नई दिल्ली में NEET-UG पेपर लीक के विरोध में हुए प्रदर्शन से जुड़ा फेस रिकग्निशन टेक्नोलॉजी का मामला अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों की पहचान के लिए दिल्ली पुलिस द्वारा कथित तौर पर चेहरे पहचानने वाली तकनीक के इस्तेमाल के खिलाफ दाखिल याचिका पर शीर्ष अदालत ने सुनवाई के लिए सहमति जताई है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने इस मामले को जंतर-मंतर प्रदर्शन से जुड़ी अन्य याचिकाओं के साथ सुनवाई में शामिल करने का निर्देश दिया है।
प्रदर्शनकारियों की पहचान के लिए फेस रिकग्निशन के इस्तेमाल पर सवाल
याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मेनका गुरुस्वामी ने अदालत के सामने फेस रिकग्निशन तकनीक के इस्तेमाल का मुद्दा उठाया। उनका कहना है कि प्रदर्शन के दौरान पुलिस इस तकनीक के जरिए लोगों की पहचान कर रही है। याचिका में यह भी सवाल उठाया गया है कि इस प्रक्रिया के दौरान जुटाया गया चेहरा पहचान संबंधी डेटा निजी कंपनियों के पास रखे जाने की बात सामने आई है।
सुप्रीम कोर्ट ने दूसरी याचिकाओं के साथ जोड़ा मामला
सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका को जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शन से संबंधित अन्य मामलों के साथ जोड़ने का आदेश दिया है। इससे फेस रिकग्निशन तकनीक के इस्तेमाल और प्रदर्शनकारियों की निजता से जुड़े सवालों पर अब शीर्ष अदालत के सामने विस्तार से सुनवाई का रास्ता साफ हो गया है।
19 अगस्त को होगी मामले की अगली सुनवाई
मामले की अगली सुनवाई 19 अगस्त को निर्धारित की गई है। अदालत पहले ही NEET-UG 2026 पेपर लीक से जुड़ी कई याचिकाओं पर सुनवाई कर चुकी है। अब फेस रिकग्निशन तकनीक से जुड़ा मुद्दा भी इसी व्यापक मामले के साथ अदालत के सामने आएगा।
NEET पेपर लीक मामले में NTA पर भी उठे सवाल
NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले में याचिकाकर्ताओं ने परीक्षा कराने वाली राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी यानी NTA की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं। याचिकाओं में मांग की गई है कि परीक्षा व्यवस्था को और अधिक सुरक्षित और भरोसेमंद बनाने के लिए मौजूदा संस्था में बदलाव किया जाए या उसके स्थान पर एक नई संस्था बनाई जाए।
केंद्र ने परीक्षा व्यवस्था को सुरक्षित बनाने के लिए बताए कदम
केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे में परीक्षा प्रणाली को मजबूत करने के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी दी है। सरकार के अनुसार पेपर लीक और नकल जैसी घटनाओं पर रोक लगाने के लिए 2026 में बनाए गए नए कानून में कड़े प्रावधान किए गए हैं। इसके तहत ऐसे अपराधों में 10 साल तक की सजा और 5 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान बताया गया है।
नंदन नीलेकणी की अध्यक्षता में बनी टास्क फोर्स
केंद्र सरकार के मुताबिक परीक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए एक टास्क फोर्स का गठन भी किया गया है। इसकी अध्यक्षता इंफोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणी कर रहे हैं। यह टास्क फोर्स मौजूदा परीक्षा प्रणाली का अध्ययन कर उसे अधिक सुरक्षित और तकनीकी रूप से मजबूत बनाने के लिए सुझाव देगी।
फेस रिकग्निशन मामला क्यों है अहम?
प्रदर्शनकारियों की पहचान के लिए फेस रिकग्निशन तकनीक के इस्तेमाल ने निजता और व्यक्तिगत डेटा की सुरक्षा से जुड़े सवाल खड़े किए हैं। एक तरफ पुलिस और प्रशासन के लिए तकनीक पहचान प्रक्रिया को आसान बना सकती है, वहीं दूसरी तरफ नागरिकों के चेहरे से जुड़ा डेटा कैसे एकत्र किया जाता है, कहां रखा जाता है और उसका इस्तेमाल किस तरह होता है, इस पर स्पष्ट नियमों की जरूरत का सवाल भी महत्वपूर्ण हो जाता है।
सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर टिकी नजर
अब 19 अगस्त को होने वाली सुनवाई पर छात्रों, अभिभावकों और परीक्षा व्यवस्था से जुड़े लोगों की नजर रहेगी। कोर्ट इस मामले में फेस रिकग्निशन तकनीक के इस्तेमाल से जुड़े तर्कों के साथ-साथ NEET-UG परीक्षा व्यवस्था और पेपर लीक से संबंधित व्यापक मुद्दों पर भी सुनवाई करेगा। आने वाले दिनों में अदालत की कार्यवाही से इस मामले की दिशा और स्पष्ट होने की उम्मीद है।

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