उज्जैन में करोड़ों रुपये के मोबाइल चोरी मामले की जांच लगातार आगे बढ़ रही है। पुलिस की जांच में ऐसे कई अहम तथ्य सामने आए हैं, जिनसे साफ संकेत मिलते हैं कि वारदात को बेहद सुनियोजित तरीके से अंजाम दिया गया था। जांच टीम कई राज्यों में सुराग तलाश रही है, लेकिन अब तक मुख्य आरोपियों तक पहुंचना चुनौती बना हुआ है।
जांच में सामने आई नई जानकारी
पुलिस जांच के दौरान पता चला कि वारदात में इस्तेमाल किए गए कुछ तकनीकी माध्यम ऐसे थे, जिनसे आरोपियों की पहचान करना आसान नहीं रहा। जांच के सिलसिले में एक अन्य राज्य तक पहुंची टीम ने कुछ लोगों से पूछताछ भी की, लेकिन अब तक ऐसा कोई पुख्ता सबूत नहीं मिला जिससे चोरी में उनकी सीधी भूमिका साबित हो सके।
123 महंगे मोबाइल लेकर फरार हुए बदमाश
बताया जा रहा है कि चोरों ने एक ही रात में शहर के दो मोबाइल शोरूम को निशाना बनाकर 123 महंगे मोबाइल फोन चोरी कर लिए। घटना के बाद पुलिस ने आसपास के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली, जिसमें कई संदिग्ध गतिविधियां नजर आईं। इसके आधार पर जांच का दायरा लगातार बढ़ाया जा रहा है।
सुराग छिपाने के लिए अपनाए कई तरीके
प्रारंभिक जांच के अनुसार, आरोपियों ने अपनी पहचान छिपाने के लिए कई सावधानियां बरतीं। चेहरे ढकने, हाथों में दस्ताने पहनने और वाहन की पहचान छिपाने जैसे तरीकों का इस्तेमाल किया गया। साथ ही, पुलिस का मानना है कि डिजिटल ट्रैकिंग से बचने के लिए भी विशेष रणनीति अपनाई गई थी।
मुख्य मार्गों से बचकर आगे बढ़े आरोपी
जांच एजेंसियों को आशंका है कि वारदात के बाद आरोपी सामान्य राजमार्गों की बजाय वैकल्पिक रास्तों का उपयोग करते हुए दूसरे राज्य की ओर निकल गए। इससे उनकी गतिविधियों का डिजिटल रिकॉर्ड जुटाना और अधिक कठिन हो गया। पुलिस अब विभिन्न तकनीकी साक्ष्यों और सीसीटीवी नेटवर्क के आधार पर आरोपियों की तलाश में जुटी है।
हर पहलू से जांच जारी
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच कई कोणों से की जा रही है। तकनीकी साक्ष्य, सीसीटीवी फुटेज और अन्य उपलब्ध जानकारियों का विश्लेषण किया जा रहा है। अधिकारियों को उम्मीद है कि जल्द ही इस हाई-प्रोफाइल चोरी मामले में अहम सफलता मिल सकती है।

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