अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ग्रीनलैंड समझौते को लेकर बड़ा दावा किया है। 18 सितंबर 2026 को उन्होंने कहा कि अमेरिका, डेनमार्क और ग्रीनलैंड के बीच ऐसी व्यवस्था पर सहमति बनी है, जिससे अमेरिका को ग्रीनलैंड की सुरक्षा में स्थायी भूमिका मिलेगी। हालांकि, उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार समझौते पर औपचारिक हस्ताक्षर और जरूरी संसदीय प्रक्रियाएं अभी बाकी हैं।
ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर कहा कि इस व्यवस्था से अमेरिका की ग्रीनलैंड से जुड़ी सुरक्षा संबंधी चिंताओं का समाधान होगा। उन्होंने यह भी दावा किया कि अमेरिका को द्वीप पर सुरक्षा और रक्षा से जुड़े कदम उठाने की स्थायी क्षमता मिलेगी।
ग्रीनलैंड समझौते पर ट्रंप ने क्या कहा?
ट्रंप के अनुसार, अमेरिका ने डेनमार्क और ग्रीनलैंड के प्रतिनिधियों के साथ मिलकर एक ऐसी व्यवस्था तैयार की है, जो अमेरिका को ग्रीनलैंड की सुरक्षा में लंबे समय तक भूमिका निभाने की अनुमति देगी।
उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका ग्रीनलैंड में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ाने की प्रक्रिया शुरू करेगा। हालांकि, समझौते की पूरी कानूनी और परिचालन शर्तें सार्वजनिक रूप से विस्तार से उपलब्ध नहीं हैं।
इसलिए ट्रंप के “permanent control” वाले बयान को ग्रीनलैंड के स्वामित्व या संप्रभुता के हस्तांतरण के रूप में समझना सही नहीं होगा। मौजूदा रिपोर्टिंग के मुताबिक, ग्रीनलैंड डेनमार्क के साम्राज्य का हिस्सा बना रहेगा।
अमेरिका को ग्रीनलैंड में क्या अधिकार मिल सकते हैं?
रिपोर्टों के अनुसार प्रस्तावित व्यवस्था अमेरिका को ग्रीनलैंड में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ाने और रणनीतिक सैन्य गतिविधियों के लिए अतिरिक्त पहुंच देने से जुड़ी है।
CBS News की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी अधिकारियों ने स्थायी पहुंच और ओवरफ्लाइट अधिकारों की बात कही है। इससे भविष्य में अमेरिका के लिए अतिरिक्त सैन्य सुविधाएं विकसित करने की संभावनाएं बढ़ सकती हैं।
रिपोर्टों में यह भी बताया गया है कि गैर-NATO देशों के लिए ग्रीनलैंड में सैन्य ठिकाने स्थापित करने पर रोक लगाने और कुछ संवेदनशील विदेशी निवेशों को सीमित करने की व्यवस्था पर चर्चा हुई है।
क्या अमेरिका को ग्रीनलैंड का मालिकाना हक मिलेगा?
नहीं, उपलब्ध जानकारी ऐसा नहीं बताती।
ट्रंप के बयान में सुरक्षा पर अमेरिका के स्थायी नियंत्रण की बात कही गई है, लेकिन इसका अर्थ ग्रीनलैंड का अमेरिका में विलय या उसके स्वामित्व का हस्तांतरण नहीं है।
डेनमार्क और ग्रीनलैंड की ओर से जारी जानकारी में ग्रीनलैंड की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता को मान्यता देने की बात कही गई है। ग्रीनलैंड के लोगों के आत्मनिर्णय के अधिकार का भी उल्लेख किया गया है।
डेनमार्क और ग्रीनलैंड का क्या कहना है?
डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिक्सन के कार्यालय के अनुसार, अमेरिका, डेनमार्क और ग्रीनलैंड अगले सप्ताह समझौते पर हस्ताक्षर करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
फ्रेडरिक्सन ने कहा कि प्रस्तावित समझौता आर्कटिक और उत्तरी अटलांटिक क्षेत्र की साझा सुरक्षा को मजबूत करने के साथ-साथ डेनमार्क के साम्राज्य की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता को मान्यता देता है।
ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री जेंस-फ्रेडरिक नील्सन ने भी समझौते को ग्रीनलैंड के हितों और अंतरराष्ट्रीय सहयोग से जोड़ते हुए सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है।
समझौते पर अभी क्या प्रक्रिया बाकी है?
