दिल्ली-एनसीआर में रोजाना जाम से जूझने वाले लाखों लोगों के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है। केंद्र सरकार ने करीब 6,969 करोड़ रुपये की लागत वाली 6-लेन सुरंग परियोजना को मंजूरी दे दी है। इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट का उद्देश्य द्वारका एक्सप्रेसवे को दक्षिण दिल्ली के वसंत कुंज क्षेत्र से जोड़ना है, जिससे यात्रा का समय कम होगा और ट्रैफिक का दबाव भी काफी हद तक घटने की उम्मीद है।
8.1 किलोमीटर लंबी होगी आधुनिक सुरंग
स्वीकृत परियोजना के तहत लगभग 8.1 किलोमीटर लंबा नया कॉरिडोर तैयार किया जाएगा। इसमें अत्याधुनिक तकनीक से निर्मित 6-लेन सुरंग के साथ एलिवेटेड रोड, अप्रोच रैंप और अन्य आधुनिक यातायात सुविधाएं भी शामिल होंगी। इस परियोजना का निर्माण हाइब्रिड एन्युटी मॉडल (HAM) के तहत किया जाएगा।
एयरपोर्ट और गुरुग्राम आने-जाने वालों को बड़ा फायदा
नई सुरंग बनने के बाद द्वारका, गुरुग्राम, पश्चिमी दिल्ली और दक्षिण दिल्ली के बीच आवागमन पहले से अधिक आसान हो जाएगा। विशेष रूप से इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे की ओर जाने वाले यात्रियों को लंबे ट्रैफिक जाम से राहत मिलने की उम्मीद है। इससे यात्रा का समय कम होने के साथ ईंधन की भी बचत होगी।
पर्यावरण को ध्यान में रखकर तैयार होगा प्रोजेक्ट
इस परियोजना की खास बात यह है कि सुरंग का एक हिस्सा भूमिगत बनाया जाएगा, ताकि संवेदनशील वन क्षेत्र को नुकसान न पहुंचे। आधुनिक टनल बोरिंग मशीन की मदद से निर्माण कार्य किया जाएगा, जिससे सतह पर पर्यावरणीय प्रभाव को न्यूनतम रखा जा सके।
नई सड़क और फ्लाईओवर से ट्रैफिक होगा आसान
परियोजना के तहत केवल सुरंग ही नहीं, बल्कि कई सहायक ढांचों का भी निर्माण किया जाएगा। इनमें नया एलिवेटेड रोड, अतिरिक्त फ्लाईओवर और विशेष यू-टर्न जैसी सुविधाएं शामिल हैं। इनका उद्देश्य प्रमुख चौराहों पर ट्रैफिक का दबाव कम करना और वाहनों की आवाजाही को अधिक सुगम बनाना है।
रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को भी मिलेगा बढ़ावा
इतनी बड़ी आधारभूत संरचना परियोजना से निर्माण कार्य के दौरान बड़ी संख्या में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होने की संभावना है। इसके अलावा परियोजना पूरी होने के बाद आसपास के क्षेत्रों में व्यापार, निवेश और अन्य आर्थिक गतिविधियों को भी नई गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
दिल्ली-एनसीआर की कनेक्टिविटी होगी और मजबूत
विशेषज्ञों का मानना है कि यह परियोजना केवल ट्रैफिक कम करने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि दिल्ली-एनसीआर की समग्र कनेक्टिविटी को भी मजबूत करेगी। भविष्य में अन्य प्रमुख सड़क परियोजनाओं के साथ इसका बेहतर समन्वय होने से लाखों यात्रियों को तेज, सुरक्षित और सुविधाजनक सफर का लाभ मिलेगा।

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