मध्य प्रदेश के उज्जैन से एक ऐतिहासिक और भविष्य बदलने वाली पहल सामने आई है। महाकाल की नगरी अब केवल धार्मिक आस्था का केंद्र नहीं रहेगी, बल्कि विज्ञान और समय गणना का वैश्विक केंद्र बनने की ओर तेजी से बढ़ रही है।
साइंस सेंटर से बदलेगा उज्जैन का भविष्य
करीब 15 करोड़ 20 लाख रुपये की लागत से तैयार ‘उज्जैन साइंस सेंटर’ का उद्घाटन किया गया है। यह सेंटर न केवल छात्रों और युवाओं के लिए नई तकनीक सीखने का केंद्र बनेगा, बल्कि उज्जैन को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने में भी अहम भूमिका निभाएगा।
महाकाल और विज्ञान का अनोखा संगम
उज्जैन को प्राचीन समय से ही काल गणना का केंद्र माना जाता रहा है। महाकाल को ‘समय का स्वामी’ कहा जाता है। अब यह साइंस सेंटर उसी आध्यात्मिक परंपरा को आधुनिक विज्ञान के साथ जोड़कर एक नई पहचान देने का प्रयास करेगा।
युवाओं के लिए बनेगा नया अवसर
साइंस सेंटर में अत्याधुनिक गैलरी और साइंस पार्क बनाए गए हैं, जहां छात्र प्रैक्टिकल तरीके से विज्ञान को समझ सकेंगे। यहां सैटेलाइट मॉडल, रिमोट कंट्रोल एयरक्राफ्ट और स्पेस टेक्नोलॉजी से जुड़ी कार्यशालाएं आयोजित की जाएंगी, जिससे युवाओं को ISRO और NASA जैसे संस्थानों से जुड़ने का अवसर मिलेगा।
डोंगला बनेगा ग्लोबल टाइम पॉइंट?
उज्जैन के पास स्थित डोंगला गांव से कर्क रेखा गुजरती है, जो इसे खगोलीय गणना के लिए बेहद महत्वपूर्ण बनाती है। सरकार का लक्ष्य है कि इस स्थान को ‘ग्लोबल मेरिडियन’ के रूप में विकसित किया जाए, जिससे भविष्य में दुनिया का समय भारत से तय हो सके।
अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में जुटेंगे वैज्ञानिक
इस मौके पर ‘महाकाल: द मास्टर ऑफ टाइम’ नाम से एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन भी किया जा रहा है, जिसमें ISRO, DRDO और नीति आयोग सहित देश-विदेश के वैज्ञानिक भाग लेंगे। यह सम्मेलन भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक विज्ञान के बीच सेतु का काम करेगा।
आम लोगों के लिए भी खास आकर्षण
साइंस सेंटर में ब्रह्मोस मिसाइल और अंतरिक्ष मिशनों से जुड़ी प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी, जहां आम लोग आधुनिक तकनीक को करीब से देख सकेंगे। यह प्रदर्शनी देश की बढ़ती स्पेस ताकत को दर्शाएगी।
: उज्जैन का यह साइंस सेंटर केवल एक प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि भारत को फिर से विज्ञान और समय गणना के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व दिलाने की दिशा में बड़ा कदम है।

Leave a Comment