अमेरिका ईरान संघर्ष एक बार फिर वैश्विक राजनीति का बड़ा मुद्दा बन गया है। अमेरिकी सेना ने दक्षिणी ईरान में कई सैन्य ठिकानों पर “आत्मरक्षा” के तहत कार्रवाई करने की पुष्टि की है। इन हमलों में मिसाइल लॉन्च साइट्स और समुद्री माइंस बिछाने वाली नौकाओं को निशाना बनाया गया।
हालांकि इस सैन्य कार्रवाई के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि ईरान के साथ बातचीत “सकारात्मक दिशा” में आगे बढ़ रही है।
अमेरिका ईरान संघर्ष में बढ़ा तनाव
अमेरिकी सेंट्रल कमांड के प्रवक्ता कैप्टन टिम हॉकिन्स के अनुसार यह कार्रवाई अमेरिकी सैनिकों की सुरक्षा के लिए की गई। उन्होंने कहा कि ईरानी बलों से उत्पन्न खतरों को देखते हुए यह कदम उठाना जरूरी था।
हालांकि अमेरिकी सेना ने यह भी कहा कि जारी युद्धविराम के दौरान संयम बरता जा रहा है। फिलहाल हमलों से जुड़े विस्तृत सैन्य विवरण सार्वजनिक नहीं किए गए हैं।
अब्राहम समझौते को लेकर ट्रंप का नया प्रस्ताव
डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ किसी भी समझौते में कई देशों को अब्राहम समझौते में शामिल होना चाहिए। उन्होंने सऊदी अरब, पाकिस्तान, तुर्की, मिस्र और जॉर्डन जैसे देशों का नाम लिया।
ट्रंप का मानना है कि पश्चिम एशिया में स्थिरता और इजरायल के साथ बेहतर संबंधों के लिए यह जरूरी कदम होगा। हालांकि पाकिस्तान और सऊदी अरब ने फिलहाल इस मुद्दे पर सतर्क रुख अपनाया है।
पाकिस्तान और क्षेत्रीय राजनीति पर असर
इस प्रस्ताव को लेकर पाकिस्तान में भी चर्चाएं तेज हो गई हैं। इस्लामाबाद के विशेषज्ञों का कहना है कि पाकिस्तान की इजरायल को लेकर आधिकारिक नीति में फिलहाल कोई बदलाव नहीं हुआ है।
पूर्व राजनयिक मसूद खान ने कहा कि यह प्रस्ताव क्षेत्रीय कूटनीति को नया मोड़ दे सकता है, लेकिन इसे लागू करना आसान नहीं होगा।
वैश्विक स्तर पर बढ़ी चिंता
विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव वैश्विक सुरक्षा और ऊर्जा बाजारों को प्रभावित कर सकता है।
मध्य पूर्व में पहले से जारी अस्थिरता के बीच किसी भी बड़े सैन्य टकराव का असर पूरी दुनिया पर पड़ सकता है। वहीं अमेरिका लगातार कूटनीतिक समाधान पर भी जोर देता दिखाई दे रहा है।
क्या आगे बढ़ेगी शांति वार्ता?
डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिए हैं कि यदि समझौता सफल रहा तो भविष्य में ईरान भी अब्राहम समझौते का हिस्सा बन सकता है। हालांकि फिलहाल दोनों देशों के बीच अविश्वास और सैन्य तनाव कम होता नहीं दिख रहा।
दुनिया की नजर अब इस बात पर टिकी है कि क्या बातचीत के जरिए हालात सामान्य हो पाएंगे या तनाव और गहराएगा।

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