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किसानों की बल्ले-बल्ले! दलहन तिलहन और कपास पर मिलेगा बोनस, खाली खेत छोड़ने पर भी अनुदान

By Dainik Jan Times

Published on: May 23, 2026

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किसानों की बल्ले-बल्ले! दलहन तिलहन और कपास पर मिलेगा बोनस, खाली खेत छोड़ने पर भी अनुदान

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हरियाणा सरकार ने किसानों के लिए बड़ा फैसला लेते हुए नई कृषि प्रोत्साहन योजनाओं का विस्तार कर दिया है। किसानों को मिलेगा बोनस योजना के तहत अब दलहन, तिलहन और कपास की खेती करने वाले किसानों को अतिरिक्त आर्थिक सहायता दी जाएगी। इसके साथ ही धान की जगह कम पानी वाली फसलों को बढ़ावा देने के लिए प्रति एकड़ अनुदान भी दिया जाएगा।

सरकार का उद्देश्य जल संरक्षण को बढ़ावा देना और किसानों को वैकल्पिक खेती की ओर प्रेरित करना है। नई घोषणा के बाद राज्य के किसानों में उत्साह देखने को मिल रहा है।

किसानों को मिलेगा बोनस और अनुदान

राज्य सरकार की “मेरा पानी, मेरी विरासत” योजना का लाभ अब सभी जिलों के किसान उठा सकेंगे। योजना के तहत धान की जगह कम पानी में तैयार होने वाली फसलें लगाने पर 8000 रुपये प्रति एकड़ अनुदान मिलेगा।

इसमें मक्का, कपास, अरहर, मूंग, उड़द, ग्वार, सोयाबीन, तिल, मूंगफली, चारा फसलें, प्याज और सब्जियां जैसी फसलें शामिल हैं।

सरकार ने यह भी साफ किया है कि जो किसान धान की खेती छोड़कर खेत खाली रखेंगे, उन्हें भी योजना के तहत सहायता राशि दी जाएगी।

दलहन और कपास की खेती पर अतिरिक्त लाभ

दलहन, तिलहन और कपास की खेती करने वाले किसानों को प्रति एकड़ 2000 रुपये अतिरिक्त बोनस दिया जाएगा। यह राशि किसानों को खेती के लिए प्रोत्साहन स्वरूप प्रदान की जाएगी।

योजना का लाभ लेने के लिए किसानों को “मेरी फसल-मेरा ब्योरा” पोर्टल पर पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा। पंजीकरण प्रक्रिया 20 मई से शुरू हो चुकी है।

धान की सीधी बिजाई पर भी मिलेगा फायदा

सरकार ने धान की सीधी बिजाई योजना को महेंद्रगढ़ को छोड़कर बाकी सभी जिलों में लागू कर दिया है। इस योजना के तहत किसानों को 4500 रुपये प्रति एकड़ अनुदान दिया जाएगा।

किसान 15 जून तक पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं। भौतिक सत्यापन के बाद ही अनुदान राशि जारी की जाएगी।

पारंपरिक धान रोपाई पर लगी रोक

प्रदेश सरकार ने 15 जून तक पारंपरिक तरीके से धान की रोपाई पर रोक लगा दी है। यदि कोई किसान तय तारीख से पहले रोपाई करता पाया गया, तो उसकी फसल नष्ट की जा सकती है और जुर्माना भी लगाया जा सकता है।

सरकार का कहना है कि मानसून से पहले धान की अधिक सिंचाई भूजल स्तर को तेजी से प्रभावित करती है। इसलिए किसानों को जल संरक्षण वाली तकनीकों और फसलों को अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।

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