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झारखंड भर्ती परीक्षा विवाद पर बढ़ा बवाल, छात्रों का आंदोलन तेज, दोबारा परीक्षा और CBI जांच की मांग

By Dainik Jan Times

Published on: August 7, 2026

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झारखंड भर्ती परीक्षा विवाद पर बढ़ा बवाल, छात्रों का आंदोलन तेज, दोबारा परीक्षा और CBI जांच की मांग

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झारखंड भर्ती परीक्षा विवाद को लेकर राज्य में छात्रों और सरकारी नौकरी के अभ्यर्थियों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा में कथित अनियमितताओं के आरोपों के बाद बड़ी संख्या में अभ्यर्थी सड़कों पर उतर आए हैं। प्रदर्शनकारी परीक्षा रद्द कर दोबारा आयोजित करने, मामले की केंद्रीय जांच एजेंसी से जांच कराने और भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग कर रहे हैं।

झारखंड भर्ती परीक्षा विवाद पर छात्रों का बड़ा प्रदर्शन

प्रदर्शन की शुरुआत जुलाई के अंतिम सप्ताह में हुई थी, लेकिन बाद में यह आंदोलन और व्यापक हो गया। राजधानी रांची में सैकड़ों छात्र अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ गए। उनका कहना है कि भर्ती परीक्षाओं में निष्पक्षता बनाए रखने के लिए स्वतंत्र जांच जरूरी है। साथ ही, कथित अनियमितताओं से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए विशेष अदालत गठित करने की मांग भी की जा रही है।

मुख्यमंत्री ने जांच का दिया भरोसा

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा है कि आरोपों की जांच जारी है और दोषियों के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने छात्रों को भरोसा दिलाया कि किसी भी योग्य अभ्यर्थी के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा। राज्य सरकार के अनुसार मामले की जांच आपराधिक जांच विभाग (CID) कर रहा है और भर्ती प्रक्रिया से जुड़े कई पहलुओं की समीक्षा की जा रही है।

कई गिरफ्तारियां और बढ़ी राजनीतिक हलचल

जांच के दौरान कथित अनियमितताओं से जुड़े मामलों में कई लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इसी बीच राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया, जिसके बाद मुख्य परीक्षा को भी स्थगित कर दिया गया। इन घटनाओं के बाद पूरे मामले ने राजनीतिक रूप ले लिया है।

राजनीतिक दलों ने भी दिखाई सक्रियता

विपक्षी दलों ने राज्य सरकार पर भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने का दबाव बनाया है। वहीं सत्तारूढ़ गठबंधन के नेताओं ने छात्रों की चिंताओं को गंभीर बताते हुए निष्पक्ष जांच का समर्थन किया है। विभिन्न छात्र संगठनों और सामाजिक समूहों ने भी आंदोलन के प्रति अपना समर्थन व्यक्त किया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि सरकारी भर्ती परीक्षाओं की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए पारदर्शी प्रक्रिया, समयबद्ध जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई आवश्यक है। इससे अभ्यर्थियों का विश्वास मजबूत होगा और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सकेगी।

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