Ujjain Latest News: महाकाल की नगरी उज्जैन से एक ऐसी खबर सामने आई है जो हर श्रद्धालु और हर उज्जैनवासी के मन को गर्व से भर देगी। अब जब कोई भी श्रद्धालु उज्जैन की सीमा में प्रवेश करेगा तो उसे शुरुआत में ही भव्यता और आध्यात्मिक गरिमा का एहसास होगा। शहर के प्रमुख मार्गों पर नौ विशाल और प्रतीकात्मक प्रवेश द्वार बनाए जाने जा रहे हैं जो यह संदेश देंगे कि यह कोई साधारण नगर नहीं बल्कि काल धर्म और मोक्ष की राजधानी है।
92.25 करोड़ की योजना से बदलेगी शहर की पहली छवि
उज्जैन विकास प्राधिकरण ने करीब 92.25 करोड़ रुपये की लागत से नौ भव्य प्रवेश द्वार बनाने की योजना तैयार की है। यह परियोजना केवल सौंदर्यीकरण तक सीमित नहीं है बल्कि इसका उद्देश्य उज्जैन की हजारों वर्षों पुरानी सनातन परंपरा सिंहस्थ संस्कृति और कालगणना की विश्व प्रसिद्ध विरासत को जीवंत रूप देना है।
इंदौर रोड देवास रोड आगर रोड मक्सी रोड बड़नगर रोड और सिंहस्थ से जुड़े प्रमुख मार्गों सहित विभिन्न दिशाओं से शहर में आने वाले रास्तों पर ये प्रवेश द्वार बनाए जाएंगे। इसके साथ ही सड़क चौड़ीकरण सर्विस रोड मीडियन हरित पट्टी और ट्रैफिक व्यवस्था का भी समग्र विकास किया जाएगा ताकि शहर में प्रवेश करते ही एक सुव्यवस्थित और गरिमामयी छवि सामने आए।
स्थापत्य में दिखेगा परंपरा और आधुनिकता का संगम
इन नौ प्रवेश द्वारों का डिजाइन पारंपरिक भारतीय स्थापत्य और आधुनिक इंजीनियरिंग तकनीक का सुंदर संतुलन होगा। निर्माण में बंसी पहाड़पुर का गुलाबी और सफेद पत्थर तथा जैसलमेर का पीला पत्थर उपयोग में लाया जाएगा। द्वारों पर गहरी थ्री डी नक्काशी की जाएगी जिसमें पौराणिक प्रसंग धार्मिक प्रतीक शेर हाथी मानव आकृतियां और सांस्कृतिक चिन्ह उकेरे जाएंगे।
रात्रि में इन द्वारों की भव्यता और अधिक निखरे इसके लिए आधुनिक प्रकाश व्यवस्था की जाएगी। ऊर्जा संरक्षण को ध्यान में रखते हुए सोलर सिस्टम भी लगाए जाएंगे ताकि ये प्रवेश द्वार दिन और रात दोनों समय उज्जैन की पहचान बनें।
प्राधिकरण के अनुसार सभी स्वीकृतियां मिलने के बाद अठारह महीनों में निर्माण कार्य पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। निर्माण के बाद पांच वर्षों तक संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी संबंधित एजेंसी को दी जाएगी।
जानिए किस द्वार पर कितना खर्च होगा
अमृत द्वार के लिए 9.68 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। पंचजन्य द्वार के लिए 12.50 करोड़ रुपये निर्धारित हैं। गज द्वार पर 8.51 करोड़ रुपये खर्च होंगे। कालगणना द्वार के लिए 11.07 करोड़ रुपये तय किए गए हैं। उज्जैनी द्वार और सिंहस्थ द्वार पर 6.48 करोड़ रुपये प्रत्येक खर्च होंगे। त्रिशूल द्वार के लिए 10.65 करोड़ रुपये स्वीकृत हैं। विक्रमादित्य द्वार पर 13.58 करोड़ रुपये और डमरू द्वार पर 13.29 करोड़ रुपये का बजट रखा गया है।
नामों में झलकती है संस्कृति और आस्था
अमृत द्वार समुद्र मंथन से निकले अमृत का प्रतीक है जो उज्जैन को मोक्ष और अमरत्व की भूमि के रूप में दर्शाता है। पंचजन्य द्वार भगवान कृष्ण के शंख से प्रेरित है जो धर्म और विजय का प्रतीक है। गज द्वार भारतीय परंपरा में ऐश्वर्य और शक्ति का संकेत देता है।
कालगणना द्वार उज्जैन की खगोल और समय गणना की विश्वविख्यात परंपरा को दर्शाएगा। उज्जैनी द्वार नगर की सांस्कृतिक आत्मा को प्रकट करेगा। सिंहस्थ द्वार विश्व प्रसिद्ध सिंहस्थ महापर्व की पहचान को सामने लाएगा। त्रिशूल द्वार भगवान महाकाल के त्रिशूल का प्रतीक होगा जो सृजन संरक्षण और संहार के दर्शन को दर्शाता है। विक्रमादित्य द्वार सम्राट विक्रमादित्य के न्याय और शौर्य की याद दिलाएगा। डमरू द्वार शिव के डमरू से जुड़े सृष्टि और समय चक्र का संदेश देगा।
इतिहासकारों के अनुसार उज्जैन में प्रवेश द्वारों की परंपरा प्राचीन काल से रही है। उस समय नगर की सीमाओं पर बने द्वार सुरक्षा के साथ साथ सांस्कृतिक गौरव और शक्ति के प्रतीक भी होते थे। यह नई योजना उसी ऐतिहासिक परंपरा को आधुनिक स्वरूप देने का प्रयास है।

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