प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मोदी जन्मदिन के मौके पर देश के अलग-अलग हिस्सों में कार्यक्रमों की शुरुआत हुई है। इसी बीच गुजरात में पिछले वर्षों के सरकारी आयोजनों और प्रचार पर हुए खर्च के आंकड़े फिर सामने आए हैं। उपलब्ध विधानसभा रिकॉर्ड के अनुसार, अक्टूबर 2025 में नौ दिन चले ‘विकास सप्ताह’ पर गुजरात सरकार ने 14.05 करोड़ रुपये खर्च किए थे। यह आयोजन मोदी के गुजरात के मुख्यमंत्री बनने के 24 वर्ष पूरे होने के अवसर से जुड़ा था।
मोदी जन्मदिन से जुड़े आयोजनों पर खर्च का आंकड़ा
गुजरात में ‘विकास सप्ताह’ का आयोजन हर वर्ष 7 से 15 अक्टूबर के बीच किया जाता है। मुख्यमंत्री कार्यालय के अनुसार, यह अवधि 7 अक्टूबर 2001 को नरेंद्र मोदी के गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने की तारीख से जुड़ी है। कार्यक्रमों में विकास कार्यों का प्रचार, योजनाओं की जानकारी, उद्घाटन और शिलान्यास जैसे आयोजन शामिल रहते हैं।
अक्टूबर 2025 में आयोजित नौ दिवसीय कार्यक्रम पर 14.05 करोड़ रुपये खर्च किए गए। यह जानकारी गुजरात विधानसभा में कांग्रेस विधायक जिग्नेश मेवाणी के सवाल के जवाब में सामने आई थी। इससे पहले 2024 में 23 वर्ष पूरे होने के अवसर पर प्रचार अभियान के दौरान 8.81 करोड़ रुपये विज्ञापनों पर खर्च होने की जानकारी आरटीआई के जरिए सामने आई थी।
गुजरात में 2025 के प्रचार खर्च का आंकड़ा
गुजरात सरकार के सूचना एवं प्रसारण विभाग ने 31 दिसंबर 2025 को समाप्त वर्ष के दौरान प्रचार गतिविधियों पर 108.80 करोड़ रुपये खर्च किए। इसमें प्रिंट, डिजिटल और सोशल मीडिया माध्यमों से किया गया प्रचार शामिल था। विधानसभा में दिए गए जवाब के अनुसार, यह राशि लगभग 29.8 लाख रुपये प्रतिदिन के औसत के बराबर बैठती है।
इस कुल राशि में ‘विकास सप्ताह’ पर खर्च किए गए 14.05 करोड़ रुपये भी शामिल थे। विधानसभा के जवाब में 108.80 करोड़ रुपये के भीतर अलग-अलग माध्यमों के हिसाब से विस्तृत खर्च का विभाजन उपलब्ध नहीं कराया गया था। विभाग गुजरात के मुख्यमंत्री के अधीन आता है।
एजेंसियों और भुगतान को लेकर क्या जानकारी सामने आई
सरकारी प्रचार के लिए कितनी एजेंसियों का चयन किया गया और कितनी प्रिंट, डिजिटल तथा सोशल मीडिया एजेंसियों को भुगतान किया गया, इस बारे में भी सवाल पूछा गया था। उपलब्ध जवाब में दोनों मामलों में संख्या शून्य बताई गई।
‘विकास सप्ताह’ से संबंधित खर्च के मामले में सरकार ने बताया कि सूचना विभाग ने किसी अन्य विभाग को भुगतान के लिए बिल संबंधी मांग नहीं भेजी थी। साथ ही किसी विभाग ने खर्च की पूरी या आंशिक राशि जमा नहीं की थी।
2022-23 में खर्च 305 करोड़ रुपये से ज्यादा
गुजरात में प्रचार खर्च का एक बड़ा आंकड़ा विधानसभा चुनाव वाले वित्त वर्ष 2022-23 से भी जुड़ा है। उपलब्ध विवरण के अनुसार, उस वित्त वर्ष में सूचना एवं प्रसारण विभाग ने 305.37 करोड़ रुपये खर्च किए थे। विभाग के लिए 317.82 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया था, जिसमें से 12.45 करोड़ रुपये खर्च नहीं हुए।
इसके मुकाबले 2021-22 में विभाग का खर्च 163.43 करोड़ रुपये था। इस तरह अगले वित्त वर्ष में खर्च में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज हुई। 2022-23 में गुजरात विधानसभा चुनाव दिसंबर में हुए थे।
राष्ट्रीय स्तर पर भी सरकारी प्रचार अभियानों का सिलसिला
सरकारी योजनाओं और महत्वपूर्ण राजनीतिक या प्रशासनिक पड़ावों को लेकर केंद्र तथा विभिन्न राज्य सरकारों की ओर से समय-समय पर प्रचार अभियान आयोजित किए जाते रहे हैं। 2025 में जीएसटी दरों में बदलाव के बाद ‘जीएसटी बचत उत्सव’ के प्रचार पर केंद्र सरकार ने 88.74 करोड़ रुपये खर्च किए थे। यह आंकड़ा वित्त मंत्रालय ने संसद में लिखित जवाब में दिया था।
जून 2026 में नरेंद्र मोदी ने लगातार निर्वाचित प्रधानमंत्री के रूप में 4,399 दिन पूरे किए और जवाहरलाल नेहरू के 4,398 दिनों के रिकॉर्ड को पार किया। इस अवसर पर भी विभिन्न राजनीतिक और सरकारी स्तरों पर कार्यक्रम तथा संदेश सामने आए।
सरकारी प्रचार खर्च पर बहस क्यों महत्वपूर्ण है
सरकारी विज्ञापन और प्रचार का उद्देश्य योजनाओं, नीतियों और सार्वजनिक सेवाओं की जानकारी लोगों तक पहुंचाना बताया जाता है। वहीं, जब ऐसे अभियानों का संबंध किसी राजनीतिक व्यक्ति या राजनीतिक उपलब्धि से जुड़ी वर्षगांठ से होता है, तो सार्वजनिक धन के इस्तेमाल और सरकारी प्रचार की सीमा को लेकर बहस सामने आ सकती है।
गुजरात के उपलब्ध आंकड़े इसी व्यापक चर्चा का हिस्सा हैं। 2025 के 108.80 करोड़ रुपये के कुल प्रचार खर्च और ‘विकास सप्ताह’ के 14.05 करोड़ रुपये के खर्च ने सरकारी प्रचार के स्वरूप और वित्तीय प्राथमिकताओं पर ध्यान आकर्षित किया है। इन आंकड़ों का अंतिम आकलन करते समय संबंधित सरकारी रिकॉर्ड, खर्च की प्रकृति और अभियान के आधिकारिक उद्देश्य को साथ में देखना जरूरी है।

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