States Madhya Pradesh Ujjain News Agriculture Aaj ka rashifal Country and World Life Style

ईवी कंपोनेंट लोकलाइजेशन में भारत रच सकता है इतिहास, लेकिन यह बड़ी चुनौती अभी भी बनी हुई है

By Dainik Jan Times

Published on: June 24, 2026

Follow Us

ईवी कंपोनेंट लोकलाइजेशन में भारत रच सकता है इतिहास, लेकिन यह बड़ी चुनौती अभी भी बनी हुई है

---Advertisement---

ईवी कंपोनेंट लोकलाइजेशन को लेकर भारत के लिए एक बड़ी सकारात्मक तस्वीर सामने आई है। एक नई रिपोर्ट के अनुसार देश वर्ष 2030 तक इलेक्ट्रिक वाहनों के कई महत्वपूर्ण कंपोनेंट्स में 90 से 100 प्रतिशत तक घरेलू उत्पादन हासिल कर सकता है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि कुछ रणनीतिक क्षेत्रों में विदेशी निर्भरता अभी भी आत्मनिर्भरता के रास्ते में बड़ी बाधा बनी हुई है।

ईवी कंपोनेंट लोकलाइजेशन में कितनी प्रगति हुई?

रिपोर्ट के अनुसार पिछले कुछ वर्षों में इलेक्ट्रिक वाहन उद्योग में तेजी से निवेश बढ़ा है। मोटर, पावर इलेक्ट्रॉनिक्स, चार्जिंग सिस्टम और वाहन नियंत्रण इकाइयों जैसे क्षेत्रों में घरेलू उत्पादन क्षमता मजबूत हुई है। यदि घोषित परियोजनाएं समय पर पूरी हो जाती हैं, तो आने वाले वर्षों में भारत कई प्रमुख कंपोनेंट्स के निर्माण में लगभग पूरी तरह आत्मनिर्भर बन सकता है।

देश में इलेक्ट्रिक वाहनों की मांग भी तेजी से बढ़ी है। वित्त वर्ष 2020 की तुलना में ईवी बाजार कई गुना विस्तार कर चुका है, जिससे स्थानीय विनिर्माण उद्योग को नई गति मिली है।

किन क्षेत्रों में मिला सबसे ज्यादा फायदा?

ऑटोमोबाइल उद्योग में पहले से मौजूद विशेषज्ञता का लाभ इलेक्ट्रिक वाहन क्षेत्र को भी मिला है। वायरिंग हार्नेस, ब्रेकिंग सिस्टम, सस्पेंशन और थर्मल सिस्टम जैसे कई हिस्सों का उत्पादन अब बड़े स्तर पर देश में ही किया जा रहा है।

इसके अलावा कई कंपनियां ट्रैक्शन मोटर, मोटर कंट्रोलर, चार्जिंग उपकरण और पावर इलेक्ट्रॉनिक्स के निर्माण में निवेश बढ़ा रही हैं। इससे आयात पर निर्भरता कम होने की उम्मीद है।

सबसे बड़ी चुनौती क्या है?

रिपोर्ट में बताया गया है कि स्थानीय स्तर पर असेंबली बढ़ने के बावजूद कई महत्वपूर्ण तकनीकी हिस्सों के लिए भारत अब भी विदेशों पर निर्भर है। विशेष रूप से सेमीकंडक्टर, रेयर-अर्थ मैग्नेट और कुछ उन्नत सामग्रियां घरेलू स्तर पर पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध नहीं हैं।

ये तकनीकें इलेक्ट्रिक मोटर, चार्जिंग सिस्टम और वाहन नियंत्रण इकाइयों के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक इन क्षेत्रों में मजबूत आपूर्ति श्रृंखला विकसित नहीं होती, तब तक पूर्ण आत्मनिर्भरता हासिल करना मुश्किल रहेगा।

सरकारी योजनाओं की क्या भूमिका है?

सरकार की विभिन्न प्रोत्साहन योजनाओं ने इलेक्ट्रिक वाहन उद्योग को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजना और अन्य औद्योगिक कार्यक्रमों के माध्यम से कंपनियों को निवेश के लिए प्रोत्साहित किया गया है।

हालांकि रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कुछ परियोजनाओं के क्रियान्वयन में देरी और तकनीकी परीक्षण प्रक्रियाओं की सीमाएं विकास की गति को प्रभावित कर रही हैं।

2030 तक क्या है संभावना?

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत के पास वैश्विक इलेक्ट्रिक वाहन निर्माण केंद्र बनने की मजबूत क्षमता है। लेकिन इसके लिए केवल असेंबली बढ़ाना पर्याप्त नहीं होगा। देश को उन्नत तकनीकों, अनुसंधान और महत्वपूर्ण कच्चे माल की आपूर्ति श्रृंखला को भी मजबूत करना होगा।

यदि सेमीकंडक्टर और रेयर-अर्थ मैग्नेट जैसे क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता बढ़ाई जाती है, तो भारत आने वाले वर्षों में इलेक्ट्रिक वाहन उद्योग में दुनिया के प्रमुख देशों में अपनी जगह बना सकता है।

Leave a Comment