महाकाल की नगरी उज्जैन से एक बड़ी खबर सामने आई है। शहर को पूरी तरह मीट-फ्री जोन बनाने की दिशा में प्रशासनिक स्तर पर तैयारियां शुरू हो गई हैं। यदि प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है तो आने वाले समय में शहर की सीमा के भीतर संचालित मांस की दुकानों को बाहर स्थानांतरित किया जा सकता है। इस पहल को उज्जैन की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान से जोड़कर देखा जा रहा है।
महापौर के निर्देश के बाद तेज हुई चर्चा
उज्जैन के महापौर मुकेश टटवाल ने नगर निगम आयुक्त को इस संबंध में प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए हैं। बताया जा रहा है कि प्रस्ताव को महापौर परिषद के समक्ष रखा जाएगा जहां इस पर विस्तार से चर्चा हो सकती है। महापौर का मानना है कि महाकाल नगरी की धार्मिक गरिमा और सांस्कृतिक पहचान को बनाए रखने के लिए इस दिशा में गंभीर कदम उठाने की आवश्यकता है।
वाराणसी मॉडल पर हो सकता है काम
हाल ही में उत्तर प्रदेश के वाराणसी में मांस की दुकानों को शहर सीमा से बाहर स्थानांतरित करने की पहल की गई थी। अब उसी तर्ज पर उज्जैन में भी नई धार्मिक परिधि नीति तैयार करने पर विचार किया जा रहा है। इससे धार्मिक स्थलों के आसपास का वातावरण और अधिक पवित्र बनाए जाने का दावा किया जा रहा है।
400 से ज्यादा दुकानें हो सकती हैं प्रभावित
जानकारी के अनुसार उज्जैन शहर में वर्तमान समय में 400 से अधिक मटन और चिकन की दुकानें तथा होटल संचालित हैं। इनमें से कई दुकानों के लाइसेंस को लेकर भी समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। महाकाल मंदिर के आसपास के क्षेत्रों में भी मांस विक्रय का कारोबार संचालित होता है। पहले प्रशासन मंदिर के 200 मीटर दायरे से कई दुकानों को हटाने की कार्रवाई कर चुका है।
सिंहस्थ 2028 को देखते हुए बन सकती है नई नीति
उज्जैन में सिंहस्थ 2028 की तैयारियां धीरे-धीरे गति पकड़ रही हैं। महाकाल लोक बनने के बाद शहर में श्रद्धालुओं की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हुई है। ऐसे में प्रशासन और नगर नियोजन से जुड़े अधिकारी धार्मिक पर्यटन को ध्यान में रखते हुए दीर्घकालिक योजना पर काम कर रहे हैं। माना जा रहा है कि प्रमुख धार्मिक क्षेत्रों के आसपास विशेष पवित्र परिधि निर्धारित की जा सकती है जहां मांस और मछली के कारोबार पर प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव लाया जा सकता है।
धर्माचार्यों ने किया समर्थन
धर्माचार्यों और मंदिर प्रबंधन से जुड़े कई लोगों का मानना है कि महाकाल की नगरी होने के कारण उज्जैन को मीट-फ्री जोन बनाया जाना चाहिए। उनका कहना है कि इससे शहर की धार्मिक पहचान और मजबूत होगी तथा देश-दुनिया से आने वाले श्रद्धालुओं के बीच सकारात्मक संदेश जाएगा।
व्यापारियों ने रखी अपनी चिंता
दूसरी ओर मांस व्यापार से जुड़े लोगों का कहना है कि यदि उन्हें शहर के बाहर स्थानांतरित किया जाता है तो प्रशासन को उनके लिए वैकल्पिक स्थान उपलब्ध कराना होगा। व्यापारियों का मानना है कि उचित सुविधाओं और व्यवस्थित बाजार के बिना उनकी आजीविका प्रभावित हो सकती है। इसलिए किसी भी निर्णय से पहले सभी पक्षों को ध्यान में रखना जरूरी होगा।
एमआईसी बैठक पर टिकी निगाहें
अब सभी की नजरें महापौर परिषद की बैठक पर टिकी हुई हैं जहां इस प्रस्ताव पर आगे की दिशा तय हो सकती है। यदि प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है तो उज्जैन देश के उन चुनिंदा धार्मिक शहरों में शामिल हो सकता है जहां धार्मिक पहचान को ध्यान में रखते हुए विशेष खाद्य व्यापार नीति लागू की गई हो।

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