देश की स्वास्थ्य सेवाओं को डिजिटल बनाने की दिशा में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल हुई है। आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के तहत देशभर में 90 करोड़ से अधिक आयुष्मान भारत हेल्थ अकाउंट यानी ABHA अकाउंट बनाए जा चुके हैं। यह उपलब्धि भारत की डिजिटल हेल्थ व्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण पड़ाव मानी जा रही है। सरकार का मानना है कि इससे करोड़ों लोगों को अपने स्वास्थ्य रिकॉर्ड सुरक्षित और आसान तरीके से उपलब्ध हो सकेंगे।
90 करोड़ का आंकड़ा पार कर बना नया रिकॉर्ड
राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण द्वारा संचालित आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन लगातार तेजी से आगे बढ़ रहा है। हाल ही में इस मिशन ने 90 करोड़ ABHA अकाउंट बनाने का ऐतिहासिक आंकड़ा पार कर लिया है। यह उपलब्धि देश में डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने की दिशा में बड़ी सफलता मानी जा रही है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार पिछले कुछ वर्षों में ABHA अकाउंट बनाने की रफ्तार लगातार बढ़ी है और अब यह देश के करोड़ों नागरिकों तक पहुंच चुका है।
उत्तर प्रदेश सबसे आगे
ABHA अकाउंट बनाने के मामले में उत्तर प्रदेश देश में पहले स्थान पर है। राज्य में 15 करोड़ से अधिक लोगों के हेल्थ अकाउंट बनाए जा चुके हैं। इसके बाद राजस्थान और महाराष्ट्र का स्थान आता है जहां करोड़ों नागरिक इस डिजिटल स्वास्थ्य प्रणाली से जुड़ चुके हैं।
बिहार पश्चिम बंगाल मध्य प्रदेश गुजरात आंध्र प्रदेश ओडिशा और कर्नाटक जैसे राज्यों ने भी इस मिशन में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
क्या होता है ABHA अकाउंट
ABHA यानी आयुष्मान भारत हेल्थ अकाउंट एक डिजिटल हेल्थ आईडी की तरह काम करता है। इसके माध्यम से व्यक्ति अपने स्वास्थ्य रिकॉर्ड को सुरक्षित तरीके से ऑनलाइन स्टोर और एक्सेस कर सकता है।
इस डिजिटल सिस्टम की मदद से मरीजों को बार बार मेडिकल दस्तावेज साथ लेकर चलने की जरूरत नहीं पड़ती। जरूरत पड़ने पर वे अपनी सहमति से डॉक्टर या अस्पताल के साथ स्वास्थ्य संबंधी जानकारी साझा कर सकते हैं।
महिलाओं की भी बड़ी भागीदारी
इस मिशन की एक खास उपलब्धि महिलाओं की बढ़ती भागीदारी भी है। कुल ABHA धारकों में लगभग आधी संख्या महिलाओं की है। आंकड़ों के अनुसार करीब 49.75 प्रतिशत अकाउंट महिलाओं के नाम पर बनाए गए हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि इससे ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों की महिलाओं को भी स्वास्थ्य सेवाओं तक आसान पहुंच मिल रही है।
इलाज की प्रक्रिया होगी आसान
ABHA अकाउंट का सबसे बड़ा फायदा यह है कि मरीज का स्वास्थ्य रिकॉर्ड एक जगह सुरक्षित रहता है। इससे इलाज की निरंतरता बनी रहती है और डॉक्टरों को मरीज के मेडिकल इतिहास की जानकारी आसानी से मिल सकती है।
मां और बच्चे की देखभाल टीकाकरण पुरानी बीमारियों के उपचार और अन्य स्वास्थ्य सेवाओं में भी यह प्रणाली काफी मददगार साबित हो सकती है।
डिजिटल हेल्थ सिस्टम की ओर बढ़ता भारत
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में डिजिटल हेल्थ सिस्टम भारत की स्वास्थ्य व्यवस्था को पूरी तरह बदल सकता है। कागजी रिकॉर्ड पर निर्भरता कम होगी और मरीजों को बेहतर तथा तेज सेवाएं मिल सकेंगी।
90 करोड़ ABHA अकाउंट का आंकड़ा यह दिखाता है कि देश तेजी से डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं को अपना रहा है। यह पहल भविष्य में अधिक पारदर्शी सुविधाजनक और नागरिक केंद्रित स्वास्थ्य व्यवस्था बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

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