अमेरिका में H-1B वीजा फीस को लेकर ट्रंप प्रशासन ने बड़ा प्रस्ताव सामने रखा है। नए H-1B वीजा के लिए 1,03,265 डॉलर का शुल्क तय करने की योजना है। यह कदम खासतौर पर तकनीक, शिक्षा और रिसर्च जैसे क्षेत्रों में काम करने वाले विदेशी पेशेवरों और उन्हें नियुक्त करने वाली कंपनियों पर बड़ा आर्थिक असर डाल सकता है।
H-1B वीजा फीस पर ट्रंप प्रशासन का नया प्रस्ताव
अमेरिकी डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी (DHS) ने 24 अगस्त 2026 को प्रस्तावित नियम जारी किया। इसमें नए H-1B वीजा के लिए 1,03,265 डॉलर शुल्क का प्रावधान है। प्रस्ताव के आधिकारिक प्रकाशन के बाद इस पर 30 दिनों तक जनता और संबंधित पक्षों से सुझाव लिए जाएंगे।
प्रशासन की योजना इस नियम को साल के अंत तक अंतिम रूप देने की है। इससे पहले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पिछले साल एक अस्थायी आदेश के जरिए इसी तरह का भारी शुल्क लगाया था, लेकिन अदालत में इसे चुनौती मिलने के बाद इसे रोक दिया गया था।
अदालत में पहले ही चुनौती दे चुके हैं कारोबारी संगठन
इस शुल्क को लेकर कानूनी लड़ाई पहले से चल रही है। जून में एक संघीय न्यायाधीश ने शुल्क को गैरकानूनी बताते हुए प्रशासन को इसकी वसूली से रोक दिया था। इस फैसले की समीक्षा बोस्टन स्थित अपील अदालत कर रही है।
अमेरिकी चैंबर ऑफ कॉमर्स समेत कई कारोबारी संगठन, डेमोक्रेटिक नेतृत्व वाले राज्य तथा यूनियनों और नियोक्ताओं का गठबंधन भी इस शुल्क का विरोध कर रहा है। उनका तर्क है कि राष्ट्रपति की आव्रजन संबंधी शक्तियां H-1B कार्यक्रम के लिए बनाए गए कानून को बदलने या उसके ऊपर नया शुल्क लगाने की अनुमति नहीं देतीं।
H-1B कार्यक्रम में कितने वीजा मिलते हैं?
H-1B कार्यक्रम के तहत अमेरिकी कंपनियां विशेष कौशल और विशेषज्ञता वाले विदेशी कर्मचारियों को नियुक्त कर सकती हैं। हर साल 65,000 नियमित H-1B वीजा उपलब्ध होते हैं, जबकि उन्नत डिग्री रखने वाले उम्मीदवारों के लिए अतिरिक्त 20,000 वीजा निर्धारित हैं।
आमतौर पर इन वीजा की अवधि तीन से छह साल तक हो सकती है। प्रस्तावित शुल्क मौजूदा लागत की तुलना में बेहद बड़ा बदलाव होगा, क्योंकि अलग-अलग परिस्थितियों के आधार पर H-1B वीजा से जुड़ी फीस पहले लगभग 2,000 से 5,000 डॉलर के बीच रहती थी।
शुल्क को लेकर अमेरिका में छिड़ी बहस
ट्रंप और H-1B कार्यक्रम के अन्य आलोचकों का कहना है कि कुछ कंपनियां इस व्यवस्था का इस्तेमाल अमेरिकी कर्मचारियों की जगह कम लागत वाले विदेशी कर्मचारियों को नियुक्त करने के लिए करती हैं।
वहीं, कारोबारी संगठनों और कई कंपनियों का तर्क है कि कुछ क्षेत्रों में योग्य अमेरिकी कर्मचारियों की कमी है। ऐसे में H-1B कार्यक्रम कंपनियों को दुनिया भर से विशेषज्ञ और प्रतिभाशाली कर्मचारियों की भर्ती करने में मदद करता है।
अदालती दस्तावेजों के अनुसार, फरवरी के अंत तक करीब 70 नियोक्ताओं ने 85 वीजा आवेदनों पर 1 लाख डॉलर का शुल्क भुगतान किया था।
H-1B आवेदकों पर बढ़ सकती है जांच
ट्रंप प्रशासन ने H-1B आवेदकों की जांच प्रक्रिया को भी सख्त किया है। इसके अलावा ऐसी चयन व्यवस्था का प्रस्ताव रखा गया है, जिसमें अधिक कुशल और ज्यादा वेतन पाने वाले कर्मचारियों को प्राथमिकता देने की बात कही गई है।
अमेरिकी नागरिकता एवं आव्रजन सेवा के आंकड़ों के अनुसार, पिछले साल नियोक्ताओं ने करीब 3.44 लाख H-1B वीजा के लिए पंजीकरण कराया था। यह संख्या 2024 की तुलना में 25 प्रतिशत से अधिक कम थी और 2023 में दर्ज करीब 7.94 लाख आवेदनों के आधे से भी कम रही।
अगस्त में DHS ने H-1B कर्मचारियों के स्टे बढ़ाने या दूसरे देशों में मौजूद कर्मचारियों को अमेरिका ट्रांसफर करने से जुड़े कुछ आवेदनों पर 4,500 डॉलर तक की अतिरिक्त फीस का भी प्रस्ताव रखा था।
आगे क्या होगा?
नए प्रस्ताव पर 30 दिनों तक सार्वजनिक टिप्पणियां ली जाएंगी। इसके बाद प्रशासन इसमें बदलाव कर सकता है या इसे अंतिम नियम के रूप में लागू करने की दिशा में आगे बढ़ सकता है। हालांकि, पहले से चल रही कानूनी चुनौतियों के कारण इसकी अंतिम स्थिति अदालतों के फैसलों पर भी निर्भर कर सकती है।

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