भोपाल के चर्चित ऐशबाग आरओबी को लेकर अब राहत की उम्मीद बढ़ गई है। लंबे समय से तकनीकी अड़चनों में फंसे इस रेलवे ओवरब्रिज के सुधार का काम नए डिजाइन के आधार पर शुरू हो चुका है। करीब 90 डिग्री के खतरनाक मोड़ को बेहतर करने और सड़क की चौड़ाई बढ़ाने की दिशा में काम किया जा रहा है। प्रशासन का लक्ष्य दिसंबर तक प्रोजेक्ट पूरा कर लोगों के लिए आवागमन आसान करना है।
ऐशबाग आरओबी का बदलेगा खतरनाक मोड़
इस ब्रिज की सबसे बड़ी समस्या इसका तीखा मोड़ रहा है, जिसके कारण वाहन चालकों को परेशानी के साथ दुर्घटना का खतरा भी बना रहता था। अब केंद्रीय सड़क अनुसंधान संस्थान (CRRI) की संशोधित तकनीकी डिजाइन के अनुसार सुधार कार्य किया जा रहा है।
नई योजना में ब्रिज की इनर और आउटर रेडियस को करीब 2 से 2.5 मीटर तक बढ़ाने का प्रावधान है। इसके अलावा प्रवेश और निकास वाले हिस्सों में कैरिजवे को लगभग 3 से 3.5 फीट तक चौड़ा किया जा रहा है। इससे वाहनों की आवाजाही पहले की तुलना में सुगम होने की उम्मीद है।
रेलवे ट्रैक की सुरक्षा पर भी जोर
ब्रिज के सुधार कार्य में रेलवे ट्रैक और ओवरहेड बिजली लाइनों की सुरक्षा को विशेष प्राथमिकता दी जा रही है। अतिरिक्त स्लैब का भार संभालने के लिए नए पियर, लंबे पियर कैप और करीब 1200 मिलीमीटर व्यास वाली मजबूत पाइल फाउंडेशन तैयार की जा रही है।
तकनीकी बदलावों का उद्देश्य केवल मोड़ को आसान बनाना नहीं, बल्कि ब्रिज की संरचनात्मक मजबूती और सुरक्षित यातायात सुनिश्चित करना भी है।
10 महीने बाद तकनीकी अड़चन का समाधान
ऐशबाग आरओबी का काम लंबे समय तक तकनीकी कारणों से आगे नहीं बढ़ सका। रेलवे और लोक निर्माण विभाग के बीच समन्वय और डिजाइन से जुड़े मुद्दों को सुलझाने में करीब 10 महीने लगे। इस दौरान कई दौर की बैठकों और तकनीकी समीक्षा के बाद CRRI के संशोधित डिजाइन को मंजूरी दी गई।
अब निर्माण एजेंसी को ही सुधार कार्य की जिम्मेदारी दी गई है। इससे काम की निरंतरता और तकनीकी मानकों को बनाए रखने में मदद मिलने की उम्मीद है।
डेढ़ लाख आबादी को मिलेगी राहत
ब्रिज के पूरा होने के बाद ऐशबाग, पुष्पा नगर, महामाई का बाग और आसपास के क्षेत्रों के करीब डेढ़ लाख लोगों को सीधा फायदा मिलने की उम्मीद है। इसके अलावा रोजाना होने वाली बड़ी संख्या में वाहनों की आवाजाही को भी राहत मिल सकती है।
आरओबी शुरू होने से वाहन चालकों को रेलवे क्रॉसिंग पर ट्रेन के गुजरने का इंतजार कम करना पड़ेगा। इससे यात्रा का समय बचेगा और पुराने तथा नए भोपाल के बीच कनेक्टिविटी भी बेहतर होने की संभावना है।
दिसंबर तक पूरा करने का लक्ष्य
प्रशासन और निर्माण एजेंसी की नजर अब दिसंबर की समयसीमा पर है। जमीनी स्तर पर सुधार कार्य शुरू होने के बाद स्थानीय लोगों की उम्मीदें बढ़ी हैं। यदि काम निर्धारित गति से आगे बढ़ता है, तो लंबे समय से परेशानी झेल रहे वाहन चालकों और आसपास के रहवासियों को जल्द राहत मिल सकती है।

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