भारत के हाई-स्पीड रेल नेटवर्क विस्तार को बड़ा बढ़ावा मिला है। केंद्र सरकार ने सात नए बुलेट ट्रेन कॉरिडोर को मंजूरी दे दी है। इन परियोजनाओं के तहत मुंबई-पुणे, दिल्ली-लखनऊ, बेंगलुरु-चेन्नई और दिल्ली-वाराणसी जैसे प्रमुख शहर हाई-स्पीड रेल नेटवर्क से जुड़ेंगे। सरकार का मानना है कि इससे यात्रा समय में भारी कमी आएगी और देश के आर्थिक गलियारों को नई गति मिलेगी।
बुलेट ट्रेन कॉरिडोर से जुड़ेंगे सात प्रमुख रूट
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मंजूरी के बाद सात नए हाई-स्पीड रेल मार्गों पर काम आगे बढ़ाया जाएगा। इनमें मुंबई-पुणे, बेंगलुरु-चेन्नई, बेंगलुरु-हैदराबाद, पुणे-हैदराबाद, दिल्ली-लखनऊ, दिल्ली-वाराणसी और दिल्ली-सिलीगुड़ी रूट शामिल हैं।
ये कॉरिडोर देश के पश्चिमी, दक्षिणी और उत्तरी हिस्सों को आपस में जोड़ेंगे। इसके साथ ही भारत का हाई-स्पीड रेल नेटवर्क एक पायलट प्रोजेक्ट से आगे बढ़कर राष्ट्रीय स्तर की योजना का रूप ले रहा है।
यात्रा समय में होगी बड़ी कमी
सरकार की ओर से जारी अनुमान के अनुसार, मुंबई से पुणे की यात्रा महज 48 मिनट में पूरी हो सकेगी। वहीं, दिल्ली से लखनऊ तक का सफर लगभग दो घंटे में तय किया जा सकेगा।
बेंगलुरु से चेन्नई के बीच यात्रा समय 73 मिनट रहने का अनुमान है। दिल्ली से वाराणसी का सफर करीब 3 घंटे 15 मिनट और दिल्ली से सिलीगुड़ी तक की दूरी लगभग 6 घंटे में पूरी हो सकेगी।
मौजूदा समय में दिल्ली से सिलीगुड़ी तक रेल यात्रा में करीब 20 घंटे लगते हैं। ऐसे में हाई-स्पीड नेटवर्क यात्रियों के लिए बड़ा बदलाव साबित हो सकता है।
आर्थिक विकास को मिलेगा नया आधार
सरकार के अनुसार, इन परियोजनाओं का उद्देश्य केवल तेज यात्रा उपलब्ध कराना नहीं है। मुंबई, पुणे, अहमदाबाद, सूरत और हैदराबाद जैसे शहरों को आपस में जोड़कर मजबूत आर्थिक गलियारे विकसित किए जाएंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि जापान और चीन की तरह हाई-स्पीड रेल नेटवर्क भारत में भी क्षेत्रीय विकास, निवेश और रोजगार के नए अवसर पैदा कर सकता है।
आगे क्या होगी प्रक्रिया?
हालांकि, इन परियोजनाओं को सैद्धांतिक मंजूरी मिल चुकी है, लेकिन अब विस्तृत व्यवहार्यता अध्ययन, रूट निर्धारण, भूमि अधिग्रहण और निर्माण समयसीमा तय की जाएगी।
मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना भारत की पहली हाई-स्पीड रेल पहल है, जो निर्माणाधीन है। आने वाले समय में यही परियोजना अन्य बुलेट ट्रेन कॉरिडोर के लिए मॉडल का काम करेगी।

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