CM Mohan Yadav:मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने उज्जैन में रेप्टाइल पार्क एवं अनुसंधान केंद्र के निरीक्षण के दौरान अपनी जिंदगी से जुड़ा एक ऐसा अनुभव साझा किया, जिसने वहां मौजूद सभी लोगों को हैरान कर दिया। उन्होंने बताया कि कॉलेज के दिनों में एक जहरीला कोबरा उनके हाथ पर लिपट गया था और उन्हें डसने की कोशिश भी की थी। मुख्यमंत्री ने बताया कि उस समय उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और सूझबूझ से स्थिति को संभाल लिया।
कॉलेज के दिनों की घटना सुनकर हर कोई रह गया हैरान
मुख्यमंत्री ने बताया कि साइंस कॉलेज में पढ़ाई के दौरान अचानक एक सांप उनके हाथ पर लिपट गया। दूसरे हाथ पर वह डसने की कोशिश कर रहा था। उस समय उन्होंने घबराने के बजाय सांप को मजबूती से पकड़ा और उसे बोरे में बंद कर दिया। बाद में जानकारी मिली कि वह जहरीला कोबरा था।
उज्जैन में बन रहा आधुनिक रेप्टाइल पार्क
मुख्यमंत्री उज्जैन के बसंत विहार क्षेत्र में बन रहे रेप्टाइल पार्क एवं अनुसंधान केंद्र का निरीक्षण करने पहुंचे थे। इस परियोजना को स्मार्ट सिटी योजना के तहत विकसित किया जा रहा है। यहां विभिन्न प्रजातियों के सांपों और अन्य सरीसृपों के संरक्षण, उपचार, अनुसंधान और जनजागरूकता के लिए आधुनिक सुविधाएं विकसित की जा रही हैं।
होमगार्ड जवानों को मिलेगा विशेष प्रशिक्षण
निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि होमगार्ड के जवानों को सांपों के सुरक्षित रेस्क्यू और उन्हें पकड़ने का विशेष प्रशिक्षण दिया जाए। उनका कहना था कि प्रदेश में रिहायशी इलाकों में अक्सर सांप निकलने की घटनाएं सामने आती हैं। ऐसे में प्रशिक्षित जवान लोगों की सुरक्षा के साथ-साथ वन्यजीवों का भी सुरक्षित बचाव कर सकेंगे।
अनुसंधान और जागरूकता का बनेगा बड़ा केंद्र
रेप्टाइल पार्क में विजिटर जोन, रिसर्च सेंटर, एजुकेशन सेंटर, इंटरप्रिटेशन सेंटर, आधुनिक रेस्क्यू सेंटर, चिकित्सालय और पोस्टमार्टम कक्ष जैसी सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। यहां लोगों को सांपों और अन्य सरीसृपों के महत्व, उनके संरक्षण और जैव विविधता में उनकी भूमिका के बारे में भी जानकारी दी जाएगी।
वन्यजीव संरक्षण को मिलेगा बढ़ावा
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह परियोजना केवल सांपों के प्रदर्शन तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि वन्यजीव संरक्षण, वैज्ञानिक अनुसंधान और लोगों में जागरूकता बढ़ाने का भी महत्वपूर्ण माध्यम बनेगी। इससे घायल या संकटग्रस्त सर्पों के उपचार और पुनर्वास में भी मदद मिलेगी तथा पर्यावरण संरक्षण को नई दिशा मिलेगी।

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