जबलपुर में सामने आए करोड़ों रुपये के धान परिवहन घोटाले को लेकर मध्यप्रदेश हाई कोर्ट ने बड़ा आदेश दिया है। नागरिक उपभोक्ता मंच की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने धान परिवहन से जुड़ी गड़बड़ियों की प्रदेश स्तर पर जांच के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने प्रदेश के सभी कलेक्टरों को कार्रवाई करने और जांच रिपोर्ट न्यायालय में पेश करने के निर्देश दिए हैं।
जबलपुर से सामने आया मामला, अब पूरे प्रदेश तक पहुंची जांच
जबलपुर में कलेक्टर की सतर्कता से धान परिवहन में गड़बड़ी का मामला सामने आया था। इसके बाद इस मामले के तार प्रदेश के दूसरे जिलों से जुड़े होने की आशंका जताई गई। नागरिक उपभोक्ता मंच के पीजी नाजपांडे और रजत भार्गव की जनहित याचिका पर हाई कोर्ट में सुनवाई हुई।
27 जिलों के कलेक्टरों को पहले ही दिए जा चुके हैं जांच के निर्देश
याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता दिनेश उपाध्याय ने कोर्ट को बताया कि जबलपुर में पकड़ी गई गड़बड़ी से संकेत मिलता है कि धान परिवहन में ऐसी अनियमितताएं अन्य जिलों में भी हो सकती हैं। उन्होंने बताया कि सरकार पहले ही प्रदेश के 27 जिलों के कलेक्टरों को जांच के निर्देश दे चुकी है।
चार जिलों में कार्रवाई, लेकिन कोर्ट ने माना पर्याप्त नहीं
सुनवाई के दौरान बताया गया कि मंडला, बालाघाट, सिवनी और डिंडौरी में कुछ प्रकरण दर्ज कर कार्रवाई की गई है। हालांकि याचिकाकर्ताओं का कहना था कि यह कार्रवाई पर्याप्त नहीं है। इसी आधार पर प्रदेश स्तर पर जांच की जरूरत बताई गई।
सिविल सप्लाईज कारपोरेशन से मांगा गया शपथपत्र
हाई कोर्ट ने मध्य प्रदेश सिविल सप्लाईज कारपोरेशन को शपथपत्र पेश करने के निर्देश दिए हैं। इसमें जबलपुर कलेक्टर द्वारा गड़बड़ी पकड़े जाने के बाद निगम की ओर से प्रदेश स्तर पर की गई कार्रवाई का विवरण मांगा गया है। कोर्ट ने अब तक हुई जांच और कार्रवाई की पूरी जानकारी भी प्रस्तुत करने को कहा है।
ईओडब्ल्यू को भी स्टेटस रिपोर्ट पेश करने का निर्देश
धान परिवहन घोटाले से जुड़े मामले में आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ यानी ईओडब्ल्यू को भी हाई कोर्ट के सामने स्टेटस रिपोर्ट पेश करनी होगी। रिपोर्ट में जांच की स्थिति और अब तक की गई कार्रवाई की जानकारी देने के निर्देश दिए गए हैं।
जबलपुर कलेक्टर की सतर्कता का कोर्ट ने लिया संज्ञान
सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने इस बात पर भी गौर किया कि अगर जबलपुर कलेक्टर सतर्क नहीं होते तो यह गड़बड़ी सामने नहीं आती। कोर्ट ने कहा कि दूसरे जिलों के कलेक्टरों को भी अपने स्तर पर ऐसी अनियमितताओं के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए थी।
अब किन पहलुओं की होगी जांच
हाई कोर्ट के आदेश के बाद प्रदेशभर में धान परिवहन से जुड़े रिकॉर्ड की जांच का रास्ता साफ हो गया है। परिवहन में इस्तेमाल वाहनों की वास्तविक क्षमता, परिवहन दस्तावेज, भुगतान और संबंधित अधिकारियों की भूमिका जैसे पहलुओं की जांच की जाएगी। जबलपुर में सामने आई गड़बड़ी अब पूरे प्रदेश में जांच का आधार बन गई है

Leave a Comment