Pune Fort Murder Case में एक नया और भावुक मोड़ सामने आया है। हत्या के आरोपों का सामना कर रही सिया गोयल के माता-पिता ने कहा है कि यदि उनकी बेटी अदालत में दोषी साबित होती है, तो उसे भी वही सजा मिलनी चाहिए जिसकी मांग पीड़ित परिवार कर रहा है। उनके इस बयान के बाद मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है।
Pune Fort Murder Case में क्या है पूरा मामला?
पुलिस के अनुसार, 26 वर्षीय केतन अग्रवाल की मौत महाराष्ट्र के लोहागढ़ किले से गिरने के बाद हुई थी। शुरुआत में इस घटना को ट्रैकिंग के दौरान हुआ हादसा माना गया था। हालांकि जांच आगे बढ़ने पर पुलिस ने आरोप लगाया कि केतन को कथित रूप से उसकी मंगेतर सिया गोयल और उसके कथित प्रेमी चेतन चौधरी ने किले से धक्का दिया था।
मामले की जांच जारी है और पुलिस उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई कर रही है।
माता-पिता ने क्या कहा?
सिया गोयल की मां ने मीडिया से बातचीत में कहा कि उनकी बेटी ने कभी भी शादी को लेकर कोई असंतोष जाहिर नहीं किया था। उन्होंने यह भी कहा कि यदि अदालत उनकी बेटी को दोषी ठहराती है, तो उसे भी उसी स्थान से धक्का देकर सजा दी जानी चाहिए, जहां से केतन की मौत हुई थी।
सिया के पिता ने भी इसी तरह की प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि कानून के अनुसार दोषी को कठोर सजा मिलनी चाहिए, चाहे वह उनकी अपनी बेटी ही क्यों न हो।
‘केतन हमारे बेटे जैसा था’
सिया के पिता ने कहा कि केतन उनके लिए केवल होने वाला दामाद नहीं, बल्कि बेटे जैसा था। उन्होंने बताया कि परिवार को उसकी मौत से गहरा सदमा पहुंचा है और दोनों परिवार इस घटना से पूरी तरह टूट गए हैं।
उन्होंने कहा कि यह घटना उनके लिए विश्वास करना भी बेहद कठिन है और न्याय मिलना सबसे जरूरी है।
कथित प्रेम संबंध की जानकारी से किया इनकार
सिया के माता-पिता का कहना है कि उन्हें चेतन चौधरी के बारे में कोई जानकारी नहीं थी। उनके अनुसार, सगाई के बाद उनकी बेटी की बातचीत केवल केतन से होती थी और परिवार को किसी अन्य संबंध की जानकारी कभी नहीं मिली।
उन्होंने यह भी दावा किया कि चेतन कभी उनके घर नहीं आया और न ही उन्होंने उससे कभी मुलाकात की थी।
जांच जारी, अदालत के फैसले का इंतजार
फिलहाल इस मामले की जांच जारी है और पुलिस सभी पहलुओं की पड़ताल कर रही है। मामले में अंतिम निर्णय अदालत द्वारा उपलब्ध साक्ष्यों और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर लिया जाएगा। जब तक न्यायिक प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती, तब तक सभी आरोप न्यायिक परीक्षण के अधीन हैं।

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