देश में तेज और आरामदायक रेल यात्रा की मांग बढ़ने के बीच वंदे भारत स्लीपर ट्रेन परियोजना को बड़ी गति मिली है। इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (ICF) ने स्लीपर वेरिएंट के निर्माण के लिए भारत की प्रमुख रेल कोच निर्माता कंपनी BEML को करीब 180 करोड़ रुपये का ऑर्डर दिया है। इससे स्लीपर वंदे भारत ट्रेनों के उत्पादन को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।
वंदे भारत स्लीपर ट्रेन का उत्पादन क्यों बढ़ाया जा रहा है?
वंदे भारत ट्रेनों को यात्रियों की ओर से लगातार अच्छी प्रतिक्रिया मिल रही है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, देश के अलग-अलग मार्गों पर इन ट्रेनों की औसत ऑक्यूपेंसी करीब 98 प्रतिशत से लेकर 100 प्रतिशत से अधिक तक दर्ज की गई है। वर्तमान में राष्ट्रीय रेल नेटवर्क पर 162 वंदे भारत सेवाएं संचालित हो रही हैं।
यात्रियों की बढ़ती मांग को देखते हुए रेलवे स्लीपर संस्करण के विस्तार पर भी जोर दे रहा है। इसका उद्देश्य लंबी दूरी के यात्रियों को तेज यात्रा के साथ अधिक आरामदायक स्लीपर सुविधा उपलब्ध कराना है।
260 स्लीपर ट्रेनों का निर्माण पाइपलाइन में
वंदे भारत कार्यक्रम के विस्तार के साथ देश में रेल कोच निर्माण और कंपोनेंट सप्लाई से जुड़ी क्षमताओं को भी मजबूती मिल रही है। वर्तमान में करीब 260 वंदे भारत स्लीपर ट्रेनों के ऑर्डर अलग-अलग निर्माताओं के पास हैं।
इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद लंबी दूरी के रेल नेटवर्क पर आधुनिक स्लीपर ट्रेनों की उपलब्धता बढ़ने की उम्मीद है। इससे यात्रियों को मौजूदा प्रीमियम रेल सेवाओं के मुकाबले एक और आधुनिक विकल्प मिल सकता है।
ICF और BEML संभाल रहे अहम जिम्मेदारी
चेन्नई स्थित इंटीग्रल कोच फैक्ट्री शुरुआत से ही वंदे भारत ट्रेनों के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। ICF के पास 24-कोच कॉन्फिगरेशन वाली 50 स्लीपर वंदे भारत ट्रेनों का ऑर्डर है।
वहीं BEML को 10 स्लीपर ट्रेनसेट तैयार करने की जिम्मेदारी मिली है। इनमें से एक ट्रेनसेट जनवरी 2026 में व्यावसायिक सेवा में शामिल हुआ था और इसे देश की पहली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन के रूप में सेवा में उतारा गया।
Kinet Railway Solutions बनाएगी 120 ट्रेनें
वंदे भारत स्लीपर ट्रेन परियोजना में Kinet Railway Solutions की भी बड़ी भूमिका है। यह RVNL, Metrowagonmash और Locomotive Electronic Systems से जुड़ा कंसोर्टियम है। कंपनी को 16-कोच कॉन्फिगरेशन वाली 120 स्लीपर ट्रेनों के निर्माण का ऑर्डर मिला है।
इन ट्रेनों का निर्माण महाराष्ट्र के लातूर स्थित Marathwada Rail Coach Factory में किया जा रहा है। पहले प्रोटोटाइप को 31 मार्च 2027 तक तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है।
BHEL-Titagarh कंसोर्टियम भी तैयार करेगा ट्रेनें
BHEL और Titagarh Rail Systems के कंसोर्टियम को भी वंदे भारत स्लीपर ट्रेनों के निर्माण की बड़ी जिम्मेदारी मिली है। दोनों कंपनियां 80 ट्रेनसेट तैयार करेंगी। इस परियोजना के साथ 35 वर्षों का वार्षिक रखरखाव समझौता भी जुड़ा है।
कंसोर्टियम वित्त वर्ष 2027 की तीसरी तिमाही तक पहला ट्रेनसेट तैयार करने का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रहा है। अलग-अलग कंपनियों को मिले इन बड़े ऑर्डरों से देश में आधुनिक रेल परिवहन क्षमता के विस्तार को गति मिलने की उम्मीद है।

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