मध्यप्रदेश के उज्जैन से एक बड़ा सियासी मामला सामने आया है जहां सरकारी आवास को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा जारी नोटिस के बाद अब यह मुद्दा राजनीतिक रूप लेता नजर आ रहा है।
उज्जैन में 6 लोगों को बंगला खाली करने का नोटिस
उज्जैन स्थित सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय प्रशासन ने भाजपा विधायक Chintamani Malviya समेत छह लोगों को एक महीने के भीतर सरकारी आवास खाली करने का नोटिस जारी किया है। यह कार्रवाई विश्वविद्यालय परिसर में बाहरी लोगों के कब्जे को हटाने के फैसले के तहत की गई है।
कुल 184 आवासों में 6 पर बाहरी कब्जा
प्रशासन के अनुसार विश्वविद्यालय के कुल 184 आवासों में से 6 आवास ऐसे हैं जिन पर बाहरी व्यक्तियों का कब्जा है। इनमें विधायक के अलावा पूर्व पुलिस अधिकारी और अन्य कर्मचारी भी शामिल हैं। सभी को निर्धारित समय सीमा में आवास खाली करने के निर्देश दिए गए हैं।
विधायक ने उठाए सवाल
नोटिस मिलने के बाद विधायक चिंतामणि मालवीय ने इस पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि उनका विश्वविद्यालय के साथ पुराना बकाया हिसाब है और जब तक वह पूरा नहीं होता तब तक वे आवास खाली नहीं करेंगे। साथ ही उन्होंने इस मामले को लेकर सरकार और प्रशासन पर भी टिप्पणी की है।
आवास की भारी कमी बनी वजह
विश्वविद्यालय में आवास की कमी एक बड़ी समस्या बनी हुई है। करीब 50 से ज्यादा कर्मचारी आवास के इंतजार में हैं जबकि कई मकान जर्जर स्थिति में हैं। ऐसे में प्रशासन ने नए आवास निर्माण की योजना भी तैयार की है।
कुलगुरु ने कहा नियम सभी पर लागू
विश्वविद्यालय के कुलगुरु ने स्पष्ट किया है कि नियम सभी के लिए समान हैं और जो लोग नियमों के विरुद्ध आवास में रह रहे हैं उन्हें तय समय में हटाया जाएगा। प्रशासन का कहना है कि इस फैसले को सख्ती से लागू किया जाएगा।
आने वाले दिनों में बढ़ सकता है विवाद
इस पूरे घटनाक्रम के बाद अब यह देखना होगा कि संबंधित लोग नोटिस का पालन करते हैं या मामला आगे कानूनी और राजनीतिक विवाद में बदलता है। फिलहाल उज्जैन का यह बंगला विवाद चर्चा का विषय बना हुआ है।

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