कर्नाटक के सरकारी स्कूलों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI का इस्तेमाल धीरे-धीरे बढ़ रहा है। शिक्षक कठिन विषयों को आसान बनाने, नए उदाहरण तैयार करने और वर्कशीट व आकलन सामग्री बनाने के लिए AI टूल्स का सहारा ले रहे हैं। हालांकि, एक नए सर्वेक्षण से सामने आया है कि पर्याप्त प्रशिक्षण, डिजिटल संसाधनों की कमी और विद्यार्थियों के निजी डेटा की सुरक्षा जैसे मुद्दे इसके जिम्मेदार इस्तेमाल के रास्ते में बड़ी चुनौती बन सकते हैं।
जनएआई (JanAI), जो हेड हेल्ड हाई फाउंडेशन की एक पहल है, ने कर्नाटक समेत चार राज्यों के 797 सरकारी स्कूल शिक्षकों के बीच यह सर्वे किया। इनमें कर्नाटक से 134 शिक्षकों की प्रतिक्रियाएं शामिल थीं। राज्य में सर्वे में शामिल करीब 63 प्रतिशत शिक्षक ग्रामीण स्कूलों से थे, जबकि 24 प्रतिशत शहरी स्कूलों से जुड़े थे।
यह रिपोर्ट ऐसे समय सामने आई है, जब भारत में शैक्षणिक सत्र 2026-27 से कक्षा 3 से 12 तक AI और कम्प्यूटेशनल थिंकिंग को पाठ्यक्रम में शामिल करने की योजना है।
कर्नाटक के सरकारी स्कूलों में AI को लेकर बढ़ा उत्साह
चार राज्यों में किए गए सर्वेक्षण के अनुसार, 72 प्रतिशत शिक्षकों ने शिक्षा में AI को लेकर सकारात्मक रुख जताया। वहीं, करीब 26 प्रतिशत शिक्षक नियमित रूप से AI का इस्तेमाल कर रहे हैं।
शिक्षकों के लिए AI मुख्य रूप से एक सहायक तकनीक के तौर पर सामने आया है। इसका उपयोग मुश्किल अवधारणाओं को सरल भाषा में समझाने, विद्यार्थियों के लिए उदाहरण और गतिविधियां तैयार करने तथा वर्कशीट और मूल्यांकन सामग्री बनाने में किया जा रहा है।
सर्वेक्षण से यह भी संकेत मिला कि शिक्षकों को AI के कारण अपनी नौकरियां खत्म होने की चिंता प्रमुख रूप से नहीं है। इसके बजाय उनकी बड़ी चिंता यह है कि कहीं विद्यार्थी तकनीक पर जरूरत से ज्यादा निर्भर न हो जाएं।
जिन शिक्षकों ने माना कि AI की मदद से उनकी अपनी कार्यक्षमता बेहतर हुई, उनमें 86 प्रतिशत ने विद्यार्थियों की अत्यधिक निर्भरता को लेकर चिंता जताई। पूरे सर्वेक्षण में यह आंकड़ा 64 प्रतिशत था।
मोबाइल फोन से हो रहा AI का इस्तेमाल
AI अपनाने की रफ्तार कई जगह उपलब्ध बुनियादी सुविधाओं से आगे निकलती दिखाई दे रही है। कई शिक्षक स्कूलों में कंप्यूटर लैब उपलब्ध नहीं होने के बावजूद अपने निजी स्मार्टफोन के जरिए AI टूल्स इस्तेमाल कर रहे हैं।
ग्रामीण इलाकों के शिक्षकों में नई तकनीक आजमाने की इच्छा दिखाई देती है, लेकिन कमजोर कनेक्टिविटी, समय की कमी और संस्थागत सहयोग का अभाव इसके नियमित इस्तेमाल में बाधा बन सकता है। इससे पता चलता है कि केवल AI टूल उपलब्ध कराना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि स्कूलों को जरूरी डिजिटल ढांचा और लगातार तकनीकी सहायता भी देनी होगी।
छात्र डेटा की सुरक्षा सबसे बड़ी चिंता
सर्वेक्षण में AI के इस्तेमाल से जुड़ा एक महत्वपूर्ण सुरक्षा पहलू भी सामने आया है। AI का उपयोग करने वाले आधे से अधिक शिक्षकों ने बताया कि उन्होंने किसी समय विद्यार्थी का नाम, अंक या तस्वीर किसी AI टूल में दर्ज की थी।
यह स्थिति विद्यार्थियों की निजी जानकारी की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती है। यदि शिक्षकों को यह स्पष्ट जानकारी नहीं है कि AI प्लेटफॉर्म पर कौन-सी जानकारी साझा की जा सकती है और कौन-सी नहीं, तो संवेदनशील छात्र डेटा के गलत इस्तेमाल का जोखिम बढ़ सकता है।
रिपोर्ट में इसीलिए AI प्रशिक्षण को केवल टूल चलाने तक सीमित न रखने की जरूरत बताई गई है। शिक्षकों को AI से तैयार जानकारी की तथ्य-जांच करने और विद्यार्थियों के डेटा की सुरक्षा से जुड़े नियमों की जानकारी देना भी जरूरी माना गया है।
प्रशिक्षण की कमी बनी बड़ी बाधा
सर्वेक्षण में करीब 38 प्रतिशत शिक्षकों ने कहा कि उन्हें अब तक AI से संबंधित कोई प्रशिक्षण नहीं मिला है। इससे स्पष्ट होता है कि तकनीक के प्रति रुचि बढ़ने के बावजूद शिक्षकों को इसका सुरक्षित और प्रभावी इस्तेमाल सिखाने की जरूरत बनी हुई है।
स्कूलों में AI से जुड़े स्पष्ट नियम, प्रशिक्षण, सरकारी नीति, मार्गदर्शन और समस्याओं के समाधान के लिए जिम्मेदार व्यक्ति मौजूद होने पर तकनीक को अपनाने और उसके जिम्मेदार इस्तेमाल का स्तर बेहतर पाया गया।
इससे संकेत मिलता है कि AI को शिक्षा व्यवस्था में सफलतापूर्वक शामिल करने के लिए केवल व्यक्तिगत उत्साह पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं होगा। स्कूल स्तर पर स्पष्ट दिशानिर्देश और सहायता व्यवस्था भी जरूरी होगी।
50 हजार शिक्षकों को AI चैंपियन बनाने की तैयारी
जनएआई ने आने वाले 12 से 18 महीनों में ग्रामीण सरकारी स्कूलों के 50,000 शिक्षकों की पहचान, ट्रेनिंग और संगठन की योजना बनाई है। इन्हें AI चैंपियन के तौर पर तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है।
राज्यों की अलग-अलग जरूरतों को ध्यान में रखते हुए विशेष कार्यक्रम तैयार किए जाने की योजना है। इससे शिक्षकों को AI के व्यावहारिक इस्तेमाल के साथ-साथ इसकी सीमाओं, जानकारी की पुष्टि और डेटा सुरक्षा जैसे पहलुओं को समझने में मदद मिल सकती है।
शिक्षा में AI के बढ़ते इस्तेमाल ने नए अवसर जरूर खोले हैं, लेकिन इसकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि तकनीक को कितनी जिम्मेदारी और तैयारी के साथ अपनाया जाता है। बेहतर प्रशिक्षण, मजबूत डिजिटल ढांचा और विद्यार्थियों की निजी जानकारी की सुरक्षा सुनिश्चित होने पर AI कक्षाओं में शिक्षकों के लिए उपयोगी सहायक साबित हो सकता है।

Leave a Comment