उज्जैन में सिंहस्थ-2028 से पहले शहर की कई प्रमुख सड़कों के चौड़ीकरण और नए मार्गों के विकास का काम चल रहा है। गुदरी चौराहा-पानदरीबा-हरसिद्धि पाल मार्ग, दानीगेट, नीलगंगा, तिलकेश्वर, अंकपात चौराहा-खाकचौक-मंगलनाथ और महाकाल चौराहा-गोपाल मंदिर-कमरी मार्ग समेत कई जगहों पर काम प्रस्तावित है। ऐसे में सड़कें चौड़ी करने के साथ चौराहों को भी व्यवस्थित करने की जरूरत सामने आ रही है, ताकि जाम और हादसों की समस्या कम हो सके।
सड़क चौड़ी होने के बाद भी चौराहे बने तो परेशानी
शहर में सड़क चौड़ी होने के बाद वाहन जब चौराहे पर पहुंचते हैं तो पुरानी समस्याएं फिर सामने आ सकती हैं। कहीं लेफ्ट टर्न के लिए पर्याप्त जगह नहीं है, कहीं बेतरतीब पार्किंग परेशानी बढ़ाती है तो कहीं पैदल यात्रियों के लिए सड़क पार करने की सुरक्षित व्यवस्था नहीं है। सिंहस्थ के दौरान श्रद्धालुओं और वाहनों की संख्या बढ़ने पर यह समस्या और गंभीर हो सकती है।
चौराहों की डिजाइन भी सड़क के साथ तैयार हो
जिस मार्ग का चौड़ीकरण किया जा रहा है, उसके प्रमुख चौराहों का भी उसी समय सर्वे और डिजाइन तैयार करने की जरूरत है। चौबीस खंभा माता मंदिर से छोटा रुद्रसागर तक मार्ग चौड़ीकरण के साथ सुंदरीकरण प्रस्तावित है। देवास रोड से नानाखेड़ा तक एमआर-2 के उन्नयन सहित शहर की कनेक्टिविटी बढ़ाने वाले दूसरे काम भी प्रस्तावित हैं।
सुंदरीकरण ऐसा हो जिससे रास्ता न रुके
चौराहों के सुंदरीकरण में केवल रंग-रोगन, पौधों और आकर्षक स्ट्रक्चर पर ध्यान देने के बजाय यातायात को प्राथमिकता देना जरूरी है। हरियाली, पर्याप्त रोशनी, लैंडस्केपिंग, उज्जैन की पहचान से जुड़े कलात्मक स्वरूप और बेहतर साइन बोर्ड लगाए जा सकते हैं। लेकिन निर्माण ऐसा नहीं होना चाहिए जिससे वाहन चालकों की दृश्यता कम हो या पैदल यात्रियों का रास्ता बाधित हो।
जाम और हादसे रोकने पर हो सबसे ज्यादा ध्यान
हर चौराहे पर यातायात का दबाव अलग होता है। इसलिए सभी चौराहों के लिए एक जैसा डिजाइन प्रभावी नहीं होगा। जहां ज्यादा वाहन हैं, वहां सिग्नल व्यवस्था, लेन मार्किंग, यू-टर्न, लेफ्ट टर्न और ट्रैफिक आइलैंड की जरूरत के अनुसार व्यवस्था करनी होगी। स्कूल, बाजार और मंदिर क्षेत्र वाले चौराहों पर जेब्रा क्रॉसिंग, फुटपाथ और सुरक्षित क्रॉसिंग की व्यवस्था जरूरी होगी।
पार्किंग की समस्या का भी निकले समाधान
कई चौराहों पर सड़क किनारे वाहन खड़े होने से चौड़ी सड़क भी संकरी दिखाई देती है। इसलिए चौराहों के विकास के साथ आसपास की पार्किंग व्यवस्था को भी योजना में शामिल करना होगा। ऑटो और ई-रिक्शा के लिए अलग स्थान तय किए जाने चाहिए, ताकि चौराहों पर सवारी बैठाने और उतारने के कारण यातायात बाधित न हो। शहर में तीन स्थानों पर मल्टी लेवल पार्किंग की योजना बनी थी, लेकिन अब तक काम शुरू नहीं हुआ है।
उज्जैन की पहचान से जुड़ा हो चौराहों का डिजाइन
महाकाल क्षेत्र के चौराहों पर उज्जैन की धार्मिक पहचान, पुराने शहर में विरासत और प्रमुख प्रवेश मार्गों पर शहर की सांस्कृतिक पहचान को डिजाइन में शामिल किया जा सकता है। इससे बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं को चौराहों पर उज्जैन की पहचान भी दिखाई देगी और रास्ते की जानकारी भी आसानी से मिल सकेगी।
सिंहस्थ से पहले पूरी योजना बनाने की जरूरत
सिंहस्थ-2028 को देखते हुए चौराहों की योजना अभी तैयार होने से सड़क बनने के बाद दोबारा तोड़फोड़ की जरूरत नहीं पड़ेगी। सड़क, चौराहा, ट्रैफिक, पैदल रास्ता, पार्किंग, रोशनी और हरियाली को एक ही योजना में शामिल करना जरूरी है। सड़कें चौड़ी होने से सफर आसान होगा, लेकिन चौराहे व्यवस्थित होने पर ही शहर का यातायात सुरक्षित और सुगम बन सकेगा।
तीन बत्ती चौराहा बन सकता है सुधार का मॉडल
तीन बत्ती चौराहे को लेफ्ट टर्न फ्री बनाने की तैयारी शहर के दूसरे चौराहों के लिए मॉडल बन सकती है। यहां आईआरसी मानकों के अनुसार नया ट्रैफिक प्लान तैयार किया जाएगा। चारों दिशाओं में आवश्यक चौड़ीकरण के साथ लेफ्ट टर्न को सुगम बनाया जाएगा। पहले यातायात का सर्वे और ड्राइंग-डिजाइन होगी। डिजाइन तैयार होने के बाद काम अधिकतम तीन माह में पूरा करने का लक्ष्य है।

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