कृषि समझौते विरोध को लेकर किसानों का आक्रोश एक बार फिर सड़कों पर दिखाई दिया। भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) से जुड़े सैकड़ों किसान सोमवार को कानपुर के नरवल तहसील स्थित बांबी गांव से मथुरा के लिए रवाना हुए। भारत–अमेरिका कृषि व्यापार समझौते के विरोध में निकले इन किसानों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए किसान हितों की रक्षा की मांग की। किसानों का कहना है कि यह समझौता उनकी खेती और आजीविका के लिए खतरा बन सकता है।
12 फरवरी को देशव्यापी प्रदर्शन का ऐलान
भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) के नेता राधेश्याम मौर्य ने बताया कि संयुक्त किसान मोर्चे के आह्वान पर 12 फरवरी को देशभर के सभी जिला मुख्यालयों पर धरना-प्रदर्शन आयोजित किया जाएगा। इस दौरान किसान भारत–अमेरिका कृषि व्यापार समझौते के विरोध में राष्ट्रपति के नाम संबोधित ज्ञापन प्रशासन को सौंपेंगे। कृषि समझौते विरोध को लेकर यह आंदोलन देशव्यापी रूप ले रहा है।
‘हमारा खेत–हमारा अधिकार’ कार्यक्रम
राधेश्याम मौर्य ने आगे बताया कि जिला स्तरीय कार्यक्रम के बाद दोपहर में भारतीय किसान यूनियन की ग्राम इकाइयां ‘हमारा खेत–हमारा अधिकार’ कार्यक्रम आयोजित करेंगी। इस कार्यक्रम के तहत किसान अपने खेतों में भारत–अमेरिका कृषि व्यापार समझौता लिखा पर्चा लेकर विरोध प्रदर्शन करेंगे और अपनी असहमति दर्ज कराएंगे। कार्यक्रम की जानकारी और तस्वीरें संगठन के कार्यालय को भेजी जाएंगी।
छोटे और मझोले किसानों पर असर का डर
किसान नेताओं का कहना है कि यह समझौता देश के छोटे और मझोले किसानों के हितों के खिलाफ है। उनका मानना है कि इससे फसल के दाम, खेती की लागत और किसानों की आय पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। इसी आशंका के चलते कृषि समझौते विरोध को तेज किया जा रहा है और आंदोलन को व्यापक समर्थन मिल रहा है।
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