भारत की अध्यक्षता में आयोजित BRICS संस्कृति मंत्रियों की बैठक का आयोजन इस सप्ताह भोपाल में किया जा रहा है। चार दिवसीय इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में ब्रिक्स सदस्य और साझेदार देशों के प्रतिनिधि भाग लेंगे। बैठक का उद्देश्य सांस्कृतिक सहयोग को नई दिशा देना, विरासत संरक्षण, संग्रहालयों, रचनात्मक उद्योगों और लोगों के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान को मजबूत बनाना है। सम्मेलन का समापन 8 अगस्त को मंत्रीस्तरीय घोषणा-पत्र को अपनाने के साथ होगा।
BRICS संस्कृति मंत्रियों की बैठक में होंगे महत्वपूर्ण विचार-विमर्श
केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय और मध्य प्रदेश सरकार के संयुक्त सहयोग से आयोजित इस सम्मेलन में प्रतिनिधिमंडल बुधवार से भोपाल पहुंचना शुरू करेंगे। पहले दिन पंजीयन, मान्यता प्रक्रिया, द्विपक्षीय बैठकें और प्रदर्शनी भ्रमण का कार्यक्रम रखा गया है। इसके अलावा विदेशी प्रतिनिधि इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय का दौरा करेंगे, जहां उन्हें पारंपरिक शिल्प, जनजातीय संस्कृति और भारतीय लोक कला की झलक देखने का अवसर मिलेगा।
तीन विशेष प्रदर्शनियां बनेंगी आकर्षण का केंद्र
कुशाभाऊ ठाकरे कन्वेंशन सेंटर में ‘ज्ञान भारतम्’, ‘प्रोजेक्ट मौसम’ और ‘प्रोजेक्ट बृहत्तर भारत’ शीर्षक से तीन विशेष प्रदर्शनियों का उद्घाटन किया जाएगा। इन प्रदर्शनियों में भारत की प्राचीन पांडुलिपियों, समुद्री व्यापारिक संबंधों और ऐतिहासिक सांस्कृतिक विरासत को प्रदर्शित किया जाएगा। सम्मेलन के दौरान आम नागरिक भी इन प्रदर्शनियों का अवलोकन कर सकेंगे।
8 अगस्त को जारी होगा साझा घोषणा-पत्र
6 अगस्त को होने वाली ब्रिक्स संस्कृति कार्य समूह की बैठक में विभिन्न विषयों पर चर्चा की जाएगी। यहां तैयार की गई सिफारिशों को 8 अगस्त को होने वाली संस्कृति मंत्रियों की बैठक में प्रस्तुत किया जाएगा। इसके बाद सभी सहभागी देशों की सहमति से भविष्य की सांस्कृतिक साझेदारी को लेकर संयुक्त घोषणा-पत्र जारी किया जाएगा।
सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा
सम्मेलन के दौरान ‘ब्रिक्स पीस सॉन्ग – पीस इज़ द लैंग्वेज ऑफ द लैंड’ और ‘अमृतस्य मध्य प्रदेश’ जैसी विशेष सांस्कृतिक प्रस्तुतियां आयोजित होंगी, जिनमें 125 से अधिक कलाकार भाग लेंगे। कार्यक्रम के समापन के बाद विदेशी प्रतिनिधिमंडल विश्व धरोहर स्थल सांची का भ्रमण करेगा, जबकि इच्छुक प्रतिनिधियों के लिए भीमबेटका शैलाश्रयों का विशेष दौरा भी प्रस्तावित है। इस आयोजन से मध्य प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान और पर्यटन क्षमता को वैश्विक स्तर पर नई पहचान मिलने की उम्मीद है।

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