यहां एक महत्वपूर्ण बात समझना जरूरी है। ट्रंप ने 18 सितंबर को समझौते की घोषणा की, लेकिन डेनमार्क और ग्रीनलैंड की ओर से जारी जानकारी के अनुसार औपचारिक हस्ताक्षर और आवश्यक संसदीय प्रक्रियाएं अभी बाकी हैं।
रिपोर्टों के मुताबिक, समझौते पर अगले सप्ताह संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठक के दौरान हस्ताक्षर किए जाने की योजना है। इसके बाद संबंधित कानूनी और संसदीय प्रक्रियाएं पूरी करनी होंगी।
इसलिए फिलहाल इसे पूरी तरह लागू हो चुका अंतिम समझौता बताने के बजाय घोषित और हस्ताक्षर की प्रक्रिया में चल रही सुरक्षा व्यवस्था के रूप में पेश करना अधिक सटीक है।
ग्रीनलैंड अमेरिका के लिए इतना महत्वपूर्ण क्यों है?
ग्रीनलैंड आर्कटिक क्षेत्र में रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण स्थान रखता है। अमेरिका पहले से ही वहां सैन्य मौजूदगी रखता है और क्षेत्र को उत्तरी अमेरिका तथा आर्कटिक सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण मानता है।
नई व्यवस्था का उद्देश्य अमेरिका की सैन्य पहुंच और सुरक्षा सहयोग को मजबूत करना बताया जा रहा है। साथ ही, रिपोर्टों में चीन और रूस जैसे अमेरिकी प्रतिद्वंद्वियों की सैन्य या रणनीतिक मौजूदगी को सीमित करने से जुड़े प्रावधानों का भी उल्लेख है।
पहले क्या था ट्रंप का रुख?
ग्रीनलैंड को लेकर ट्रंप लंबे समय से अमेरिकी रणनीतिक हितों की बात करते रहे हैं। इससे पहले उन्होंने ग्रीनलैंड को अमेरिका के नियंत्रण में लेने की इच्छा भी सार्वजनिक रूप से व्यक्त की थी।
नई व्यवस्था हालांकि ग्रीनलैंड को अमेरिका में शामिल करने के बजाय सैन्य और सुरक्षा सहयोग को बढ़ाने पर केंद्रित दिखाई देती है। AP और CBS की रिपोर्टों के अनुसार, इससे ग्रीनलैंड डेनमार्क के अधीन ही रहेगा।
आगे क्या होगा?
अब सबसे महत्वपूर्ण घटनाक्रम समझौते पर औपचारिक हस्ताक्षर और उसके बाद होने वाली आवश्यक संसदीय प्रक्रियाएं होंगी।
इसके अलावा, समझौते की विस्तृत शर्तें सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि अमेरिका को ग्रीनलैंड में सैन्य गतिविधियों, ठिकानों, हवाई क्षेत्र और रणनीतिक निवेश से जुड़े कितने व्यापक अधिकार मिलेंगे।
फिलहाल ट्रंप के बयान और डेनमार्क-ग्रीनलैंड की प्रतिक्रियाओं से इतना स्पष्ट है कि दोनों पक्ष ग्रीनलैंड की सुरक्षा को लेकर अमेरिका के साथ एक नई व्यवस्था की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं, जबकि ग्रीनलैंड की संप्रभुता और आत्मनिर्णय के अधिकार को बनाए रखने पर जोर दिया गया है।
निष्कर्ष
डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका, डेनमार्क और ग्रीनलैंड के बीच नई सुरक्षा व्यवस्था को लेकर बड़ा दावा किया है। उनके अनुसार अमेरिका को ग्रीनलैंड की सुरक्षा में स्थायी भूमिका मिलेगी।
हालांकि, इसे ग्रीनलैंड के अमेरिका के अधीन चले जाने के रूप में पेश करना सही नहीं होगा। मौजूदा रिपोर्टों के अनुसार ग्रीनलैंड की संप्रभुता डेनमार्क के साम्राज्य के पास बनी रहेगी और प्रस्तावित समझौते को अभी औपचारिक हस्ताक्षर तथा आवश्यक संसदीय प्रक्रियाओं से गुजरना है।

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