Ujjain Jhalawar Four Lane Project एक बार फिर सुर्खियों में है। मध्य प्रदेश और राजस्थान को बेहतर सड़क संपर्क देने वाली इस महत्वाकांक्षी परियोजना का निर्माण कार्य अभी तक शुरू नहीं हो सका है। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) की टेंडर प्रक्रिया में लगातार बदलाव के कारण परियोजना की शुरुआत में देरी हो रही है। इससे स्थानीय लोगों, व्यापारियों और श्रद्धालुओं के बीच चिंता बढ़ गई है, खासकर जब इस परियोजना को सिंहस्थ-2028 की तैयारियों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
Ujjain Jhalawar Four Lane Project: क्यों बढ़ रही है टेंडर की तारीख?
इस फोरलेन परियोजना को पिछले वर्ष केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय से मंजूरी मिली थी। परियोजना की अनुमानित लागत करीब ₹2,721 करोड़ है। शुरुआत में उम्मीद थी कि टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद निर्माण कार्य जल्द शुरू हो जाएगा।
हालांकि, टेंडर जमा करने की अंतिम तिथि कई बार आगे बढ़ाई जा चुकी है। पहले यह 14 जुलाई तय की गई थी, फिर 21 जुलाई, उसके बाद 28 जुलाई और अब इसे बढ़ाकर 12 अगस्त कर दिया गया है। लगातार बदलती समय-सीमा ने परियोजना की प्रगति को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
लोगों में बढ़ रही है चिंता
परियोजना की घोषणा के बाद क्षेत्र के लोगों को उम्मीद थी कि जल्द ही सड़क निर्माण शुरू होगा। लेकिन कई महीनों बाद भी निर्माण एजेंसी का चयन नहीं हो पाया है।
लगातार बदलती टेंडर तिथियों के कारण लोगों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है। स्थानीय नागरिकों का मानना है कि अब केवल घोषणाओं के बजाय जमीन पर काम शुरू होते देखना जरूरी है।
सिंहस्थ-2028 के लिए क्यों अहम है यह परियोजना?
यह फोरलेन सड़क केवल परिवहन परियोजना नहीं, बल्कि सिंहस्थ-2028 की तैयारियों का महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जा रही है। इसके बनने से उज्जैन स्थित महाकाल लोक और नलखेड़ा के प्रसिद्ध बगलामुखी शक्तिपीठ के बीच यात्रा अधिक तेज और सुरक्षित हो सकेगी।
सिंहस्थ के दौरान देश-विदेश से आने वाले लाखों श्रद्धालुओं को इस सड़क का सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है।
व्यापार और पर्यटन को भी मिलेगा फायदा
फोरलेन बनने के बाद मध्य प्रदेश और राजस्थान के बीच सड़क संपर्क मजबूत होगा। इससे धार्मिक पर्यटन, कृषि परिवहन, व्यापार और औद्योगिक गतिविधियों को भी नई गति मिलने की संभावना है।
विशेषज्ञों का मानना है कि बेहतर सड़क नेटवर्क से यात्रा समय कम होगा और माल परिवहन भी अधिक आसान बन सकेगा।
दुर्घटनाओं में कमी आने की उम्मीद
वर्तमान में उज्जैन-झालावाड़ मार्ग के कई हिस्से दो-लेन हैं। कुछ स्थानों पर तीखे मोड़ और दुर्घटना संभावित क्षेत्र भी मौजूद हैं।
फोरलेन बनने के बाद सड़क सुरक्षा बेहतर होने, यातायात सुगम होने और दुर्घटनाओं में कमी आने की उम्मीद जताई जा रही है।
दो चरणों में होगा निर्माण
राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने इस परियोजना को दो पैकेज में विभाजित किया है। पहले चरण में उज्जैन से आकली-कड़िया तक लगभग 86.5 किलोमीटर सड़क का फोरलेन निर्माण किया जाएगा।
दूसरे चरण में आकली-कड़िया से सुसनेर होते हुए राजस्थान के झालावाड़ तक करीब 72.76 किलोमीटर सड़क का चौड़ीकरण और फोरलेन निर्माण प्रस्तावित है। पूरे कॉरिडोर में फ्लाईओवर, बड़े पुल और बॉक्स अंडरपास भी बनाए जाएंगे, जिससे यातायात अधिक सुरक्षित और निर्बाध हो सके।
निष्कर्ष
उज्जैन-झालावाड़ फोरलेन परियोजना मालवा क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण आधारभूत ढांचा परियोजना मानी जा रही है। हालांकि टेंडर प्रक्रिया में लगातार हो रही देरी से निर्माण कार्य की शुरुआत अभी भी अधर में दिखाई दे रही है। अब क्षेत्र के लोगों की नजर इस बात पर है कि टेंडर प्रक्रिया कब पूरी होगी और परियोजना का निर्माण कार्य वास्तव में कब शुरू होगा।

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