अमेरिका-ईरान संघर्ष ने एक बार फिर खतरनाक मोड़ ले लिया है। मंगलवार, 1 सितंबर 2026 को अमेरिकी सेना ने ईरान में कई ठिकानों को निशाना बनाया, जिसके जवाब में तेहरान की ओर से मिसाइल और ड्रोन हमलों की खबर सामने आई। छह महीने से अधिक समय से जारी तनाव के बीच हुई ताजा सैन्य कार्रवाई ने क्षेत्रीय सुरक्षा के साथ-साथ वैश्विक ऊर्जा बाजार की चिंताएं भी बढ़ा दी हैं।
अमेरिका-ईरान संघर्ष में फिर क्यों बढ़ा तनाव?
अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार, ईरान की ओर से वाणिज्यिक जहाजों और क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य बलों के लिए खतरा पैदा किया जा रहा था। अमेरिका ने दावा किया कि उसकी कार्रवाई इसी संभावित खतरे को रोकने के लिए की गई।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिकी हमलों को उचित बताते हुए ईरान को दोबारा जवाबी कार्रवाई करने पर और कड़े हमलों की चेतावनी दी। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिकी सेना ने ईरान के रडार ठिकानों को निशाना बनाया, जिन्हें तेहरान दोबारा सक्रिय करने की कोशिश कर रहा था।
इससे पहले रविवार को भी अमेरिकी सेना ने ईरान के रॉकेट लॉन्चरों पर हमला किया था। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, इनका इस्तेमाल स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में समुद्री बारूदी सुरंगें बिछाने के लिए किया जा सकता था।
ईरान ने दिया मिसाइल और ड्रोन से जवाब
अमेरिकी हमलों के बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई की। ईरानी अधिकारियों ने अमेरिका के खिलाफ कड़े जवाब की बात कही और देश की सशस्त्र सेनाओं ने इसे गंभीर सैन्य चुनौती बताया।
रिपोर्टों के मुताबिक, ईरान की ओर से क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाकर मिसाइलें दागी गईं। इससे पहले रविवार के हमलों के बाद भी ईरान ने जॉर्डन में अमेरिकी ठिकानों की ओर मिसाइलें भेजी थीं, जिन्हें कथित तौर पर रोक दिया गया। संयुक्त अरब अमीरात ने भी अपने जलक्षेत्र के ऊपर एक ईरानी ड्रोन को रोकने की जानकारी दी थी।
दक्षिणी ईरान में कई जगह धमाके
ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार, दक्षिणी तटीय इलाकों में कई स्थानों पर विस्फोट हुए। इनमें बंदर अब्बास और होर्मोजगान प्रांत के इलाके शामिल हैं। बंदर अब्बास में नौसेना और वायुसेना से जुड़ी सुविधाएं मौजूद हैं।
ईरान की ओर से यह भी दावा किया गया कि कुछ नागरिक ठिकाने अमेरिकी हमलों की चपेट में आए। होर्मोजगान प्रांत के एक अधिकारी के मुताबिक, कुहस्तक में एक ऐसे घर को निशाना बनाया गया जहां शादी समारोह चल रहा था। इस घटना में दो लोगों की मौत और कम से कम 20 लोगों के घायल होने की बात कही गई है।
ईरानी मीडिया ने क्यूशम द्वीप पर एक फैक्ट्री और अन्य नागरिक प्रतिष्ठानों को नुकसान पहुंचने की भी जानकारी दी। हालांकि, इन दावों पर अमेरिकी सेंट्रल कमांड की तत्काल विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर दुनिया की नजर
ताजा संघर्ष में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज सबसे महत्वपूर्ण केंद्र बन गया है। ईरान के तट के पास स्थित यह संकरा समुद्री मार्ग वैश्विक तेल व्यापार के लिए बेहद अहम है। सामान्य परिस्थितियों में दुनिया के तेल प्रवाह का करीब पांचवां हिस्सा इस रास्ते से गुजरता है।
ईरान ने युद्ध शुरू होने के बाद इस मार्ग को प्रभावी रूप से बंद कर दिया है। ऐसे में यहां सैन्य तनाव बढ़ने से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर सीधा असर पड़ सकता है।
अमेरिका और ईरान दोनों के बीच इस रणनीतिक जलमार्ग को लेकर टकराव बढ़ने से अंतरराष्ट्रीय बाजार पहले ही सतर्क हो गया है।
तेल की कीमतों में आया उछाल
अमेरिका और ईरान के बीच दोबारा सैन्य झड़पों का असर कच्चे तेल की कीमतों पर भी दिखाई दिया। इस सप्ताह की शुरुआत से ही क्रूड की कीमतों में करीब 7 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई और मंगलवार के हमलों के बाद दबाव और बढ़ा।
इस साल कच्चे तेल की कीमत में 50 फीसदी से अधिक की वृद्धि हो चुकी है। अमेरिका में नियमित गैसोलीन की औसत कीमत भी बढ़कर करीब 4.10 डॉलर प्रति गैलन पहुंच गई, जबकि पिछले वर्ष इसी समय यह लगभग 3.19 डॉलर थी।
अगर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में लंबे समय तक व्यवधान रहता है, तो ऊर्जा आपूर्ति और परिवहन लागत को लेकर वैश्विक बाजार में और अस्थिरता देखने को मिल सकती है।
युद्धविराम की पेशकश के बीच फिर शुरू हुई कार्रवाई
दिलचस्प बात यह है कि ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने मंगलवार को ताजा अमेरिकी हमलों से पहले कहा था कि अगर वॉशिंगटन जून में हुए अंतरिम समझौते की शर्तों पर वापस लौटता है, तो ईरान भी उसी दिशा में कदम उठाने के लिए तैयार है।
जून में दोनों पक्षों के बीच अस्थायी युद्धविराम हुआ था और व्यापक समझौते के लिए बातचीत का रास्ता खुला था। हालांकि, यह प्रक्रिया ज्यादा समय तक कायम नहीं रह सकी।
अब दोबारा सैन्य कार्रवाई शुरू होने से कूटनीतिक समाधान की संभावनाओं पर भी सवाल उठ रहे हैं।
अमेरिका के लिए भी बढ़ रही चुनौतियां
लगातार सैन्य कार्रवाई अमेरिका के लिए भी आसान नहीं है। रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी सेना के उन्नत मिसाइल इंटरसेप्टर भंडार पर दबाव बढ़ रहा है। दूसरी ओर, घरेलू स्तर पर भी लंबे संघर्ष को लेकर राजनीतिक चिंताएं मौजूद हैं।
ट्रंप प्रशासन ने पहले आर्थिक प्रतिबंधों और वित्तीय दबाव के जरिए ईरान को बातचीत के लिए मजबूर करने की रणनीति पर जोर दिया था। लेकिन नए हमलों से संकेत मिल रहे हैं कि दोनों देशों के बीच तनाव अभी खत्म होने की स्थिति में नहीं है।
आगे क्या होगा?
अमेरिका और ईरान के बीच जारी टकराव अब केवल दोनों देशों तक सीमित मुद्दा नहीं रह गया है। खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य ठिकानों, समुद्री व्यापार मार्गों और तेल आपूर्ति पर खतरे का असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या दोनों पक्ष फिर से बातचीत और युद्धविराम की राह पर लौटेंगे या सैन्य कार्रवाई और जवाबी हमलों का सिलसिला आगे भी जारी रहेगा। फिलहाल स्ट्रेट ऑफ होर्मुज, तेल की कीमतें और क्षेत्रीय सुरक्षा आने वाले दिनों में सबसे अहम मुद्दे बने रहेंगे।

Leave a Comment