2017 के भारत-चीन सीमा तनाव का असर हजारों किलोमीटर दूर मुंबई में स्थित चीन के सरकारी बैंक ICBC की शाखा तक पहुंचा था। एक गोपनीय आंतरिक रिपोर्ट के अनुसार, बैंक ने उस दौरान ऋण और निवेश से जुड़े कई मंजूर सौदों का भुगतान रोक दिया था।
द इंडियन एक्सप्रेस और इंटरनेशनल कंसोर्टियम ऑफ इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट्स (ICIJ) की जांच में सामने आए दस्तावेजों के अनुसार, मुंबई शाखा ने 11 स्वीकृत लेकिन अभी तक वितरित नहीं किए गए ऋण और बॉन्ड निवेशों को रोक दिया था। इन सौदों की कुल राशि करीब 185 मिलियन डॉलर बताई गई है।
डोकलाम विवाद का ICBC की मुंबई शाखा पर असर
जनवरी 2018 की ICBC की एक 178 पन्नों वाली गोपनीय कार्य रिपोर्ट में 2017 के सीमा गतिरोध का उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, उस समय मुंबई शाखा को आंतरिक और बाहरी चुनौतियों का सामना करना पड़ा, हालांकि बैंक ने सामान्य कामकाज बनाए रखने की बात कही।
दस्तावेज में कहा गया कि सीमा तनाव के दौरान बैंक ने ऋण और निवेश से जुड़े जोखिमों को कम करने के लिए कुछ वित्तीय गतिविधियों पर रोक लगाई। इस फैसले से बैंक की परिचालन आय पर भी असर पड़ा।
185 मिलियन डॉलर के 11 सौदे रोके गए
ICBC की आंतरिक रिपोर्ट के अनुसार, मुंबई शाखा ने 11 स्वीकृत लेकिन वितरित नहीं किए गए ऋण और बॉन्ड निवेशों का भुगतान रोक दिया था। इनकी कुल राशि 185 मिलियन डॉलर थी।
रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया कि इस कदम के कारण बैंक की परिचालन आय पर लगभग 6.36 मिलियन डॉलर का असर पड़ा। इसी अवधि में मुंबई शाखा अपने बीजिंग मुख्यालय द्वारा निर्धारित लाभ लक्ष्य का 57.7 प्रतिशत ही हासिल कर सकी।
पार्टी सदस्यों की भूमिका का भी उल्लेख
रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि शाखा ने अलग-अलग विभागों में कम्युनिस्ट पार्टी के सदस्यों को संकट के दौरान अपने पदों पर बने रहने के लिए संगठित किया।
दस्तावेज के अनुसार, इन सदस्यों ने चीन के दूतावास और वाणिज्य दूतावास के साथ संपर्क बनाए रखा। शाखा ने मुख्यालय के संबंधित विभागों को रिपोर्ट भेजने और परिस्थितियों से निपटने के लिए आकस्मिक योजनाएं तैयार करने की बात भी रिपोर्ट में दर्ज की।
यह जानकारी ICBC की अपनी आंतरिक रिपोर्ट के हवाले से सामने आई है और इसे जांच में शामिल दस्तावेजों में दर्ज विवरण के रूप में देखा जाना चाहिए।
कर्मचारियों के लिए भी किए गए थे विशेष प्रयास
गोपनीय रिपोर्ट में सीमा तनाव के दौरान स्थानीय कर्मचारियों से संवाद बढ़ाने के कुछ कदमों का भी उल्लेख है। बैंक के CEO की ओर से चाय बैठकों का आयोजन किया गया और कर्मचारियों के साथ व्यक्तिगत बातचीत की गई।
रिपोर्ट के अनुसार, स्थानीय कर्मचारियों की चिंताओं को समझने और कार्यस्थल पर संवाद तथा भरोसा बनाए रखने के लिए सामाजिक गतिविधियां भी आयोजित की गई थीं।
कहां से सामने आए ये दस्तावेज?
यह खुलासा ‘चाइना कैपिटल’ नाम की अंतरराष्ट्रीय जांच का हिस्सा है। जांच में ICBC के लंदन कार्यालय से जुड़े करीब 48 लाख दस्तावेजों के डेटासेट की समीक्षा की गई। इनमें आंतरिक रिपोर्ट, गोपनीय दस्तावेज और हजारों कॉरपोरेट ग्राहकों से जुड़ी जानकारी शामिल थी।
रिपोर्टों के मुताबिक, ये दस्तावेज 2005 से 2024 के बीच की अवधि से संबंधित हैं। इन्हें एक हैकिंग समूह द्वारा हासिल किए जाने के बाद ICIJ तक पहुंचाया गया और फिर विभिन्न देशों के मीडिया संस्थानों के साथ साझा किया गया।
ICBC ने द इंडियन एक्सप्रेस और ICIJ की ओर से भेजे गए सवालों का जवाब नहीं दिया था। इसलिए दस्तावेजों में दर्ज दावों पर बैंक का पक्ष उपलब्ध नहीं है।
भारत-चीन तनाव का वित्तीय असर
डोकलाम में 2017 का गतिरोध 73 दिनों तक चला था। यह क्षेत्र भारत, भूटान और चीन के त्रिकोणीय जंक्शन के पास स्थित है। जून 2017 में सड़क निर्माण को लेकर शुरू हुए विवाद के बाद दोनों देशों की सेनाएं आमने-सामने आ गई थीं और अगस्त में कूटनीतिक बातचीत के बाद दोनों पक्ष पीछे हटे थे।
ICBC की रिपोर्ट में दर्ज आंकड़े बताते हैं कि उस तनाव का असर मुंबई स्थित बैंक शाखा के वित्तीय फैसलों और प्रदर्शन पर भी पड़ा था। हालांकि, रिपोर्ट ने बैंक के सामान्य संचालन जारी रहने की बात भी दर्ज की थी।
स्रोत: द इंडियन एक्सप्रेस और ICIJ की ‘China Capital’ जांच में समीक्षा किए गए ICBC के आंतरिक दस्तावेज।

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