MP health news: इंदौर से एक ऐसी खबर सामने आई है जो हजारों कैंसर मरीजों और उनके परिवारों के लिए उम्मीद की नई किरण बन सकती है। इंदौर के एमजीएम मेडिकल कॉलेज में जल्द ही मध्य प्रदेश की पहली कैंसर जीनोम सिक्वेंसिंग लैब शुरू होने जा रही है। इस सुविधा के शुरू होते ही कैंसर की जांच के लिए अब मरीजों को अपने सैंपल मुंबई या बेंगलुरु नहीं भेजने पड़ेंगे। इलाज की दिशा में यह एक बड़ा और ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है।
इंदौर में मिलेगी अत्याधुनिक जांच सुविधा 5 से 7 दिन में रिपोर्ट
अब तक कैंसर सेल और डीएनए म्यूटेशन की जांच के लिए सैंपल मुंबई के टाटा मेमोरियल अस्पताल या बेंगलुरु के निजी केंद्रों पर भेजे जाते थे। रिपोर्ट आने में 10 से 15 दिन का समय लग जाता था। इस देरी के कारण मरीजों का इलाज भी प्रभावित होता था और परिवार चिंता में डूबा रहता था।
एमजीएम मेडिकल कॉलेज की इस नई लैब के शुरू होते ही यही रिपोर्ट अब इंदौर में ही 5 से 7 दिन के भीतर मिल सकेगी। शुरुआत में स्तन कैंसर और मस्तिष्क कैंसर की जीनोम सिक्वेंसिंग जांच की जाएगी। यह तकनीक कैंसर सेल में होने वाले डीएनए बदलाव को पहचानने में मदद करती है जिससे सही और टारगेटेड इलाज संभव हो पाता है।
इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च और डिपार्टमेंट ऑफ हेल्थ रिसर्च ने वर्ष 2014 में इस परियोजना की रूपरेखा तैयार की थी। अब एमजीएम मेडिकल कॉलेज में मल्टी डिसिप्लिनरी रिसर्च यूनिट शुरू हो चुकी है जहां कैंसर से जुड़ी उन्नत जांच और रिसर्च को गति मिलेगी। यूनिट में दो वैज्ञानिक और तीन तकनीशियन सहित पांच सदस्यीय टीम काम कर रही है। आवश्यक मशीनें खरीदी जा चुकी हैं और जल्द उनका इंस्टॉलेशन पूरा किया जाएगा।
करीब साढ़े तीन करोड़ रुपये की लागत से अत्याधुनिक उपकरण मंगवाए गए हैं। इनमें नेक्स्ट जेनरेशन जीन सिक्वेंसिंग मशीन और पीसीआर आरटीपीसीआर जांच उपकरण शामिल हैं। लगभग 20 लाख रुपये के रिऐजेंट भी उपलब्ध कराए गए हैं जिनका उपयोग शुरुआती जांच में किया जाएगा।
200 मरीजों को मुफ्त जांच और भविष्य में बड़े शोध की तैयारी
इस नई सुविधा की सबसे बड़ी खास बात यह है कि शुरुआती चरण में लगभग 200 स्तन और मस्तिष्क कैंसर मरीजों की जांच निशुल्क की जाएगी। यह कदम उन परिवारों के लिए बड़ी राहत है जो महंगे इलाज और जांच के बोझ से जूझ रहे हैं। रिसर्च के अलावा यदि अन्य मरीज जांच कराना चाहेंगे तो उन्हें निर्धारित शुल्क देना होगा।
भविष्य में इस लैब में मुंह पेट और सर्वाइकल कैंसर सहित अन्य प्रकार के कैंसर की जांच भी शुरू की जाएगी। साथ ही हृदय रोग मेटाबॉलिक डिसऑर्डर डायबिटीज और थायराइड जैसी गैर संक्रामक बीमारियों पर भी शोध किया जाएगा। विशेषज्ञों के अनुसार यहां मॉलिक्यूलर बायोलॉजी के तहत कैंसर सेल के डीएनए आरएनए और प्रोटीन की गहराई से जांच होगी जिससे बीमारी के असली कारणों को समझने और बेहतर इलाज विकसित करने में मदद मिलेगी।
इंदौर के लिए यह उपलब्धि केवल एक मेडिकल सुविधा नहीं बल्कि पूरे प्रदेश के लिए उम्मीद का नया अध्याय है। इससे न केवल समय बचेगा बल्कि मरीजों को मानसिक और आर्थिक राहत भी मिलेगी।

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