बालाघाट के बैगा बहुल क्षेत्र में बच्चों की लगातार मौतों के बीच 11 वर्षीय सुषमा मर्सकोले की भी इलाज के दौरान मौत हो गई। उकवा क्षेत्र के सुंदरवाही गांव की रहने वाली सुषमा को करीब छह दिन पहले जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार बच्ची मलेरिया समेत अन्य स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रही थी और बुधवार देर रात उसकी हालत बिगड़ने के बाद मौत हो गई।
छह दिन से अस्पताल में चल रहा था इलाज
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. शत्रुघ्न दाहिया ने सुषमा की मौत की पुष्टि की है। उनके मुताबिक बच्ची को मलेरिया था और इलाज के दौरान मलेरिया को नियंत्रित कर लिया गया था, लेकिन वह अन्य बीमारी के कारण अचेत अवस्था में थी। बुधवार रात करीब दो बजे उसने दम तोड़ दिया। इसके बाद परिजन एंबुलेंस से शव लेकर गांव पहुंचे।
बैगा क्षेत्रों में बच्चों की मौत का मामला लगातार गंभीर
बालाघाट के बैहर और बिरसा विकासखंड के बैगा बहुल इलाकों में पिछले कुछ महीनों से बच्चों की मौतों को लेकर चिंता बनी हुई है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक बीमारी से संबंधित 32 बच्चों की मौत दर्ज की गई थी, जबकि बैहर विधायक संजय उइके ने 43 बच्चों की मौत का दावा किया है। दोनों आंकड़ों में अंतर को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
मलेरिया के साथ कई बीमारियों का असर
स्वास्थ्य विभाग और केंद्र की जांच से यह संकेत मिला है कि सभी मौतों के पीछे एक ही बीमारी को जिम्मेदार नहीं माना जा सकता। प्रभावित क्षेत्रों में मलेरिया और खसरे के मामले सामने आए हैं, जबकि कुछ बच्चों में कुपोषण, संक्रमण, डिहाइड्रेशन और अन्य स्वास्थ्य जटिलताएं भी पाई गई हैं। केंद्र की जांच में भी मौतों के कई संभावित चिकित्सकीय कारण सामने आने की जानकारी दी गई है।
हजारों लोगों की हो चुकी है स्वास्थ्य जांच
स्थिति को देखते हुए प्रभावित गांवों में स्वास्थ्य विभाग की टीमें लगातार जांच और उपचार कर रही हैं। सितंबर में उपलब्ध स्वास्थ्य विभाग से जुड़े आंकड़ों के अनुसार करीब 42 हजार लोगों की स्क्रीनिंग की जा चुकी थी। कई स्वास्थ्य टीमें और एंबुलेंस भी प्रभावित क्षेत्रों में तैनात की गई थीं। खसरा-रूबेला टीकाकरण और मलेरिया नियंत्रण के लिए भी अभियान चलाए गए हैं।
राहुल गांधी प्रभावित गांवों में परिजनों से मिलेंगे
सुषमा की मौत ऐसे समय हुई है जब कांग्रेस नेता राहुल गांधी बालाघाट के प्रभावित क्षेत्रों के दौरे पर हैं। रिपोर्ट के मुताबिक वह जगला गांव जाकर बीमारी से जान गंवाने वाले बच्चों के परिजनों से मुलाकात करने वाले हैं। जगला गांव में भी बीमारी से चार बच्चों की मौत की जानकारी सामने आई है।
मौतों के आंकड़ों को लेकर अलग-अलग दावे
बालाघाट में बच्चों की मौत का आंकड़ा इस पूरे मामले का एक अहम मुद्दा बन गया है। सरकारी आंकड़ों और राजनीतिक दावों में अंतर होने के कारण प्रत्येक मौत के कारण और परिस्थितियों की स्पष्ट जानकारी सामने लाने की मांग भी उठ रही है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि बीमारी से जुड़ी मौतों और अन्य कारणों से हुई मौतों को अलग-अलग देखा जा रहा है।

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