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प्रेग्नेंसी में वॉकिंग क्यों है जरूरी? करिश्मा तन्ना ने शेयर किया हेल्दी प्रेग्नेंसी का खास मंत्र

By Dainik Jan Times

Published on: May 20, 2026

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प्रेग्नेंसी में वॉकिंग क्यों है जरूरी? करिश्मा तन्ना ने शेयर किया हेल्दी प्रेग्नेंसी का खास मंत्र

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टीवी और फिल्म अभिनेत्री Karishma Tanna इन दिनों अपनी प्रेग्नेंसी को लेकर चर्चा में हैं। हाल ही में उन्होंने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा करते हुए प्रेग्नेंसी में वॉकिंग के फायदों के बारे में बताया। वीडियो में वह ट्रेडमिल पर चलते हुए नजर आईं और उन्होंने होने वाली माताओं को एक्टिव रहने की सलाह दी।

करिश्मा तन्ना ने कहा कि गर्भावस्था खूबसूरत अनुभव जरूर है, लेकिन शरीर में आने वाले बदलाव, थकान और वजन बढ़ना पूरी तरह वास्तविक होते हैं। ऐसे में हल्की-फुल्की गतिविधि शरीर और मन दोनों के लिए फायदेमंद साबित हो सकती है।

प्रेग्नेंसी में वॉकिंग से मिल सकते हैं कई फायदे

विशेषज्ञों के अनुसार गर्भावस्था के दौरान नियमित वॉकिंग ब्लड सर्कुलेशन बेहतर बनाने में मदद करती है। इससे शरीर में सूजन, अकड़न और थकान जैसी समस्याएं कम हो सकती हैं।

डॉक्टरों का कहना है कि रोजाना 20 से 30 मिनट की हल्की वॉक नींद बेहतर करने, मूड स्विंग्स कम करने और पाचन सुधारने में भी मदद कर सकती है। इसके अलावा यह शरीर को सक्रिय बनाए रखने में सहायक मानी जाती है।

डॉक्टरों ने क्या दी सलाह

Dr Sujata Rathod ने बताया कि सामान्य और स्वस्थ गर्भावस्था में मध्यम स्तर की वॉकिंग सुरक्षित मानी जाती है। उनके अनुसार ट्रेडमिल पर चलना भी अच्छा विकल्प हो सकता है, खासकर जब मौसम खराब हो या बाहर निकलना संभव न हो।

हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि गर्भावस्था के दौरान बहुत ज्यादा मेहनत वाले वर्कआउट से बचना चाहिए। इस समय शरीर को थकाने के बजाय केवल सक्रिय रखना ज्यादा जरूरी होता है।

किन महिलाओं को सावधानी बरतनी चाहिए

डॉक्टरों के मुताबिक हाई रिस्क प्रेग्नेंसी, ब्लीडिंग, हाई ब्लड प्रेशर, गंभीर एनीमिया या समय से पहले डिलीवरी का खतरा होने पर बिना डॉक्टर की सलाह के एक्सरसाइज नहीं करनी चाहिए।

यदि वॉकिंग के दौरान चक्कर आना, सांस फूलना, सीने में दर्द या भ्रूण की गतिविधि कम महसूस हो तो तुरंत गतिविधि रोककर डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है।

डिलीवरी और रिकवरी में भी मिल सकती है मदद

विशेषज्ञों का मानना है कि गर्भावस्था के दौरान हल्की शारीरिक गतिविधि शरीर की ताकत और सहनशक्ति बढ़ाने में मदद करती है। इससे डिलीवरी और बाद की रिकवरी प्रक्रिया बेहतर हो सकती है।

हालांकि डॉक्टरों ने साफ किया कि हर महिला की प्रेग्नेंसी अलग होती है, इसलिए किसी भी नई फिटनेस रूटीन को शुरू करने से पहले चिकित्सकीय सलाह जरूर लेनी चाहिए।

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