पीएम मोदी मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड के दौरे के दौरान क्रिकेट को भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच गहरे संबंधों का प्रतीक बताया। ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज के साथ प्रतिष्ठित मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड (एमसीजी) पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने युवा खिलाड़ियों से मुलाकात की, उनकी जर्सियों पर हस्ताक्षर किए और ऑस्ट्रेलिया के आधिकारिक शुभंकर “रूबी द रू” के साथ तस्वीरें भी खिंचवाईं।
प्रधानमंत्री मोदी का यह दौरा केवल खेल तक सीमित नहीं रहा, बल्कि दोनों देशों के बीच बढ़ती रणनीतिक साझेदारी और मजबूत होते संबंधों का भी प्रतीक बन गया।
पीएम मोदी मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड में बोले- क्रिकेट हमारी साझा भावना
एमसीजी में अपने संबोधन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि किसी भी भारतीय के लिए इस ऐतिहासिक मैदान पर कदम रखना विशेष भावनाएं पैदा करता है। उन्होंने कहा कि भारत और ऑस्ट्रेलिया में क्रिकेट सिर्फ एक खेल नहीं, बल्कि लोगों की साझा भावनाओं और जुनून का हिस्सा है।
प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि इस बार यहां किसी रोमांचक अंतिम ओवर का दबाव नहीं, बल्कि दोस्ती, सहयोग और भविष्य के खिलाड़ियों को प्रेरित करने का उत्साह है।
स्टीव वॉ ने भी की मुलाकात
दौरे के दौरान ऑस्ट्रेलिया के पूर्व कप्तान और दिग्गज क्रिकेटर Steve Waugh ने भी प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात की। दोनों के बीच क्रिकेट और भारत-ऑस्ट्रेलिया संबंधों को लेकर चर्चा हुई।
एमसीजी में युवा खिलाड़ियों के साथ प्रधानमंत्री की बातचीत और उनके उत्साहवर्धन को लेकर सोशल मीडिया पर भी सकारात्मक प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं।
भारत-ऑस्ट्रेलिया संबंधों को मिली नई मजबूती
इस यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने ऑस्ट्रेलिया के विपक्ष के नेता एंगस टेलर से भी मुलाकात की। दोनों नेताओं ने भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच तेजी से मजबूत हो रहे संबंधों और भविष्य के अवसरों पर चर्चा की।
दोनों देशों ने रक्षा और समुद्री सुरक्षा सहयोग को और मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण समझौतों की घोषणा की है। इसके साथ ही नागरिक परमाणु सहयोग समझौते को आगे बढ़ाने और भारत को यूरेनियम निर्यात की दिशा में भी सहमति बनी है।
कई क्षेत्रों में बढ़ेगा सहयोग
भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच हुए समझौतों में रक्षा, समुद्री सुरक्षा, ऊर्जा, साइबर तकनीक, शिक्षा, खनन, अनुसंधान और सांस्कृतिक सहयोग जैसे कई महत्वपूर्ण क्षेत्र शामिल हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि इन समझौतों से दोनों देशों की व्यापक रणनीतिक साझेदारी को नई दिशा मिलेगी और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सहयोग और अधिक मजबूत होगा।

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