भोपाल में चर्चित ट्विशा शर्मा केस ने नया मोड़ ले लिया है। बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने अधिवक्ता समर्थ सिंह का वकालत लाइसेंस तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई उनकी पत्नी ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत और दहेज प्रताड़ना के आरोपों के बाद की गई है।
बार काउंसिल ने कहा कि मामले में दर्ज एफआईआर में दहेज मृत्यु, क्रूरता और अन्य गंभीर आरोप शामिल हैं, जो कानूनी पेशे की गरिमा और सार्वजनिक छवि को प्रभावित करते हैं।
ट्विशा शर्मा केस में BCI का बड़ा फैसला
Bar Council of India ने अपने आदेश में कहा कि समर्थ सिंह फिलहाल जांच में सहयोग नहीं कर रहे हैं और उनके फरार होने की भी जानकारी सामने आई है।
समर्थ सिंह नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी से पढ़ाई कर चुके हैं और वर्ष 2018 में वकालत के लिए नामांकित हुए थे।
मामले में उन्होंने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत याचिका वापस ले ली है। बताया जा रहा है कि वह ट्रायल कोर्ट में आत्मसमर्पण कर सकते हैं।
हाईकोर्ट ने दूसरी पोस्टमार्टम की दी अनुमति
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने ट्विशा शर्मा के परिवार की मांग पर दूसरी पोस्टमार्टम की अनुमति दे दी है। परिवार का आरोप है कि ट्विशा को लगातार घरेलू हिंसा और मानसिक प्रताड़ना का सामना करना पड़ रहा था।
परिजनों ने यह भी दावा किया कि मौत के पीछे कई संदिग्ध परिस्थितियां हैं, जिनकी निष्पक्ष जांच जरूरी है।
क्या है पूरा मामला
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार 33 वर्षीय ट्विशा शर्मा नोएडा की रहने वाली थीं और पूर्व मिस पुणे विजेता भी रह चुकी थीं। उनकी शादी कुछ महीने पहले ही समर्थ सिंह से हुई थी। दोनों की मुलाकात एक डेटिंग ऐप के जरिए हुई थी।
12 मई को ट्विशा का शव भोपाल के कटारा हिल्स स्थित ससुराल में मिला था। इसके बाद परिवार ने ससुराल पक्ष पर गंभीर आरोप लगाए।
पुलिस ने समर्थ सिंह और उनकी मां गिरिबाला सिंह के खिलाफ दहेज प्रताड़ना और आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला दर्ज किया है। गिरिबाला सिंह पूर्व जिला न्यायाधीश रह चुकी हैं।
जांच पर टिकी सबकी नजर
इस हाई-प्रोफाइल मामले ने कानूनी और सामाजिक दोनों स्तरों पर बड़ी बहस छेड़ दी है। अब दूसरी पोस्टमार्टम रिपोर्ट और पुलिस जांच पर सभी की नजर टिकी हुई है।
परिवार को उम्मीद है कि जांच के बाद ट्विशा शर्मा की मौत से जुड़े सभी सवालों के जवाब सामने आएंगे।

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