति जांच करेगी कि मूल एलाइनमेंट को मंजूरी कैसे मिली और उसमें मौजूद खामियों को पहले क्यों नहीं पहचाना गया।
समिति यह भी पता लगाएगी कि करोड़ों रुपये खर्च होने और बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई के बाद मार्ग बदलने की नौबत क्यों आई। अधिकारियों का कहना है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
नए मार्ग पर चल रहा विचार
रेलवे अब नए एलाइनमेंट को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया में जुटा है। बताया जा रहा है कि नया मार्ग पुराने रूट से कुछ दूरी पर तैयार किया जा सकता है। साथ ही विशेषज्ञों को यह निर्देश दिया गया है कि पर्यावरण पर न्यूनतम प्रभाव डालने वाले विकल्पों पर विचार किया जाए।
रेल मंत्रालय का कहना है कि परियोजना को आगे बढ़ाने के दौरान पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता दी जाएगी और प्रभावित पेड़ों की संख्या से दोगुने पौधे लगाए जाएंगे।
पर्यावरणविदों ने जताई चिंता
पर्यावरण विशेषज्ञों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस मामले को गंभीर बताया है। उनका कहना है कि बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई से क्षेत्र की जैव विविधता और वन्यजीवों पर असर पड़ा है। विशेष रूप से पन्ना टाइगर रिजर्व के आसपास के क्षेत्र में पर्यावरणीय संतुलन प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि परियोजना की योजना और स्वीकृति प्रक्रिया में हुई संभावित चूक के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए। वहीं स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि जांच के बाद सच्चाई सामने आएगी और भविष्य में ऐसी गलतियों को रोका जा सकेगा।

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