Mohan Yadav: मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव गुरुवार को शहडोल पहुंचे जहां उन्होंने जिले के विकास को नई दिशा देने वाली कई अहम घोषणाएं कीं। इस दौरे की सबसे बड़ी सौगात 2300 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला शहडोल सिंचाई कॉम्प्लेक्स रहा जिससे क्षेत्र के 122 गांवों को सीधा लाभ मिलने वाला है। इस योजना को किसानों के लिए उम्मीद की नई किरण माना जा रहा है।
2300 करोड़ की सिंचाई परियोजना से बदलेगा कृषि का भविष्य
मुख्यमंत्री ने बताया कि शहडोल सिंचाई कॉम्प्लेक्स के तहत सोन नदी पर चार माइक्रो सिंचाई परियोजनाएं प्रस्तावित हैं। इनके पूरा होने से करीब 50 हजार हेक्टेयर अतिरिक्त भूमि को सिंचाई सुविधा मिलेगी। सरकार का उद्देश्य खेती को फायदे का काम बनाना और किसानों की आय को स्थायी रूप से बढ़ाना है।
धनपुरी में विकास कार्यों का लोकार्पण
धनपुरी में आयोजित कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने नवनिर्मित वाटर पार्क का लोकार्पण किया। इसके साथ ही एसईसीएल के विस्थापित परिवारों को नियुक्ति पत्र भी सौंपे गए। इस मौके पर मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार हर वर्ग के विकास के लिए जमीन पर काम कर रही है।
2026 बनेगा कृषि वर्ष किसानों को मिलेंगे सोलर पंप
मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि वर्ष 2026 को कृषि वर्ष के रूप में मनाया जाएगा। किसानों को बिजली में आत्मनिर्भर बनाने के लिए 30 लाख सोलर पंप उपलब्ध कराने की योजना पर तेजी से काम हो रहा है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में सिंचाई का रकबा अब बढ़कर 44 लाख हेक्टेयर हो चुका है।
शिक्षा स्वास्थ्य और सड़कों पर भी फोकस
शहडोल दौरे के दौरान मुख्यमंत्री ने जैतपुर को नगर पंचायत का दर्जा देने की घोषणा की। क्षेत्र में गीता भवन के निर्माण का ऐलान किया गया जहां लाइब्रेरी और कोचिंग जैसी सुविधाएं होंगी। एक नए महाविद्यालय की शुरुआत और जैतपुर कॉलेज में कला व विज्ञान संकाय के लिए नए भवन का निर्माण भी प्रस्तावित है।
शहडोल मेडिकल कॉलेज में सीटें बढ़ाने के प्रस्ताव पर जल्द कार्रवाई का भरोसा दिलाया गया। इसके अलावा जिले में 160 करोड़ रुपये की लागत से 45 किलोमीटर लंबी सड़क और 3 किलोमीटर लंबी मॉडल रोड के निर्माण को मंजूरी दी गई।
सच्चा वादा पक्का काम सरकार की पहचान
मुख्यमंत्री ने कहा कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में राज्य सरकार जनजातीय समाज के सर्वांगीण विकास के लिए लगातार काम कर रही है। उन्होंने माता शबरी जयंती का उल्लेख करते हुए कहा कि भगवान श्रीराम और माता शबरी का प्रेम सामाजिक समरसता का प्रतीक है और सनातन संस्कृति में भेदभाव का कोई स्थान नहीं है

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