States Madhya Pradesh Ujjain News Agriculture Aaj ka rashifal Country and World Life Style

MP के 4.5 लाख पेंशनरों को बड़ी राहत! महंगाई राहत में देरी खत्म करने की तैयारी, छत्तीसगढ़ को भेजा प्रस्ताव

By Dainik Jan Times

Published on: June 12, 2026

Follow Us

---Advertisement---

भोपाल। मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के लाखों पेंशनरों के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है। महंगाई राहत (डीआर) बढ़ाने में होने वाली लंबी देरी को खत्म करने के लिए मध्य प्रदेश सरकार ने अहम पहल की है। वित्त विभाग ने छत्तीसगढ़ सरकार को पत्र भेजकर उस व्यवस्था को समाप्त करने का प्रस्ताव दिया है, जिसके तहत दोनों राज्यों की सहमति के बाद ही पेंशनरों की महंगाई राहत में वृद्धि लागू की जाती है।

यदि इस प्रस्ताव पर सहमति बन जाती है, तो मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के करीब साढ़े चार लाख पेंशनरों को समय पर महंगाई राहत का लाभ मिल सकेगा और उन्हें महीनों तक इंतजार नहीं करना पड़ेगा।

क्यों होती है महंगाई राहत में देरी?

वर्ष 2000 में मध्य प्रदेश से अलग होकर छत्तीसगढ़ राज्य का गठन हुआ था। राज्य पुनर्गठन अधिनियम के तहत यह व्यवस्था बनाई गई थी कि वर्ष 2000 से पहले के कर्मचारियों और पेंशनरों से जुड़े वित्तीय मामलों में दोनों राज्यों की सहमति आवश्यक होगी।

इसी व्यवस्था के कारण जब भी केंद्र सरकार पेंशनरों के लिए महंगाई राहत (DR) बढ़ाती है, तब मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ को अलग-अलग निर्णय लेकर एक-दूसरे की सहमति का इंतजार करना पड़ता है। कई बार यह प्रक्रिया महीनों तक खिंच जाती है, जिससे पेंशनरों को समय पर लाभ नहीं मिल पाता।

पेंशनरों की लंबे समय से थी मांग

पेंशनर संगठनों का लंबे समय से कहना रहा है कि जिस तारीख से केंद्र सरकार महंगाई राहत बढ़ाती है, उसी तारीख से राज्य के पेंशनरों को भी इसका लाभ मिलना चाहिए। लेकिन मौजूदा व्यवस्था के कारण कई बार बढ़ी हुई राशि मिलने में देरी होती है और कुछ मामलों में एरियर को लेकर भी विवाद खड़े हो जाते हैं।

पेंशनर्स वेलफेयर एसोसिएशन का कहना है कि यह व्यवस्था अब अप्रासंगिक हो चुकी है क्योंकि दोनों राज्यों के बीच वित्तीय भार का फॉर्मूला पहले से तय है।

25 साल पुरानी व्यवस्था बदलने की तैयारी

जानकारी के अनुसार, वर्तमान व्यवस्था के तहत पेंशन संबंधी वित्तीय भार का लगभग 76 प्रतिशत हिस्सा मध्य प्रदेश और 24 प्रतिशत हिस्सा छत्तीसगढ़ सरकार वहन करती है। चूंकि यह अनुपात पहले से निर्धारित है, इसलिए हर बार अलग से सहमति लेने की आवश्यकता नहीं रह जाती।

इसी कारण मध्य प्रदेश सरकार ने इस प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए छत्तीसगढ़ सरकार को औपचारिक प्रस्ताव भेजा है।

पहले भी हो चुकी है पहल

इस मुद्दे पर पहली बार गंभीर पहल पूर्व मुख्यमंत्री कमल नाथ के कार्यकाल में हुई थी। उस समय कैबिनेट स्तर पर चर्चा भी हुई थी, लेकिन मामला आगे नहीं बढ़ पाया। बाद में कर्मचारी आयोग ने भी इस व्यवस्था को समाप्त करने की सिफारिश की थी।

अब मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सरकार के कार्यकाल में इस विषय को फिर से प्राथमिकता दी गई है। वित्त विभाग के निर्देश पर छत्तीसगढ़ को प्रस्ताव भेजा गया है और उम्मीद जताई जा रही है कि दोनों राज्यों में एक ही राजनीतिक दल की सरकार होने के कारण इस पर सकारात्मक निर्णय लिया जा सकता है।

पेंशनरों को क्या होगा फायदा?

यदि दोनों राज्यों के बीच सहमति बन जाती है, तो:

  • महंगाई राहत (DR) बढ़ाने में होने वाली देरी खत्म हो सकती है।
  • पेंशनरों को समय पर बढ़ी हुई राशि का लाभ मिलेगा।
  • एरियर भुगतान से जुड़े विवाद कम होंगे।
  • हर बार अलग-अलग प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी करने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
  • करीब 4.5 लाख पेंशनरों को सीधा लाभ मिलेगा।

केंद्र सरकार भी दे चुकी है संकेत

पेंशनर संगठनों के अनुसार, केंद्र सरकार भी अदालत में यह स्पष्ट कर चुकी है कि यदि दोनों राज्य चाहें तो आपसी सहमति से इस व्यवस्था में बदलाव कर सकते हैं। हालांकि इसके लिए भी दोनों राज्यों की सहमति आवश्यक है।

अब सभी की नजरें छत्तीसगढ़ सरकार के जवाब पर टिकी हैं। यदि प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है तो यह मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के लाखों पेंशनरों के लिए बड़ी राहत साबित हो सकता है।

, , , , , , , , , , , , , , , , , , ,

Leave a Comment