मंसूर अहमद की कहानी उन लाखों भारतीय प्रवासियों जैसी थी जो अपने परिवार की बेहतर जिंदगी के लिए विदेशों में मेहनत करते हैं। मध्य प्रदेश के उज्जैन निवासी मंसूर अहमद कई वर्षों से कुवैत में काम कर रहे थे और अपने परिवार के लिए आर्थिक सहारा बने हुए थे। लेकिन घर लौटने से कुछ घंटे पहले हुई एक दर्दनाक घटना ने पूरे परिवार की खुशियां छीन लीं।
मंसूर अहमद को था घर लौटने का इंतजार
55 वर्षीय मंसूर अहमद अपने भतीजे की शादी में शामिल होने के लिए भारत आने वाले थे। परिवार के लोग उनकी वापसी को लेकर बेहद उत्साहित थे और शादी की तैयारियां भी जोरों पर चल रही थीं।
परिजनों के अनुसार उन्होंने अपने बेटे और अन्य परिवार के सदस्यों से बात कर जल्द घर पहुंचने की खुशी जाहिर की थी। परिवार को उम्मीद थी कि वर्षों की मेहनत के बाद वह कुछ दिन अपनों के बीच बिताएंगे, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था।
घर वापसी से पहले हुआ दर्दनाक हादसा
रिपोर्ट्स के अनुसार कुवैत अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के पास हुए एक हमले में मंसूर अहमद की जान चली गई। घटना के समय वह भारत लौटने के लिए यात्रा की तैयारी कर रहे थे।
हादसे की सूचना मिलने के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। जिस घर में शादी की खुशियां मनाई जानी थीं, वहां अचानक शोक का माहौल छा गया।
तीन दशक तक विदेश में किया काम
मंसूर अहमद लगभग 30 वर्षों से कुवैत में रहकर काम कर रहे थे। वह पेशे से दर्जी थे और अपनी मेहनत की कमाई से परिवार का पालन-पोषण करते थे।
परिजनों का कहना है कि उन्होंने हमेशा परिवार की जरूरतों को प्राथमिकता दी और अपने बच्चों की शिक्षा तथा भविष्य के लिए लगातार संघर्ष किया। उनकी मेहनत और समर्पण को परिवार आज भी गर्व के साथ याद कर रहा है।
परिवार और रिश्तेदारों में शोक
मंसूर अहमद की मौत की खबर सुनते ही रिश्तेदारों और परिचितों में शोक की लहर दौड़ गई। परिवार के लोगों का कहना है कि वह बेहद मिलनसार और जिम्मेदार व्यक्ति थे।
उनके बेटे ने बताया कि पिता लंबे समय बाद घर आने वाले थे और परिवार उनकी अगवानी की तैयारियों में लगा हुआ था। लेकिन अचानक आई इस खबर ने सब कुछ बदल दिया।
अंतिम विदाई में उमड़ी भावनाएं
मंसूर अहमद के पार्थिव शरीर के भारत पहुंचने के बाद परिजनों और स्थानीय लोगों ने उन्हें नम आंखों से अंतिम विदाई दी। अंतिम संस्कार के दौरान बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।
परिवार का कहना है कि उन्होंने अपना जीवन परिवार की खुशियों के लिए समर्पित कर दिया था और उनकी कमी कभी पूरी नहीं हो सकेगी।
संघर्ष और त्याग की यादें छोड़ गए
मंसूर अहमद की जिंदगी मेहनत, संघर्ष और जिम्मेदारी की मिसाल रही। विदेश में रहकर उन्होंने अपने परिवार के सपनों को पूरा करने के लिए लगातार काम किया।
आज उनके निधन ने केवल एक परिवार को ही नहीं बल्कि पूरे इलाके को दुखी कर दिया है। उनकी यादें और परिवार के प्रति उनका समर्पण हमेशा लोगों के दिलों में जीवित रहेगा।

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