भारत में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी का बाजार तेजी से विस्तार कर रहा है और अब उद्योग जगत की नजर सिर्फ बिक्री बढ़ाने पर नहीं, बल्कि भरोसेमंद तकनीक, बेहतर चार्जिंग नेटवर्क और किफायती समाधान तैयार करने पर है। World EV Day के मौके पर ऑटोमोबाइल और कंपोनेंट इंडस्ट्री से जुड़े विशेषज्ञों ने भारत में ईवी अपनाने के अगले चरण को लेकर अपनी प्राथमिकताएं साझा कीं।
इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के लिए अफोर्डेबिलिटी जरूरी
Spark Minda के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर आकाश मिंडा के मुताबिक भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों का अगला दौर किफायती, भरोसेमंद और आसानी से उपलब्ध तकनीक पर निर्भर करेगा। उन्होंने कहा कि इलेक्ट्रिक वाहनों में बदलाव केवल तकनीकी परिवर्तन नहीं है, बल्कि लोगों के यात्रा करने के तरीके में व्यापक बदलाव है।
उनके अनुसार रिसर्च एंड डेवलपमेंट, रणनीतिक साझेदारी और नई क्षमताओं में निवेश के जरिए भारत के साथ वैश्विक बाजारों की जरूरतों को पूरा करने वाले समाधान विकसित किए जा रहे हैं। कंपनी का Green Mobility कारोबार भी इसी दिशा में काम कर रहा है।
चार्जिंग नेटवर्क का विस्तार बड़ी चुनौती
Gulf Oil Lubricants India के एमडी और सीईओ रवि चावला ने कहा कि भारत का ईवी बाजार शुरुआती दौर से आगे निकलकर एक नए चरण में पहुंच चुका है। अब चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, स्थानीय उत्पादन और उत्पादों की विश्वसनीयता पर ज्यादा ध्यान देना होगा।
उन्होंने बताया कि 2020 में भारत में कुल वाहन बिक्री में ईवी की हिस्सेदारी करीब 0.7 प्रतिशत थी, जबकि FY2025-26 में देश में 25 लाख से ज्यादा ईवी रजिस्ट्रेशन दर्ज किए गए। स्रोत के अनुसार, देशभर में 52,000 से अधिक सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशन भी परिचालन में हैं।
आगे की मांग को देखते हुए चार्जिंग नेटवर्क में बड़े निवेश की जरूरत बताई गई है। खासतौर पर कमर्शियल इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए ऐसा इंफ्रास्ट्रक्चर जरूरी होगा, जो अलग-अलग इलाकों और परिचालन परिस्थितियों में लगातार भरोसेमंद प्रदर्शन कर सके।
लोकल मैन्युफैक्चरिंग पर जोर
रवि चावला ने बताया कि Gulf Oil से जुड़ी Tirex के पास भारत के फ्लीट DC फास्ट-चार्जिंग सेगमेंट में लगभग 30-35 प्रतिशत हिस्सेदारी है। कंपनी ने अपनी वार्षिक क्षमता को 3,000 यूनिट तक बढ़ाने के लिए अतिरिक्त 50 करोड़ रुपये के निवेश की प्रतिबद्धता जताई है।
इसके अलावा AC चार्जिंग और ईवी सॉफ्टवेयर समाधानों पर भी काम किया जा रहा है। चार्जर निर्माण में करीब 55 प्रतिशत कंपोनेंट लोकलाइजेशन हासिल करने का दावा किया गया है। इससे संकेत मिलता है कि भविष्य में भारत के ईवी इकोसिस्टम में स्थानीय सप्लाई चेन की भूमिका और महत्वपूर्ण हो सकती है।
बैटरी की गुणवत्ता और सुरक्षा पर फोकस
Trontek Electronics के फाउंडर और सीईओ सम्रथ एस कोचर ने कहा कि भारत का ईवी ट्रांजिशन अब केवल वाहनों की संख्या बढ़ाने तक सीमित नहीं है। अगली चुनौती बेहतर गुणवत्ता, सुरक्षा, बैटरी प्रदर्शन और कम कुल स्वामित्व लागत सुनिश्चित करने की है।
उनके अनुसार मजबूत बैटरी, भरोसेमंद चार्जिंग और बैटरी-स्वैपिंग नेटवर्क तथा बेहतर सुरक्षा मानक ईवी बाजार की अगली वृद्धि के लिए महत्वपूर्ण होंगे। खासतौर पर कमर्शियल ईवी में वाहन का लगातार उपलब्ध रहना और बैटरी का प्रदर्शन सीधे कारोबार और कमाई से जुड़ा होता है।
भारत में बनेगा मजबूत ईवी इकोसिस्टम
उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि भारत के इलेक्ट्रिक वाहन बाजार की अगली कहानी केवल नए मॉडल लॉन्च होने से नहीं लिखी जाएगी। बेहतर तकनीक, स्थानीय मैन्युफैक्चरिंग, चार्जिंग सुविधाएं, आफ्टर-सेल्स सपोर्ट और कम लागत वाले समाधान मिलकर ईवी अपनाने को व्यापक बना सकते हैं।
World EV Day पर सामने आए इन विचारों से साफ है कि भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों की स्वीकार्यता बढ़ रही है, लेकिन अगले चरण में बाजार को मजबूत बनाने के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर और तकनीकी भरोसे पर लगातार निवेश करना होगा।

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