नेतन्याहू का UN भाषण गुरुवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा में खासा चर्चा में रहा। इजरायल के प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में ईरान, तुर्की, ब्रिटेन और फ्रांस समेत कई आलोचकों पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उनके भाषण के दौरान कई देशों के प्रतिनिधि सदन से बाहर चले गए। यह घटनाक्रम ऐसे समय हुआ है, जब इजरायल में 27 अक्टूबर को चुनाव होने हैं।
नेतन्याहू का UN भाषण क्यों रहा चर्चा में?
नेतन्याहू ने संयुक्त राष्ट्र के मंच से इजरायल की नीतियों का बचाव किया और अपने आलोचकों पर निशाना साधा। उनके भाषण की शुरुआत के दौरान बड़ी संख्या में प्रतिनिधि बाहर निकल गए। इसके बाद उन्होंने सदन में मौजूद आलोचकों को लेकर भी तीखी टिप्पणी की।
अपने संबोधन में नेतन्याहू ने न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान ममदानी पर भी हमला बोला। उन्होंने ममदानी पर यहूदी विरोधी होने का आरोप लगाया और कहा कि न्यूयॉर्क में यहूदी समुदाय की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ी है। ममदानी ने पहले नेतन्याहू के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय गिरफ्तारी वारंट लागू करने की बात कही थी, हालांकि उनके पास ऐसा आदेश लागू करने का अधिकार नहीं है।
ब्रिटेन और फ्रांस पर भी साधा निशाना
नेतन्याहू ने ब्रिटेन और फ्रांस की इजरायल को लेकर आलोचनात्मक नीति पर भी सवाल उठाए। दोनों देश वेस्ट बैंक में इजरायली बस्तियों से जुड़े मामलों को लेकर दबाव बढ़ा चुके हैं।
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के कुछ हालिया बयानों पर भी नेतन्याहू ने आपत्ति जताई। उन्होंने पश्चिमी देशों पर इजरायल के खिलाफ दोहरे मानदंड अपनाने का आरोप लगाया।
ईरान को लेकर तीखे तेवर
ईरान नेतन्याहू के भाषण के प्रमुख मुद्दों में रहा। उन्होंने ईरान की सरकार को कठोर शब्दों में संबोधित किया और कहा कि इजरायल का लक्ष्य ईरान को परमाणु हथियार विकसित करने से रोकना है।
उन्होंने ईरानी नेतृत्व में बदलाव की संभावना का भी जिक्र किया। नेतन्याहू ने दावा किया कि इजरायल और अमेरिका की सैन्य कार्रवाई ने ईरान की परमाणु क्षमता को नुकसान पहुंचाया है। ये दावे उनके भाषण में किए गए थे और इनके संबंध में अलग-अलग पक्षों के दावे मौजूद हैं।
तुर्की और एर्दोगन पर भी हमला
नेतन्याहू ने तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन पर भी निशाना साधा। उन्होंने तुर्की पर हमास का समर्थन करने का आरोप लगाया और एर्दोगन के लिए कड़े शब्दों का इस्तेमाल किया।
तुर्की लंबे समय से गाजा में इजरायल की सैन्य कार्रवाई की आलोचना करता रहा है। एर्दोगन ने संयुक्त राष्ट्र में भी गाजा की स्थिति और फिलिस्तीन के मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय कार्रवाई की मांग की थी।
ममदानी और गाजा युद्ध का मुद्दा
नेतन्याहू ने अपने भाषण में गाजा युद्ध को लेकर इजरायल पर लगाए जा रहे नरसंहार के आरोपों को खारिज किया। उन्होंने कहा कि इजरायल ने नरसंहार नहीं किया, बल्कि इसे रोकने के लिए कार्रवाई की।
वहीं, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गाजा में इजरायल की सैन्य कार्रवाई को लेकर गंभीर आरोप और आलोचनाएं जारी हैं। इजरायल इन आरोपों को खारिज करता रहा है और अपनी सैन्य कार्रवाई को हमास के खिलाफ सुरक्षा अभियान बताता है।
भाषण के दौरान प्रतिनिधियों का वॉकआउट
नेतन्याहू के मंच पर पहुंचने के दौरान कई देशों के प्रतिनिधि संयुक्त राष्ट्र महासभा कक्ष से बाहर चले गए। रिपोर्टों के मुताबिक, बड़ी संख्या में अरब और मुस्लिम देशों के प्रतिनिधियों ने वॉकआउट किया।
वहीं, इजरायली प्रधानमंत्री के समर्थकों ने उनके भाषण के दौरान तालियां बजाईं। इस घटनाक्रम ने महासभा में मौजूद राजनीतिक मतभेदों को स्पष्ट रूप से सामने ला दिया।
इजरायल में चुनाव से पहले अहम भाषण
नेतन्याहू का यह संबोधन इजरायल के आगामी चुनाव से लगभग एक महीने पहले हुआ। 27 अक्टूबर को होने वाले चुनावों के बीच उनका संयुक्त राष्ट्र मंच पर दिया गया भाषण घरेलू राजनीति के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण रहा।
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में इजरायल की सुरक्षा, ईरान, गाजा युद्ध और अंतरराष्ट्रीय आलोचना को प्रमुखता दी। उनका भाषण खत्म होने के बाद भी संयुक्त राष्ट्र में हुए वॉकआउट और उनके विभिन्न देशों के नेताओं पर किए गए हमले चर्चा का विषय बने रहे।

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