नागपुर मेट्रो विस्तार को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। शहर में मेट्रो नेटवर्क को और मजबूत बनाने के लिए 55 किलोमीटर लंबे चार नए कॉरिडोर प्रस्तावित किए गए हैं। इस परियोजना के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार करने की जिम्मेदारी आरआईटीईएस (RITES) को सौंपी गई है। माना जा रहा है कि इस विस्तार से नागपुर की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को नई गति मिलेगी।
रिपोर्ट के अनुसार, इस परियोजना के तहत शहर के औद्योगिक क्षेत्रों, नई आवासीय बस्तियों और प्रस्तावित न्यू नागपुर टाउनशिप को बेहतर मेट्रो कनेक्टिविटी से जोड़ने की योजना है।
नागपुर मेट्रो विस्तार में शामिल होंगे चार नए कॉरिडोर
प्रस्तावित परियोजना में चार नए मेट्रो मार्ग शामिल किए गए हैं। इनमें मानकापुर चौक से रचना जंक्शन तक इनर रिंग रोड कॉरिडोर सबसे लंबा होगा। इसके अलावा सीताबर्डी से कोराडी, एमआईडीसी ईएसआर से बुटीबोरी विस्तार और खापरी से न्यू नागपुर तक नए रूट विकसित किए जा सकते हैं।
इन सभी कॉरिडोर के जुड़ने के बाद नागपुर मेट्रो नेटवर्क की कुल लंबाई में बड़ी वृद्धि होने की संभावना है।
ड्राइवरलेस मेट्रो और भूमिगत रूट पर भी होगा अध्ययन
रिपोर्ट्स के मुताबिक, परियोजना के दौरान ड्राइवरलेस मेट्रो ट्रेन की संभावनाओं का भी अध्ययन किया जाएगा। इसके साथ ही यह भी जांच की जाएगी कि कुछ हिस्सों में भूमिगत मेट्रो कॉरिडोर बनाना संभव है या नहीं।
विशेष रूप से सीताबर्डी-कोराडी मार्ग को चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इस क्षेत्र में पहले से मौजूद फ्लाईओवर, घनी आबादी और सीमित भूमि उपलब्धता निर्माण कार्य को प्रभावित कर सकती है।
यातायात और लागत का होगा विस्तृत आकलन
डीपीआर तैयार करने के दौरान यात्री संख्या, ट्रैफिक सर्वे, भू-तकनीकी जांच, स्टेशन लोकेशन और वित्तीय व्यवहार्यता का विस्तृत अध्ययन किया जाएगा। इसके आधार पर प्रत्येक कॉरिडोर की अनुमानित लागत और निर्माण योजना तय की जाएगी।
अधिकारियों के अनुसार, यह रिपोर्ट भविष्य में नागपुर मेट्रो के सबसे बड़े विस्तार की आधारशिला साबित हो सकती है।
सरकार की मंजूरी के बाद आगे बढ़ेगा प्रोजेक्ट
इस महत्वाकांक्षी परियोजना का निर्माण राज्य सरकार और केंद्र सरकार से मिलने वाली मंजूरियों और वित्तीय सहायता पर निर्भर करेगा। यदि सभी आवश्यक स्वीकृतियां समय पर मिल जाती हैं, तो नागपुर को आने वाले वर्षों में और अधिक आधुनिक और बेहतर सार्वजनिक परिवहन प्रणाली मिल सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस विस्तार से शहर में ट्रैफिक दबाव कम होगा और औद्योगिक तथा आर्थिक विकास को भी नई गति मिलेगी।

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