उज्जैन में सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के बीच एक बड़ा खुलासा सामने आया है। शहर में सड़क चौड़ीकरण अभियान के दौरान हुई बुलडोजर कार्रवाई ने प्रशासनिक व्यवस्था और अतिक्रमण नियंत्रण को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। कार्रवाई के दौरान सामने आया कि ऐतिहासिक सती गेट का एक हिस्सा वर्षों से अतिक्रमण के बीच दबा हुआ था।
बुलडोजर कार्रवाई में सामने आया बड़ा सच
कोयला फाटक से छत्री चौक तक चल रही सड़क चौड़ीकरण परियोजना के दौरान जैसे ही एक दुकान को हटाया गया, वहां मौजूद लोगों के सामने हैरान करने वाला दृश्य दिखाई दिया। कार्रवाई के बाद पता चला कि ऐतिहासिक सती गेट का एक पूरा पिलर निर्माण के अंदर दबा हुआ था। वर्षों से इस हिस्से के सामने दुकान संचालित की जा रही थी।
500 से ज्यादा निर्माण परियोजना की जद में
जानकारी के अनुसार 15 मीटर सड़क चौड़ीकरण परियोजना के दायरे में 500 से अधिक दुकानें और मकान आ रहे हैं। प्रभावित लोगों का आरोप है कि कार्रवाई निष्पक्ष तरीके से नहीं की जा रही और कुछ निर्माणों को लंबे समय तक संरक्षण मिलता रहा।
महाकाल सवारी मार्ग पर भी अतिक्रमण
सबसे ज्यादा चिंता की बात यह मानी जा रही है कि भगवान महाकाल की शाही सवारी जिस ऐतिहासिक मार्ग से गुजरती है, उसी मार्ग पर इस तरह का अतिक्रमण वर्षों तक बना रहा। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई होती तो ऐतिहासिक धरोहर की यह स्थिति नहीं बनती।
प्रशासनिक जवाबदेही पर उठे सवाल
मामला सामने आने के बाद अब नगर निगम और संबंधित विभागों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं। लोगों का कहना है कि यदि ऐतिहासिक संरचना का हिस्सा तक कब्जे में था, तो इसकी निगरानी समय रहते क्यों नहीं हुई। अब यह मामला केवल सड़क चौड़ीकरण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही और विरासत संरक्षण से भी जुड़ गया है।

Leave a Comment