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कवच तकनीक कोर्स से बदलेगी रेलवे की तस्वीर, इंजीनियरिंग छात्रों के लिए खुलेंगे हजारों नए रोजगार अवसर

By Dainik Jan Times

Published on: May 27, 2026

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कवच तकनीक कोर्स से बदलेगी रेलवे की तस्वीर, इंजीनियरिंग छात्रों के लिए खुलेंगे हजारों नए रोजगार अवसर

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कवच तकनीक कोर्स को लेकर देश के इंजीनियरिंग कॉलेजों में बड़ी पहल शुरू हो गई है। भारतीय रेलवे आने वाले वर्षों में अपनी स्वदेशी सुरक्षा प्रणाली “कवच” को तेजी से विस्तार देने की तैयारी कर रहा है। इसी को ध्यान में रखते हुए कई इंजीनियरिंग संस्थानों में इस तकनीक को पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया जा रहा है।

रेलवे मंत्रालय का लक्ष्य वर्ष 2047 तक करीब 8,000 रूट किलोमीटर पर कवच प्रणाली लागू करना है। इसके लिए हजारों प्रशिक्षित इंजीनियरों और तकनीकी विशेषज्ञों की जरूरत होगी।

कवच तकनीक कोर्स से बढ़ेगी नौकरी की संभावना

कवच भारत की स्वदेशी ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन तकनीक है, जिसे जुलाई 2020 में राष्ट्रीय सुरक्षा प्रणाली के रूप में अपनाया गया था। यह तकनीक ट्रेन सुरक्षा, रेडियो सिग्नलिंग, RFID सिंक्रोनाइजेशन और ऑटोमैटिक ब्रेकिंग जैसी आधुनिक प्रणालियों पर आधारित है।

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में रेलवे सेक्टर में सिग्नलिंग, टेलीकॉम, साइबर सिक्योरिटी और एम्बेडेड सिस्टम्स से जुड़े इंजीनियरों की भारी मांग बढ़ेगी।

इंजीनियरिंग कॉलेजों में शुरू हुई नई तैयारी

दिल्ली टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी, IIT-BHU और मुंबई के SFIT जैसे संस्थान अब छात्रों को रेलवे सिग्नलिंग और कवच तकनीक से जुड़ी विशेष ट्रेनिंग देने की तैयारी कर रहे हैं।

IRISET यानी इंडियन रेलवे इंस्टीट्यूट ऑफ सिग्नल इंजीनियरिंग एंड टेलीकम्युनिकेशन फैकल्टी ट्रेनिंग प्रोग्राम भी चला रहा है ताकि कॉलेजों के शिक्षक आधुनिक रेलवे तकनीकों को बेहतर तरीके से पढ़ा सकें।

छात्रों को मिलेगी प्रैक्टिकल ट्रेनिंग

रिपोर्ट के अनुसार छात्रों को केवल थ्योरी नहीं बल्कि रेलवे सिमुलेशन प्लेटफॉर्म, सिग्नलिंग सॉफ्टवेयर और रियल सिस्टम्स पर भी ट्रेनिंग दी जाएगी। इससे उन्हें इंडस्ट्री के हिसाब से तैयार किया जा सकेगा।

IIT-BHU जैसे संस्थान छोटे कोर्स, रिसर्च प्रोजेक्ट और रेलवे आधारित इंटर्नशिप भी शुरू करने की योजना बना रहे हैं।

रेलवे में बढ़ेगी तकनीकी क्रांति

भारतीय रेलवे पहले ही कवच परियोजना पर 1200 करोड़ रुपये से ज्यादा निवेश कर चुका है। अब तक 55 हजार से ज्यादा इंजीनियर, तकनीशियन और ऑपरेटर्स को इस तकनीक की ट्रेनिंग दी जा चुकी है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इंजीनियरिंग छात्रों को शुरुआत से ही आधुनिक रेलवे तकनीक की शिक्षा दी जाए, तो भारत भविष्य में रेलवे सुरक्षा और तकनीक के क्षेत्र में दुनिया के अग्रणी देशों में शामिल हो सकता है।

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