रेलवे यात्री मुआवजा से जुड़े एक अहम मामले में जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने दक्षिण रेलवे को यात्री के पक्ष में फैसला सुनाते हुए ₹31,784 का भुगतान करने का निर्देश दिया है। आयोग ने माना कि ट्रेन के बदले हुए समय की समय पर सूचना न देना रेलवे की सेवा में कमी है, जिसके कारण यात्री अपनी ट्रेन नहीं पकड़ सका।
क्या था पूरा मामला?
यह मामला वर्ष 2019 का है। एक यात्री ने अपने परिवार के 10 सदस्यों के साथ यात्रा के लिए वापसी टिकट बुक कराया था। निर्धारित समय पर सभी लोग रेलवे स्टेशन पहुंचे, लेकिन वहां पता चला कि ट्रेन तय समय से लगभग तीन घंटे पहले ही रवाना हो चुकी है। इसके बाद परिवार को दूसरी ट्रेन में सामान्य श्रेणी के टिकट लेकर घर लौटना पड़ा।
आयोग ने क्या कहा?
उपभोक्ता आयोग ने अपने फैसले में कहा कि रेलवे यह साबित नहीं कर सका कि यात्रियों को बदले हुए समय की जानकारी प्रभावी तरीके से दी गई थी। केवल यह कहना पर्याप्त नहीं है कि नई समय-सारिणी जारी कर दी गई थी। यात्रियों को समय पर स्पष्ट सूचना देना रेलवे की जिम्मेदारी है।
आयोग ने यह भी कहा कि सार्वजनिक परिवहन में यात्रियों को बेहतर और समयबद्ध सेवा मिलनी चाहिए। उन्हें प्रशासनिक लापरवाही का नुकसान नहीं उठाना चाहिए।
रेलवे को देना होगा मुआवजा
आयोग ने रेलवे को ₹3,784 की राशि वापस करने, ₹25,000 मानसिक पीड़ा के मुआवजे और ₹3,000 मुकदमे के खर्च के रूप में देने का आदेश दिया। साथ ही तय समय सीमा में भुगतान नहीं करने पर अतिरिक्त ब्याज देने का भी निर्देश दिया गया है।
यात्रियों के अधिकारों पर अहम फैसला
यह फैसला उपभोक्ताओं के अधिकारों को मजबूत करने वाला माना जा रहा है। यदि किसी यात्री को रेलवे की लापरवाही के कारण नुकसान उठाना पड़ता है, तो वह उपभोक्ता आयोग में शिकायत कर न्याय प्राप्त कर सकता है।

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