भारतीय सिनेमा के प्रतिष्ठित 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार की घोषणा हो गई है। इस बार साउथ फिल्मों का दबदबा देखने को मिला, जहां तमिल फिल्मों रायन और अमरन ने कई महत्वपूर्ण पुरस्कार अपने नाम किए। वहीं, जिन फिल्मों से बड़ी उम्मीदें थीं, उनमें मैयाझगन और महाराजा प्रमुख श्रेणियों में बड़ी सफलता हासिल नहीं कर सकीं।
72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में चमकी रायन और अमरन
अभिनेता और निर्देशक धनुष की फिल्म रायन को सर्वश्रेष्ठ तमिल फिल्म का पुरस्कार मिला। यह फिल्म अपने दमदार कथानक और शानदार अभिनय के लिए पहले ही काफी सराहना बटोर चुकी थी।
वहीं, अमरन ने कई प्रमुख पुरस्कार जीतकर समारोह में खास पहचान बनाई। फिल्म के निर्देशक राजकुमार पेरियासामी को सर्वश्रेष्ठ निर्देशन का सम्मान मिला, जबकि संपादन के लिए आर. कलैवन्नन को पुरस्कार दिया गया। फिल्म के संगीतकार जीवी प्रकाश कुमार को भी उनके शानदार संगीत के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
धनुष को मिला विशेष सम्मान
धनुष को उनकी फिल्म कैप्टन मिलर में बेहतरीन अभिनय के लिए स्पेशल मेंशन पुरस्कार दिया गया। इसके अलावा इस फिल्म को राष्ट्रीय, सामाजिक और पर्यावरणीय मूल्यों को बढ़ावा देने वाली सर्वश्रेष्ठ फिल्म का सम्मान भी मिला।
कैप्टन मिलर की कहानी और उसके सामाजिक संदेश को दर्शकों और समीक्षकों दोनों ने काफी पसंद किया था।
इन फिल्मों को नहीं मिली उम्मीद के मुताबिक सफलता
राष्ट्रीय पुरस्कारों की घोषणा से पहले मैयाझगन, महाराजा, थंगलान, वाझाई और कोट्टुक्काली जैसी फिल्मों से काफी उम्मीदें लगाई जा रही थीं। हालांकि, ये फिल्में प्रमुख श्रेणियों में बड़ी उपलब्धि हासिल नहीं कर सकीं।
फिर भी महाराजा के लिए एक्शन कोरियोग्राफी श्रेणी में सम्मान मिला, जबकि मैयाझगन के साउंड डिजाइन कार्य को विशेष उल्लेख प्राप्त हुआ।
सहायक कलाकारों ने भी बटोरी सुर्खियां
विजय सेतुपति अभिनीत महाराजा में दमदार अभिनय करने वाली सचाना नमिदास को सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेत्री का पुरस्कार मिला। उनके प्रदर्शन की काफी सराहना की गई थी और यह सम्मान उनके अभिनय करियर के लिए एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
इस बार के राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों ने एक बार फिर साबित कर दिया कि भारतीय सिनेमा में क्षेत्रीय फिल्मों का प्रभाव लगातार बढ़ रहा है और अलग-अलग भाषाओं की फिल्मों को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिल रही है।

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