उज्जैन में खड़े हनुमान मंदिर को लेकर चल रहे विवाद के बीच जिला प्रशासन ने श्रद्धालुओं को बड़ी राहत दी है। मंदिर और प्रतिमा को हटाए जाने की चर्चाओं के बीच प्रशासन ने स्पष्ट किया कि श्रद्धालुओं की आस्था और धार्मिक भावनाओं का सम्मान किया जाएगा। बिना संबंधित पक्षों की सहमति के प्रतिमा को हटाने या कोई बड़ा कदम उठाने का निर्णय नहीं लिया जाएगा। इस आश्वासन के बाद मंदिर परिसर में जारी विरोध के बीच फिलहाल स्थिति शांत होती नजर आ रही है।
खड़े हनुमान मंदिर को लेकर क्या है विवाद?
उज्जैन में सिंहस्थ 2028 की तैयारियों और विकास कार्यों को लेकर अलग-अलग स्थानों पर बदलाव की योजना बनाई जा रही है। इसी क्रम में खड़े हनुमान मंदिर और वहां स्थापित प्रतिमा को लेकर भी सवाल उठे। मंदिर को लेकर श्रद्धालुओं और विभिन्न धार्मिक संगठनों ने विरोध जताते हुए कहा कि यह स्थान लंबे समय से लोगों की आस्था का केंद्र है।
बुधवार को मंदिर परिसर में सुबह से ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचने लगे। लोगों ने हनुमान चालीसा का पाठ किया और जय श्रीराम तथा बजरंगबली के जयकारे लगाए। श्रद्धालुओं की मुख्य मांग थी कि मंदिर और प्रतिमा को किसी भी स्थिति में हटाया न जाए।
गुरुकुल के छात्रों ने किया हनुमान चालीसा का पाठ
आह्वान अखाड़े के महामंडलेश्वर अतुलेशानंद महाराज भी समर्थकों और गुरुकुल के विद्यार्थियों के साथ मंदिर पहुंचे। इस दौरान विद्यार्थियों ने प्रतिमा के सामने सामूहिक रूप से हनुमान चालीसा का पाठ किया।
महामंडलेश्वर ने कहा कि खड़े हनुमान जी यहां लंबे समय से विराजमान हैं और लोगों की आस्था उनसे जुड़ी हुई है। उन्होंने प्रशासन से धार्मिक भावनाओं को ध्यान में रखते हुए मंदिर को यथास्थान रखने पर विचार करने की अपील की।
कांग्रेस विधायकों ने भी जताया विरोध
मामले को लेकर कांग्रेस विधायक महेश परमार और दिनेश जैन भी समर्थकों के साथ मंदिर पहुंचे। कार्यकर्ताओं ने भगवा ध्वज लेकर रैली निकाली और ढोल-नगाड़ों के बीच धार्मिक नारे लगाए। इसके बाद मंदिर परिसर में हनुमान चालीसा का पाठ किया गया।
विधायकों ने कहा कि विकास कार्यों के साथ लोगों की धार्मिक भावनाओं का ध्यान रखना भी जरूरी है। उन्होंने मंदिर और प्रतिमा को हटाने की किसी भी संभावित कार्रवाई का विरोध करने की बात कही।
प्रशासन ने जारी किया अहम बयान
लगातार बढ़ते विरोध के बीच जिला प्रशासन ने प्रेस नोट जारी कर अपनी स्थिति स्पष्ट की। एसडीएम एलएन गर्ग ने कहा कि प्रशासन श्रद्धालुओं और नागरिकों की आस्था का पूरा सम्मान करता है। उन्होंने साफ किया कि सभी संबंधित पक्षों की भावनाओं को ध्यान में रखे बिना कोई निर्णय नहीं लिया जाएगा।
प्रशासन ने यह भी कहा कि सिंहस्थ 2028 के विकास कार्य जरूरी हैं, लेकिन उज्जैन की धार्मिक और ऐतिहासिक विरासत का संरक्षण भी उतना ही महत्वपूर्ण है। इसलिए मामले को संवेदनशीलता के साथ आगे बढ़ाया जाएगा।
बातचीत से निकलेगा समाधान
प्रशासन के मुताबिक इस विवाद का समाधान बातचीत और सामूहिक सहमति के जरिए निकालने का प्रयास किया जाएगा। श्रद्धालुओं, संबंधित पक्षों और विशेषज्ञों से संवाद के बाद आगे की रणनीति तय की जाएगी।
फिलहाल प्रशासन के बयान के बाद श्रद्धालुओं को राहत मिली है। अब सबसे बड़ी चुनौती सिंहस्थ 2028 की विकास योजनाओं और धार्मिक विरासत के संरक्षण के बीच संतुलन बनाने की है। आने वाले दिनों में बातचीत के जरिए इस मामले पर क्या सहमति बनती है, इस पर सभी की नजर रहेगी।

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