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उज्जैन में सनसनी: साधु बने भाई की तलाश में पहुंचा परिजन, पता चला दे दी गई थी समाधि; हत्या के आरोप के बाद कब्र से निकाला गया शव

By Dainik Jan Times

Published on: June 20, 2026

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उज्जैन में एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है, जिसने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है। साधु जीवन अपना चुके एक व्यक्ति की तलाश में उसका भाई जावरा से उज्जैन पहुंचा, लेकिन यहां उसे जो जानकारी मिली उसने सभी को चौंका दिया। परिजनों को बताया गया कि साधु की मौत हो चुकी है और उसे समाधि भी दे दी गई है। इसके बाद मामले ने नया मोड़ ले लिया और हत्या की आशंका जताते हुए पुलिस से शिकायत की गई।

भाई की तलाश में उज्जैन पहुंचा परिजन

जानकारी के अनुसार गंगेश्वर गिरी उर्फ सुनील जोशी मूल रूप से जावरा के रहने वाले थे। उन्होंने वर्षों पहले संन्यास ग्रहण कर लिया था और उज्जैन के मंगलनाथ मंदिर क्षेत्र में स्थित एक कुटिया में रह रहे थे। हालांकि साधु बनने के बाद भी उनका परिवार से संपर्क बना हुआ था।

बताया जा रहा है कि 10 जून को परिवार की उनसे आखिरी बार मोबाइल पर बातचीत हुई थी। इसके बाद उनका फोन बंद आने लगा। कई दिनों तक संपर्क नहीं होने पर उनका भाई अनिल जोशी उन्हें खोजने के लिए उज्जैन पहुंच गया।

मंगलनाथ क्षेत्र में मिली चौंकाने वाली जानकारी

उज्जैन पहुंचने के बाद अनिल जोशी ने अपने भाई के बारे में जानकारी जुटाना शुरू किया। उन्होंने स्थानीय लोगों और फूल-प्रसाद बेचने वालों को गंगेश्वर गिरी की तस्वीर दिखाई। इसी दौरान उन्हें पता चला कि जिस साधु की वह तलाश कर रहे हैं, उनकी मौत हो चुकी है और कुछ दिन पहले उन्हें समाधि दे दी गई थी।

यह जानकारी सुनकर परिजन हैरान रह गए। उन्हें इस पूरे घटनाक्रम की कोई सूचना नहीं दी गई थी। इसके बाद परिवार ने मामले पर गंभीर सवाल उठाए।

हत्या की आशंका के बाद पुलिस हरकत में आई

परिजनों ने पुलिस को मामले की जानकारी देते हुए साधु की मौत पर संदेह जताया। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने मामले को गंभीरता से लिया और जांच शुरू कर दी। पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी में समाधि स्थल की खुदाई कर शव को बाहर निकाला गया।

शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है ताकि मौत के वास्तविक कारणों का पता लगाया जा सके। पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि मौत स्वाभाविक थी या इसके पीछे कोई अन्य वजह है।

2010 में अपनाया था संन्यास का मार्ग

जानकारी के मुताबिक सुनील जोशी ने वर्ष 2010 में आध्यात्मिक जीवन अपनाते हुए दीक्षा ली थी और गंगेश्वर गिरी नाम से साधु जीवन व्यतीत कर रहे थे। वह लंबे समय से उज्जैन के मंगलनाथ क्षेत्र में रह रहे थे और स्थानीय लोग भी उन्हें अच्छी तरह जानते थे।

परिवार के लोगों का कहना है कि वह नियमित रूप से संपर्क में रहते थे, इसलिए अचानक संपर्क टूटना और फिर मौत की जानकारी मिलना कई सवाल खड़े करता है।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर टिकी सबकी नजर

फिलहाल पुलिस मामले की हर पहलू से जांच कर रही है। साधु की मौत किन परिस्थितियों में हुई और बिना परिजनों को सूचना दिए समाधि क्यों दी गई, इन सवालों के जवाब तलाशे जा रहे हैं। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद जांच की दिशा और स्पष्ट हो सकेगी।

इस घटना ने उज्जैन में चर्चा का विषय बना दिया है और लोग भी पूरे मामले की सच्चाई सामने आने का इंतजार कर रहे हैं।

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