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सिंहस्थ 2028 में जूना अखाड़ा के साथ शाही स्नान करेगा किन्नर अखाड़ा उज्जैन में हुआ बड़ा एलान

By Dainik Jan Times

Published on: March 14, 2026

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सिंहस्थ 2028

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उज्जैन की पवित्र धरती एक बार फिर सिंहस्थ महाकुंभ की भव्य तैयारियों की ओर बढ़ रही है। वर्ष 2028 में होने वाले सिंहस्थ को लेकर संत समाज में अभी से हलचल शुरू हो गई है। इसी कड़ी में अंतरराष्ट्रीय किन्नर अखाड़ा की उज्जैन में हुई महत्वपूर्ण बैठक में बड़ा फैसला लिया गया है। किन्नर अखाड़ा की आचार्य महामंडलेश्वर डॉ लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी ने घोषणा की है कि सिंहस्थ 2028 में किन्नर अखाड़ा जूना अखाड़ा के साथ मिलकर शाही स्नान करेगा। इस घोषणा के बाद संत समाज और श्रद्धालुओं के बीच यह विषय चर्चा का केंद्र बन गया है।

उज्जैन में हुई किन्नर अखाड़ा की दो दिवसीय महत्वपूर्ण बैठक

उज्जैन में सिंहस्थ 2028 को लेकर अंतरराष्ट्रीय किन्नर अखाड़ा की दो दिवसीय बैठक शिवांजलि गार्डन में आयोजित की गई। इस बैठक में देश के अलग अलग हिस्सों से आए संत और साधु शामिल हुए। बैठक के दौरान कई संतों को महामंडलेश्वर और श्रीमहंत की उपाधि भी दी गई। इसके साथ ही सिंहस्थ महाकुंभ और आने वाले अन्य कुंभ पर्वों की तैयारियों को लेकर भी विस्तृत चर्चा की गई।

बैठक के बाद आचार्य महामंडलेश्वर डॉ लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि किन्नर अखाड़ा सिंहस्थ 2028 को लेकर पूरी तरह तैयार है। उन्होंने बताया कि इस बार शाही स्नान को लेकर एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है जो किन्नर अखाड़ा की परंपरा में नई दिशा देगा।

जूना अखाड़ा के साथ शाही स्नान का लिया गया फैसला

डॉ लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी ने स्पष्ट कहा कि वर्ष 2016 के सिंहस्थ में किन्नर अखाड़े ने गंधर्व घाट पर 13 अखाड़ों से अलग स्नान किया था लेकिन वर्ष 2028 में ऐसा नहीं होगा। इस बार किन्नर अखाड़ा जूना अखाड़ा के साथ मिलकर शाही स्नान करेगा।

उन्होंने बताया कि वर्ष 2019 में किन्नर अखाड़ा और जूना अखाड़ा के बीच एक समझौता हो चुका है। उसी के अनुसार अब जहां जूना अखाड़ा शाही स्नान करेगा वहीं किन्नर अखाड़ा भी स्नान करेगा। इस निर्णय को संत समाज के बीच एक बड़ी पहल माना जा रहा है।

उज्जैन में आश्रम के लिए सरकार से मांगा जाएगा स्थान

बैठक के दौरान किन्नर अखाड़ा से जुड़े कई अन्य मुद्दों पर भी चर्चा की गई। महामंडलेश्वर लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी ने कहा कि जल्द ही वे मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव से मुलाकात करेंगी। इस मुलाकात में किन्नर अखाड़ा की समस्याओं को रखा जाएगा।

उन्होंने कहा कि जिस तरह उज्जैन में अन्य अखाड़ों को आश्रम के लिए स्थान दिया गया है उसी तरह किन्नर अखाड़े को भी यहां आश्रम बनाने के लिए जगह दी जानी चाहिए। इससे किन्नर अखाड़ा की धार्मिक गतिविधियों को नई पहचान मिलेगी और संत समाज को भी स्थायी स्थान मिल सकेगा।

बाबा महाकाल की नगरी से जुड़ी आस्था

महामंडलेश्वर लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी ने कहा कि उज्जैन की यह भूमि बाबा महाकाल की पावन नगरी है। उन्होंने बताया कि किन्नर समाज के बच्चों को इस नगरी में स्नेह और सम्मान मिला है और यही वह स्थान है जहां किन्नर अखाड़े ने अपनी आध्यात्मिक यात्रा को मजबूत किया।

उन्होंने यह भी कहा कि आज देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी किन्नर अखाड़े के संत मौजूद हैं जो सनातन परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं। यह सब बाबा महाकाल की कृपा और आशीर्वाद से संभव हुआ है।

संतों ने नृत्य कर भगवान की आराधना की

किन्नर अखाड़ा की बैठक के दौरान एक भावुक और आध्यात्मिक पल भी देखने को मिला। बैठक में मौजूद संतों ने भगवान की आराधना करते हुए नृत्य प्रस्तुत किया। इस दौरान वातावरण पूरी तरह भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा से भर गया।

महामंडलेश्वर लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी ने बताया कि किन्नर अर्धनारीश्वर का स्वरूप माने जाते हैं इसलिए वे नृत्य के माध्यम से भगवान की आराधना करते हैं। यही कारण है कि बैठक के दौरान संतों ने नृत्य कर अपनी भक्ति प्रकट की।

सिंहस्थ 2028 को लेकर बढ़ी उत्सुकता

सिंहस्थ महाकुंभ उज्जैन का सबसे बड़ा धार्मिक आयोजन माना जाता है जिसमें देश और दुनिया से करोड़ों श्रद्धालु पहुंचते हैं। किन्नर अखाड़ा और जूना अखाड़ा के साथ शाही स्नान के इस फैसले के बाद सिंहस्थ 2028 को लेकर उत्सुकता और भी बढ़ गई है। आने वाले समय में इस आयोजन को लेकर कई और महत्वपूर्ण तैयारियां सामने सकती हैं

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