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कश्मीर चेरी निर्यात को मिली रफ्तार, 111 टन से ज्यादा खेप पहुंची देशभर के बाजारों में

By Dainik Jan Times

Published on: June 8, 2026

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कश्मीर चेरी निर्यात को मिली रफ्तार, 111 टन से ज्यादा खेप पहुंची देशभर के बाजारों में

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जम्मू-कश्मीर की प्रसिद्ध चेरी इस बार रिकॉर्ड स्तर पर देश के विभिन्न बाजारों तक पहुंच रही है। कश्मीर चेरी निर्यात को बढ़ावा देने के लिए रेलवे की विशेष पहल का असर अब साफ दिखाई देने लगा है। मौजूदा सीजन में अब तक 111 टन से अधिक चेरी रेल मार्ग से देश के अलग-अलग हिस्सों में भेजी जा चुकी है। इससे किसानों और बागवानों को बेहतर बाजार और उचित कीमत मिलने की उम्मीद बढ़ी है।

कश्मीर चेरी निर्यात में रेलवे की बड़ी भूमिका

जम्मू रेलवे मंडल ने चेरी जैसी जल्दी खराब होने वाली फसलों के परिवहन के लिए विशेष व्यवस्था की है। जम्मू और कटरा रेलवे स्टेशनों से एसएलआर और पार्सल वैन के माध्यम से चेरी की खेप राष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाई जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि रेल परिवहन से समय की बचत हो रही है और फलों की गुणवत्ता भी बेहतर बनी रहती है।

वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक उचित सिंघल ने बताया कि किसानों का रेलवे पर भरोसा लगातार बढ़ रहा है। यही कारण है कि इस सीजन में बड़ी मात्रा में चेरी रेल मार्ग से भेजी गई है।

किसानों को मिल रहा बेहतर लाभ

रेलवे अधिकारियों के अनुसार, परिवहन लागत कम होने से किसानों की आय में भी सकारात्मक असर देखने को मिल रहा है। पहले जहां लंबी दूरी तक सड़क मार्ग पर अधिक खर्च करना पड़ता था, वहीं अब रेल सुविधा से कम समय और कम लागत में उत्पाद बाजार तक पहुंच रहा है।

इसके अलावा रेलवे द्वारा बुकिंग, लोडिंग और आवश्यक सुविधाओं को भी आसान बनाया गया है, जिससे किसानों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ रहा है।

भविष्य में और बढ़ेगी सुविधा

जम्मू रेलवे मंडल ने संकेत दिए हैं कि आने वाले समय में अन्य बागवानी और कृषि उत्पादों के लिए भी इसी तरह की विशेष व्यवस्थाएं जारी रहेंगी। अधिकारियों का मानना है कि “फार्म टू मार्केट” की सोच को मजबूत करने में रेल परिवहन अहम भूमिका निभा सकता है।

किसानों और बागवानों से भी अपील की गई है कि वे चेरी सहित अन्य नाशवान कृषि उत्पादों के परिवहन के लिए रेलवे सेवाओं का अधिक से अधिक उपयोग करें।

निष्कर्ष

कश्मीर चेरी निर्यात में रेलवे की सक्रिय भूमिका किसानों के लिए राहतभरी खबर बनकर सामने आई है। बेहतर परिवहन व्यवस्था, कम लागत और तेज डिलीवरी से जम्मू-कश्मीर के बागवानों को राष्ट्रीय बाजारों में नई पहचान और बेहतर अवसर मिल रहे हैं।

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