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दवा संकट की आहट युद्ध के असर से बढ़ा दबाव दवा कंपनियों ने सरकार से मांगी राहत

By Dainik Jan Times

Published on: March 21, 2026

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दवा संकट

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इस समय देश के दवा उद्योग से जुड़ी एक बड़ी चिंता सामने आ रही है जो आने वाले दिनों में आम लोगों की सेहत पर भी असर डाल सकती है। मध्य पूर्व एशिया में चल रहे युद्ध का असर अब दवा उद्योग पर साफ दिखाई देने लगा है। कच्चे माल की कमी और कीमतों में भारी बढ़ोतरी के कारण दवा कंपनियां गंभीर संकट में आ गई हैं। अगर समय रहते समाधान नहीं निकला तो अस्पतालों और स्वास्थ्य विभाग तक दवाओं की सप्लाई प्रभावित हो सकती है।

कच्चे माल की कमी से बढ़ी परेशानी

दवा बनाने वाली कंपनियों का कहना है कि ज्यादातर कच्चा माल विदेशों से आता है और मौजूदा हालात में इसकी सप्लाई बाधित हो रही है। कीमतें भी तेजी से बढ़ी हैं जिससे उत्पादन लागत काफी बढ़ गई है। ऐसे में कंपनियों के लिए पुराने दामों पर दवा बनाकर सरकारी सप्लाई देना मुश्किल होता जा रहा है। पैकेजिंग और अन्य जरूरी सामग्री भी अब नकद भुगतान पर ही मिल रही है जिससे आर्थिक दबाव और बढ़ गया है।

छोटे दवा उद्योग सबसे ज्यादा प्रभावित

एमएसएमई श्रेणी के छोटे और मध्यम दवा निर्माता इस संकट से सबसे ज्यादा जूझ रहे हैं। ये कंपनियां देश में जेनरिक दवाओं की सप्लाई का बड़ा हिस्सा संभालती हैं। रिपोर्ट के अनुसार करीब नब्बे प्रतिशत दवा सप्लाई इन्हीं इकाइयों से होती है। लेकिन बढ़ती लागत और देरी से मिलने वाले भुगतान के कारण इनकी स्थिति कमजोर होती जा रही है। अगर जल्द राहत नहीं मिली तो आने वाले समय में कई यूनिट बंद होने की कगार पर पहुंच सकती हैं।

सरकार से राहत की मांग तेज

दवा उद्योग से जुड़े संगठनों ने सरकार को पत्र लिखकर तत्काल मदद की मांग की है। उनका कहना है कि मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए नियमों में बदलाव जरूरी है। कंपनियों ने मांग की है कि पुराने टेंडर की समय सीमा बढ़ाई जाए ताकि उन्हें राहत मिल सके। साथ ही सरकारी सप्लाई में देरी होने पर लगाए जाने वाले दंड को फिलहाल रोक दिया जाए।

भुगतान में देरी बना बड़ा संकट

कंपनियों का यह भी कहना है कि सरकार को सप्लाई देने के बाद भुगतान मिलने में काफी समय लग जाता है। ऐसे में उनके पास काम जारी रखने के लिए पर्याप्त पूंजी नहीं बचती। इसलिए लंबित भुगतानों को तुरंत जारी करने की मांग भी उठाई गई है। इससे उद्योग को कुछ राहत मिल सकती है और उत्पादन जारी रह सकेगा।

जीवन रक्षक दवाओं के लिए खास मांग

दवा कंपनियों ने जीवन रक्षक दवाओं के लिए अलग व्यवस्था करने की बात कही है। उनका सुझाव है कि इन दवाओं के लिए छह महीने की जरूरत के अनुसार नए शॉर्ट टेंडर जारी किए जाएं और उनका भुगतान तुरंत किया जाए। इससे जरूरी दवाओं की सप्लाई बनी रह सकेगी और मरीजों को परेशानी नहीं होगी।

आने वाले समय में क्या हो सकता है असर

अगर हालात ऐसे ही बने रहे तो आने वाले दो से तीन महीनों में दवा सप्लाई पर बड़ा असर देखने को मिल सकता है। कई कंपनियां घाटे में जाकर काम बंद कर सकती हैं। इसका सीधा असर अस्पतालों और आम लोगों पर पड़ेगा जहां दवाओं की कमी गंभीर समस्या बन सकती है।

दवा उद्योग इस समय एक मुश्किल दौर से गुजर रहा है और इसे नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है। सरकार और उद्योग के बीच मिलकर समाधान निकालना जरूरी है ताकि देश में दवाओं की सप्लाई सुचारु बनी रहे और मरीजों को किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।

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